ग्वालियर मध्य प्रदेश : 19 अगस्त को ग्वालियर नगर निगम परिषद की बैठक जब पार्षदों के पत्रों के बदले दी गई अधूरी जानकारी और जन समस्याओं का निराकरण निगम अधिकारियों द्वारा न किए जाने के कारण हुए हंगामे के चलते स्थगित की गई थी. उसी समय यह आसार नज़र आ रहे थे के आगामी बैठक की राह भी आसान नहीं होगी। बैठक 22 अगस्त के लिए स्थगित की गई थी और आज 22 अगस्त को जो कुछ निगम परिषद की बैठक में हुआ उसने निगम परिषद की गरिमा को तार तार कर दिया। परिषद की बैठक में भाजपा के वार्ड 41 से पार्षद मोहित जाट और भाजपा के ही वार्ड 55 के पार्षद परिषद के सभापति मनोज सिंह तोमर के बीच जमकर तू तू मैं मैं हुई। और यह बहस परिषद के आसंदी तक ही सीमित नहीं रही परिषद स्थगित होने के बाद। नेता प्रतिपक्ष के कक्ष में भी भाजपा पार्षदों के बीच जमकर बहस हुई।
परिषद में इतना हंगामा क्यों हुआ और भाजपा? के ही पार्षदों में आपस में क्यों ठन गई इसके लिए पिछली? कुछ परिषद बैठक के माहौल को समझना भी जरूरी है। 19 अगस्त की परिषद बैठक में ही नेता प्रतिपक्ष हरिपाल ने ऐलान किया था कि जब तक पूरी जानकारी मिलने और निगम अधिकारियों द्वारा काम न किए जाने के मुद्दे पर कोई कार्रवाई नहीं होगी तब तक परिषद नहीं चलने दी जाएगी। उस समय भाजपा के सभी पार्षदों ने मिलकर आसंदी। का घेराव किया था और नारेबाजी करते हुए परिषद नहीं चलने दी थी और आगे भी नहीं चलने देने के ऐलान से साफ नजर आ रहा था कि भाजपा पार्षद जबरदस्त विरोध के मूड में है।
लेकिन 22 अगस्त शुक्रवार को हुई परिषद की बैठक में माहौल बदला हुआ था नेता प्रतिपक्ष हरिपाल और सभापति मनोज तोमर सुर में सुर मिलाते नजर आए। लेकिन भाजपा पार्षद मोहित जाट पिछली बैठक के मुद्दो पर ही अड़ गए। वह खड़े होकर सभापति से बोलते रहे कि। मुझे बोलने का मौका दिया जाए। लेकिन सभापति ने उनको जबरदस्ती बिठाने की कोशिश की। इस पर मोहित जाट ने निगम परिषद के नियम 25 का का हवाला दिया कि मुझे बोलने का अधिकार है इस पर बहस और बढ़ गई। बहस इतनी बढ़ गई कि दोनों के बीच तीखी नोंक झोंक होने लगी। और सभापति को यहाँ तक कहना पडा कि मै तुम्हारी सदस्यता परिषद से खत्म कर दूंगा। और तुम्हारी शिकायत संभाग आयुक्त तक भेजूंगा।
अब हम समझें कि यह विवाद क्यों हुआ। इस मामले में मोहित जाट से जब हमने चर्चा की तो उन्होंने बताया के बिजली सड़क पानी जैसे जनहित के मुद्दों पर मैं चर्चा करना चाहता था। परिषद की उन्नीस अगस्त की बैठक में हमारे भाजपा पार्षद भी इन्हीं सभी मुद्दों को लेकर एकजुट थे और परिषद में हंगामा करके परिषद स्थगित करा दी थी। आज भाजपा के सभी पार्षद और साथ में नेता प्रतिपक्ष हरिपाल के सुर बदले हुए थे। मोहित जाट ने साफ आरोप लगाया कि दो दिन पहले सभी पार्षद एकजुट होकर भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ बोलते हैं फिर दो दिन बाद ऐसा क्या होता है कि वह पूरा एजेंडा ही खत्म हो जाता है। पहले हरिपाल कहते हैं परिषद नहीं चलने दूँग और आज परिषद चलने देते हैं। यह सब लोग एक हैं, मिले हुए हैं। जनता को बेवकूफ बना रहे हैं। जनता के मुद्दे और भ्रष्टाचार को सभापति गंभीरता से नहीं लेते।
