दमोह, मध्य प्रदेश: अधिकतर आला अधिकारियों को लेकर उनके गुरूर और अकड़ की खबरें आप प्रदेश के कई शहरों से देखने को मिलती है लेकिन दमोह कलेक्टर मानवता की एक ऐसी मिसाल पेश की है जिसने उन्हें बाकी सभी से अलग लाकर खड़ा कर दिया है। जब उनको पता चला कि एक आदिवासी महिला गर्भवती है और डिलीवरी के दौरान उसकी हालत गंभीर है और उसे खून चढ़ाया जाना है। लेकिन उसको जिस ब्लड ग्रुप की जरूरत है वह ब्लड बैंक में है ही नहीं। कलेक्टर ने बिना देर किए स्वयं जिला अस्पताल पहुंचकर रक्तदान किया।
जिला अस्पताल के MCH वार्ड में गर्भवती महिला प्रतिमा गोंड को भर्ती कराया गया था। उसकी हालत इतनी खराब थी कि उसको तुरंत ही खून चढ़ाया जाना था।उसकी जान खतरे में थी। उसका ब्लड ग्रुप O पॉजिटिव था ब्लड बैंक में 0+ ब्लड उपलब्ध नहीं था। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन की तरफ से जिला कलेक्टर सुधीर कोचर को जानकारी दी गई, तो IAS अधिकारी खुद को रोक नहीं पाए। उनका ब्लड ग्रुप भी ओ पॉजिटिव है इसलिए वे तुरंत अस्पताल पहुंचे और उन्होंने रक्तदान किया।

हालांकि कलेक्टर ने तुरंत ही निर्णय लेते हुए स्वयं रक्त देने का निर्णय लिया था और अस्पताल भी पहुंच गए थे।लेकिन गर्भवती महिला की हालत बहुत गंभीर थी और उसे बचाया नहीं जा सका। घटना के बाद कलेक्टर ने अफसोस जाहिर करते हुए महिला की मौत पर दुख व्यक्त किया ! वहीं, इस घटना के बाद जिला प्रशासन की तरफ से एक विशेष पहल की जा रही है. डीएम सुधीर कोचर ने बताया कि लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करने के लिए अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए जिले में 14 अगस्त को जिला प्रशासन की तरफ से एक बड़ा शिविर आयोजित किया जाएगा, ताकि जरूरतमंदों व समय पर खून मिल सके।
हालांकि गर्भवती महिला की जान नहीं बचाई जा सकी क्योंकि उसकी हालत बहुत गंभीर थी और पहले ही वह नाजुक स्थिति में थी। लेकिन दमोह कलेक्टर सुधीर कोचर ने तुरंत अस्पताल पहुंचकर और एक गरीब आदिवासी महिला के लिए रक्तदान करके एक अनूठी मिसाल पेश की है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि कलेक्टर के शरीर में भी एक मानव हृदय होता है। जो दूसरे मानव के लिए चिंतित रहता है। उनकी इस सहजता और रक्तदान की भावना को देखते हुए दमोह जिले में आम लोग उनसे काफी प्रभावित हैं और अब रक्तदान का प्रण ले रहे हैं।
