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क्या भर्ती के बीच बदल जा सकते हैं नियम? सुप्रीम कोर्ट ने इस पर दिया बड़ा फैसला

शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकारी नौकरियों में चयन के नियमों या एलीजिबिलिटी क्राइटेरिया को बीच में या भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद तब तक नहीं बदला जा सकता जब तक कि नियम इसकी अनुमति न दें।

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने सरकारी नौकरियों में भर्ती को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने इस बारे में कहा कि सरकारी नौकरियों के लिए भर्ती नियमों को बीच में नहीं बदला जा सकता। उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में यह भी कहा कि सरकारी नौकरियों के लिए चयन नियम भर्ती प्रक्रिया शुरू होने से पहले तय किए जाने चाहिए। भारत के मुख्य न्यायधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने से पहले निर्धारित किए जा चुके नियमों से बीच में छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। पीठ में जस्टिस हृषिकेश रॉय, जस्टिस पीएस नरसिम्हा, जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस मनोज मिश्रा भी शामिल थे। 

शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकारी नौकरियों में चयन के नियमों या एलीजिबिलिटी क्राइटेरिया को बीच में या भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद तब तक नहीं बदला जा सकता जब तक कि नियम इसकी अनुमति न दें। न्यायालय ने कहा कि सरकारी नौकरियों में नियुक्ति के नियमों में बीच में तब तक बदलाव नहीं किया जा सकता जब तक कि ऐसा निर्धारित न किया गया हो। पीठ ने जुलाई 2023 में इस मामले पर फैसला सुरक्षित रखने के बाद आज फैसला सुनाया। पीठ ने कहा कि चयन नियम मनमाने नहीं बल्कि संविधान के अनुच्छेद 14 के अनुरूप होने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने सर्वसम्मति से कहा कि पारदर्शिता और गैर-भेदभाव सार्वजनिक भर्ती प्रक्रिया की पहचान होनी चाहिए। बीच में नियमों में बदलाव करके उम्मीदवारों को हैरान- परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

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