मोहित जाट ने सभापति पर आरोप लगाया कि उन्होंने धारा पच्चीस का वाचन नहीं होने दिया नहीं तो उनकी पोल खुल जाती। सभापति ने मुझे धमकी दी परिषद से निष्कासित करा दूंगा संभाग आयुक्त तक लिख दूँगा। मैं सभापति हूँ। परिषद मेरे हिसाब से चलेगी। यह कोई तरीका नहीं होता है कि आप अपने ही पार्षद की आवाज दबा रहे हो। जब हमने मोहित जाट से पूछा यह परिषद स्थगित होने के बाद नेता प्रतिपक्ष के कक्ष में क्या हुआ तो उन्होंने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। मोहित जाट ने कहा की सभापति मनोज तोमर के गुर्गे हैं सोनू त्रिपाठी और रवि तोमर मुझसे बहस करने लगे कि आप आसंदी के खिलाफ बात करते हो। मोहित बोले कि यह सभी पार्षद दो दिन पहले कह रहे थे कि अधिकारियों को नाकों चने चबवा देंगे। मोहित ने दो दिन में सारा सेटलमेंट हो जाने का आरोप भी लगाया। मनोज तोमर को सभापति बनाने के लिए वोट मैंने भी दिया है लेकिन वह कांग्रेस की ज्यादा सुनते हैं।

जब जब हमने मोहित जाट से पूछा कि आप ज्योतिरादित्य सिंधिया महाराज के समर्थक हैं तो कहीं ऐसा तो नहीं इस बात को? लेकर मनोज तोमर आपसे खफा रहते हैं। तो मोहित जाट ने कहा अब उनके दिमाग में कुछ भी चलता हो, मैं महाराज का सिपाही था हूँ और रहूंगा। लेकिन पार्षद तो मैं आपकी पार्टी भाजपा का ही हूँ। कांग्रेस के पार्षद घंटों बोलते हैं उन्हें सभापति कभी नहीं रोकते। मोहित जाट ने आरोप लगाया कि जब भी कोई मुद्दा सेट करना होता है तो गिने चुने 4 5। पाँच मिलकर बैठ लेते हैं और सारा मामला सेट कर लेते हैं। मोहित जाट ने सभापति मनोज तोमर और नेता प्रतिपक्ष हरिपाल पर सत्ता पक्ष कांग्रेस से मिले होने का आरोप भी लगाया। आगे मोहित बोले कि अब मैं लड़ने पर उतारू हूं अंदर भी लडूँगा। बाहर भी लडूँगा। जनता के हित के मुद्दों पर जहां लड़ना होगा लड़ूंगा।
आपको बता दें कि मोहित जाट गोतिदादित्य सिंधिया के कट्टर समर्थक हैं और वह भाजपा में भी केवल इस वजह से हैं क्योंकि ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में है। वहीं दूसरी ओर मनोज तोमर नरेंद्र सिंह तोमर गुट।से आते हैं। तोमर और सिंधिया के बीच की राजनीतिक खींचतान किसी से छुपी नहीं है। जिस तरह से परिषद में तोमर गुट। के सभापति मनोज तोमर और सिंधिया गुट के पार्षद मोहित जाट के बीच जुबानी जंग छिड़ी हुई है वह साफ बता रही है कि कहीं ना कहीं मामला बहुत गहरा है। और दोनों के बीच यह खींचतान यही रुकने वाली नहीं है क्योंकि जिस तरह के तेवर सभापति मनोज तोमर परिषद में मोहित जाट के प्रति दिखाते हैं। वह शाह बताते हैं कि वह मोहित जाट की आवाज को दबाते हैं। और अब जिस तरह से मोहित जाट ने सभापति पर गंभीर आरोप लगाए हैं वह साफ बता रहे हैं कहीं ना कहीं भाजपा के अंदर ही नरेंद्र सिंह तोमर और ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट में ठनी हुई है और उसी का प्रदर्शन यह दोनों करते नजर आ रहे हैं। अब देखना होगा के दोनों गुट के इन सिपाहियों कि यह जंग कब तक चलती है और इसकी परिणीति क्या होती है?
