डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: योग आचार्य बाबा रामदेव और उनके द्वारा स्थापित आयुर्वेद कंपनी पंतजलि एक बार फिर विवादों में फंसती नजर आ रही है। इस बार मामला उनके द्वारा बनाए गए च्यवनप्राश को लेकर है। उनके चुन प्रास के एक विज्ञापन को लेकर विवाद बढ़ गया है। पतंजलि को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने डाबर च्यवनप्राश के खिलाफ अपमानजनक विज्ञापन प्रसारित करने का हवाला देते हुए पतंजलि के विज्ञापन पर रोक लगा दी। डाबर पतंजलि के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा, जहां कहा गया कि बाबा रामदेव और पतंजलि ने उसके च्यवनप्राश की छवि को खराब किया है।
आपको बता दें कि यह पहला मौका नहीं है जब बाबा रामदेव और उनके द्वारा स्थापित पतंजलि किसी विवाद में फंसी हो दो। कानूनी पेंच में भी यह कंपनी पहले फंस चुकी है और इनके कई प्रोडक्ट लैब में अमानक भी पाए गए हैं। इससे पूर्व इंडियन मेडिकल असोसिएशन द्वारा भी इनकी कोविड के समय पर लॉन्च की गई दवा। कोरोनिल को लेकर किए गए दावों को लेकर विवाद बढ़ा था जिसमें डॉक्टर्स एसोसिएशन ने बाबा रामदेव को सुप्रीम कोर्ट तक घसीटा था। उस समय भी बाबा रामदेव को बैकफुट पर आना पड़ा था। ऐसे ही तमाम विवादों की एक लंबी लिस्ट है। जिसमें से कुछ बड़े विवाद इस तरह से रहे हैं…
मई 2025 में पतंजलि में संदिग्ध लेन-देन पर सरकार ने नोटिस भेजकर मांगी सफाई.
जनवरी 2025 में भ्रामक विज्ञापन जारी करने पर रामदेव और बालकृष्ण के खिलाफ भ्रामक विज्ञापन जारी करने जमानती वारंट जारी हुआ.
अगस्त 2022 में कोरोना के समय बाबा रामदेव की तरफ से दावा किया गया कि, हमने कोरोना खत्म करने की दवा बना ली. फिर सरकार ने फटकार लगाई तो दावे को वापस ले लिया.
मई 2021 में बाबा रामदेव ने एलोपैथी को निशाना बनाते हुए इसे ‘बेवकूफ विज्ञान’ कहा था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई. बाबा को अखबार में विज्ञापन छपवा कर IMA से माफी मांगनी पड़ी थी.
साल 2018 में बाबा रामदेव के एक समय करीबी साथी रहे कर्मवीर ने पतंजलि घी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए.
नवंबर 2015 में पतंजलि ने इंस्टेंट आटा नूडल्स लॉन्च किया, बिना फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी की मंजूरी के, जिसके बाद इस प्रोडक्ट को वापस लेना पड़ा
ताजा मामला पतंजलि द्वारा बनाए गए च्यवनप्राश के एक विज्ञापन को लेकर है। इस विज्ञापन में साफ तौर से चोनप्राश की तुलना डाबर के चौवन पास से की गई है। पतंजलि के खिलाफ डाबर ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दर्ज की थी, जिसमें कहा गया था कि पतंजलि अपने विज्ञापन में हमारे च्यवनप्राश को मामूली बता रहा है। डाबर की तरफ से पतंजलि पर 2 करोड़ रुपये का मानहानि दावा भी ठोका गया। फिलहाल हाल न्यायालय द्वारा पतंजलि के च्यवनप्राश के विज्ञापन पर रोक लगा दी गई है। अब आगे यदि डाबर द्वारा लगाए गए आरोप सिद्ध साबित होते हैं तो पतंजलि ही मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
