भोपाल मध्य प्रदेश: भाजपा विधायक संजय पाठक के खनन को लेकर काफी लंबे समय से खबरें चल रही थीं।उन पर स्वीकृति से अधिक खनन करने और राज्य सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप लग रहे थे। लेकिन अब प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ॰ मोहन यादव ने सख्ती दिखाते हुए अपने ही विधायक पर बड़ी कार्रवाई की बात कहते हुए अपनी मंशा साफ कर दी है। संजय पाठक से जुड़ी तीन खनन कंपनियों ने स्वीकृति से अधिक खनन किया था।इसको लेकर जांच भी की गई थी।अब सरकार इन तीनों कंपनी से चार सौ तैंतालीस करोड़ रुपये से अधिक की रिकवरी करने वाली है।
जबलपुर के सिहोरा में आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन निर्मला मिनरल्स पैसिफिक एक्सपोर्ट द्वारा स्वीकृत मात्रा से अधिक खनन करने के बावजूद शासन को एक हजार करोड़ रुपये की राशि जमा नहीं की गई थी। और इस गड़बड़झाली की शिकायत आशुतोष मनु। दीक्षित की ओर से ईओडब्ल्यू में इसी साल जनवरी में की थी। शिकायत के आधार पर मध्यप्रदेश खनिज संसाधन विभाग ने एक जांच दल गठित किया था और 6 जून को जांच दल। ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी थी जिसमें संजय पाठक से जुड़ी इन। तीनों कंपनी पर 443 करोड़ 4 लाख 86 हजार 90 ₹ की वसूली निकाली गई है। इस राशि पर जीएसटी की वसूली अतिरिक्त की जाएगी।
आपको बता दें कि विधानसभा में कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह और हेमंत कटारे की ओर से मंगलवार को यह प्रश्न लगाया गया था और पूछा गया था कि ईओडब्ल्यू में की गई शिकायत और उसके बाद की गई जांच के आधार पर विधायक संजय पाठक पर क्या कार्रवाई की है? प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन मोहन यादव की तरफ से लिखित में जवाब दिया गया था।जिसमें बताया गया कि भाजपा विधायक संजय पाठक से जुड़ी तीनों कंपनी ने स्वीकृति से अधिक खनन किया है और अब सरकार इनसे 443 करोड़ रुपए वसूल ने जा रही है।

हालांकि इस पूरे रिकवरी के मामले में आनंद माइनिंग। कॉर्पोरेशन और निर्मला मिनरल्स ने अपना स्पष्टीकरण जारी किया है। वह कहा है कि हम 70 वर्ष से खनिज का व्यापार कर रहे हैं। हमारी लगभग 115 वर्षों का माइनिंग का अनुभव है। इससे पहले फर्म पर रॉयल्टी या टैक्स चोरी की कोई शिकायत नहीं है। हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि हमारी खदान से कोई स्वीकृति से अधिक खनन नहीं किया गया है । जितना भी मटेरियल खदानों से बिका उस पर रॉयल्टी सेल टैक्स व जीएसटी चुकाया गया है। पूर्व में इस मामले में जाँच की गई थी जिसमें जांच के बाद कोर्ट ने सभी आरोपों को तथ्यहीन पाते हुए विभागीय आदेश को निरस्त कर दिया था।
खनिज विभाग का अपना दावा है।उनका कहना है कि जांच में उन्होंने कमी पाई थी जिस आधार में रिकवरी की रिपोर्ट तैयार की थी और खनिज विभाग की उसी रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ। मोहन यादव ने विधानसभा सत्र में प्रश्नकाल के दौरान अपना लिखित जवाब दिया है लेकिन इसके विपरीत अब संजय पाठक के अधीन कंपनी का कहना है कि उन्होंने इस मामले में कोर्ट में भी मामला लगाया था। जिसमें कोर्ट ने सभी आरोपों को तथ्यहीन बताते हुए खनिज। विभाग का आदेश निरस्त कर दिया था। अब सवाल यह उठता है कि यदि खनिज विभाग का आदेश कोर्ट ने निरस्त कर दिया था तो फिर मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने किस आधार पर जवाब दिया है।
