भोपाल मध्य प्रदेश: आज भोपाल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने चौंकाने वाली जानकारी दी है। नेता प्रतिपक्ष ने स्मार्ट मीटर परियोजना को लेकर प्रदेश और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने स्मार्ट मीटर को ‘स्पाई मीटर’ करार देते हुए इसे नागरिकों की निगरानी करने और डेटा जासूसी की आशंका व्यक्त की। इसी के साथ उन्होंने परियोजना में शामिल कंपनियों के विदेशी संपर्क..खासतौर से पाकिस्तानी कनेक्शन और डेटा गोपनीयता के उल्लंघन की आशंकाओं पर भी बात की। नेता प्रतिपक्ष के आरोप बेहद गंभीर हैं और पाकिस्तानी कनेक्शन होने की बात एक राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।
हालांकि मध्यप्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने की अनिवार्यता पर सरकार ने तीन वर्ष के लिए एक्सटेंशन दे दिया है लेकिन अभी तक तमाम उपभोक्ताओं के मीटर बदले जा चुके हैं उनके घर स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। और अब स्मार्ट मीटर के पीछे विदेशी कंपनी और पाकिस्तान तक के हाथ नजर आ रहा है। सरकार ने अचानक एक्सटेंशन तीन साल का क्यों दिया यह भी एक बड़ा सवाल है। कहीं ऐसा तो नहीं कि सरकार को भी इस बात का अंदेशा हो और आगे और ज्यादा किरकिरी से बचने के लिए तीन साल का यह विराम देने का कदम उठाया हो।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मध्यप्रदेश में “स्मार्ट मीटर” के लिए जिस अल्फानार कंपनी को ठेका दिया गया है, उसका मुख्यालय दुबई में है और उसके निवेश संबंध पाकिस्तानी कंपनियों से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले पश्चिम डिस्कॉम ने दस्तावेज़ों की कमी के कारण अल्फानार को ठेका देने से मना किया था लेकिन बाद में पूर्व डिस्कॉम ने इसी कंपनी को 897 करोड़ का ठेका दे दिया। कांग्रेस नेता ने कहा कि लगभग ₹2,000 करोड़ के स्मार्ट मीटर ठेके एक ऐसी कंपनी को दिए गए, जिसे पहले “अयोग्य” घोषित किया गया था।
यह भी पढ़ें कोचिंग कल्चर होगा खत्म, पीएम मोदी ने कर ली पीएम ई विद्या की तैयारी
उमंग सिंघार ने कहा कि स्मार्ट मीटर अब सिर्फ बिजली मापने का साधन नहीं रह गया है, बल्कि नागरिकों की निगरानी और हर घर की जासूसी का माध्यम बन चुका है। इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 2,000 करोड़ रुपये है। उन्होंने परियोजना में शामिल कंपनियों सऊदी अरब की Alfanar, दुबई की EsyaSoft Technologies और Landis & Gyr पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सितंबर 2023 में पश्चिम डिस्कॉम ने Alfanar को दस्तावेजों की कमी के कारण अयोग्य घोषित किया था, लेकिन इसके बावजूद जनवरी 2024 में पूर्व डिस्कॉम ने Alfanar को 897 करोड़ रुपये और मध्य डिस्कॉम ने 1,100 करोड़ रुपये का ठेका दिया। जिस कंपनी को पहले अयोग्य घोषित किया गया और बाद में उसी को ठेका दिया गया।यह गड़बड़ झाला भी सरकार की मंशा पर बड़े सवाल खड़े करती है।

यह भी पढ़ें DA hike; केन्द्रीय कर्मचारियों की हैप्पी दिवाली, 3% बढ़ गया महंगाई भत्ता
कांग्रेस नेता ने परियोजना में पाकिस्तानी कनेक्शन का आरोप लगाते हुए कहा कि Alfanar के परियोजना GM ज़हर इकबाल शाह और संपर्क अधिकारी नईम अब्बास पाकिस्तानी नागरिक हैं। अक्टूबर 2024 में Alfanar ने पाकिस्तान सरकार के साथ एक MoU साइन किया, जिसके तहत Overseas Employment Corporation स्थापित की गई। उन्होंने कहा कि DPIIT के नियम के अनुसार, पाकिस्तान या बांग्लादेश से जुड़ी कंपनियों को ठेके देने से पहले केंद्र सरकार की अनुमति अनिवार्य है लेकिन इस नियम की अनदेखी की गई।
बिजली विभाग की स्मार्ट मीटर योजना पर लगाए गए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के आरोप गंभीर हैं।उन्होंने तमाम साक्ष्य भी पेश किए हैं। उन्होंने पाकिस्तानी नागरिक किस पद पर हैं उसका भी खुलासा किया है और इन सबके बावजूद भी एक दुबई बेस कंपनी को स्मार्ट मीटर का ठेका दिया जाना राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने के समान है क्योंकि दुबई निसंदेह हमेशा पाकिस्तान का पक्ष धर रहा है और जिस कंपनी ने ठेका लिया है उसमें पाकिस्तानी अधिकारी कर्मचारी कार्य कर रहे हैं वह कभी भी भारत के खिलाफ षड्यंत्र रच सकते हैं। एक और देश स्वदेशी स्वदेशी का राग अलाप रहा है और दूसरी ओर स्मार्ट मीटर लगाने का ठेका एक विदेशी कंपनी को दिया गया है जो सरकार के दोहरे चरित्र को उजागर करता है।
