शहडोल मध्य प्रदेश: अक्सर लोगों के मन में यह विचार आता है कि सरकारी अधिकारी कितना खाते हैं। हां जब खाने की बात चले तो कई लोगों के मन में विचार रिश्वत खोरी। का आता है क्योंकि अमूमन देखा जाता है कि बिना रिश्वतखोरी। के आजकल कोई भी काम हो ही नहीं रहा है लेकिन हम यहाँ रिश्वत की नहीं बात कर रहे। बल्कि बात कर रहे हैं। ड्राई फ्रूट्स की आप क्या यदि मेहमान आते हैं और उनके स्वागत सत्कार में आप ड्राई फ्रूट्स परोसते हैं। तो कितना ड्राई फ्रूट्स आप उपयोग करेंगे एक किलो दो किलो लेकिन मध्य प्रदेश के बारे में कहा जाता है कि मध्य प्रदेश गजब है जी हां मध्य प्रदेश गजब है। इसके अधिकारी जो कुछ कर जाए वह वास्तव में और ऐसा ही कुछ हुआ है। शहडोल के एक जिला पंचायत में जहां अधिकारी एक कार्यक्रम के दौरान एक किलो या दो किलो नहीं बल्कि 14 किलो ड्राई फ्रूट्स हजम कर गए।
मध्यप्रदेश का जिला शहडोल लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। अभी हाल ही में यहां ब्योहारी के दो विद्यालयों मे पुताई के नाम पर लाखों रुपये की बंदरबांट का मामला सुर्खियों में रहा है। इस मामले की अभी जांच भी पूरी नहीं हो पाई है। और यह एक दूसरा मामला निकल कर आ गया है जिसमें एक कार्यक्रम के दौरान ड्राई फूड्स मंगाए गए और इन ड्राई फूड्स का बिल अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें चौदह किलो ड्राई फ़्रूट्स मंगाए जाने की बात हो रही है जिससे वहां उपस्थित कर्मचारियों ने खाया है। यह अधिकारी तो चौदह किलो ड्राई फ्रूट्स हजम कर गए लेकिन यह बात लोगों को हजम नहीं हो रही है कि कुछ लोग एक मीटिंग के दौरान 14 किलो ड्राई फ्रूट्स कैसे खा सकते हैं। लेकिन भाई यह सरकारी अधिकारी हैं जब यह सरकारी प्रोजेक्ट्स में आने वाली लाखों करोड़ों की रकम हजम कर सकते हैं तो चौदह किलो ड्राई फ्रूट्स कौन सी बड़ी बात है।
इस पूरे मामले में शहडोल जिला पंचायत सीईओ मुद्रिका।सिंह का कहना है , ” जल गंगा संवर्धन अभियान का उद्देश्य गांवों में जल संरचनाओं की सफाई करना था। इस अभियान के तहत सरकार ने गांवों में कुएं, तालाब और नदियों की सफाई का कार्य अभियान चलाकर 30 जून तक किया था। प्रदेश के सभी जिलों में इस तरह के आयोजन हुए थे।कार्यक्रम में मैं खुद मौजूद था, लेकिन मुझे इस बिल के बारे में जानकारी नहीं है। फिर भी पता करता हूं। यह आयोजन ग्राम पंचायत ने किया था और सभी वरिष्ठ अधिकारी व आमजन शामिल हुए थे।’चौदह किलो ड्राई फ्रूट्स का बिल वायरल होने के बाद
सरकारी अमला यह दावा कर रहा है कि यह अभियान जनसहयोग से चल रहा है। इसके लिए कोई बजट नहीं आया है। गोविंद गुप्ता किराना स्टोर, ग्राम भर्री की ओर से यह बिल ग्राम पंचायत भदवाही के नाम पर भेजा गया है। यह बिल सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस बिल में तमाम ड्राई फ्रूट्स की मात्रा और उसकी कीमत को लेकर भी बड़ी विसंगति देखी जा रही है। इस बिल में काजू 1000 रुपये किलो होना बताया गया है जबकि मार्केट में काजू 600 से 700 रुपए किलो मे मिल जाता है। किराना व्यापारी के बिल में पांच किलो काजू, छह किलो बादाम का उल्लेख है। अब आप भी बताइए कि आप काजू ज्यादा खाते हैं या बादाम! बिल में तीन किलो किसमिस का उल्लेख है। अन्य सामग्री जैसे 30 किलो नमकीन और 20 पैकेट बिस्कुट का भी खर्च शामिल है। इसके अलावा छह लीटर दूध में पांच किलो शक्कर मिलाकर चाय भी पिलाई गई है।
अब इस पूरे मामले की असली हकीकत समझिए वहां ग्राम चौपाल। का जो कार्यक्रम हुआ उसमें ड्राई फ्रूट्स ना तो मंगाए गए और ना ही खिलाए गए। ग्रामीणों का दावा है कि कार्यक्रम के दौरान स्वल्प आहार की व्यवस्था थी।वहां उपस्थित सभी कर्मचारियों अधिकारियों और ग्रामीणों ने पुड़ी और खिचड़ी खाई थी। वहां ड्राई फ्रूट्स नाम की कोई चीज तो थी ही नहीं। लेकिन ड्राई फ्रूट्स का बिल बनवाया गया और तुरंत ही इस बिल। की रकम उन्नीस हजार रुपए अदा कर दी गई। इस गड़बडझाले के बाद जिस तरह से जिला पंचायत सीईओ जवाब दे रहे हैं वह स्थिति स्पष्ट नहीं कर रहा है लेकिन यदि उनकी उपस्थिति में भी इस तरह का गड़बड़ झाला हो रहा है तो यह साबित कर रहा है के पूरे कुएं में ही भांग घुली हुई है।
