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टाइगर की मौत का मामला गर्माया, डीएफओ की बढी मुश्किलें

रेडियो कॉलर से मिलने वाले स्टैटिक अलर्ट के आधार पर वन अमले ने मौके पर पहुंचकर जांच की, जहां बाघ मृत पाया गया। इसके बाद पोस्टमार्टम कराया गया। प्रारंभिक रिपोर्ट में बाघ की मौत का कारण टेरिटोरियल फाइट बताया गया है, यानी क्षेत्र में वर्चस्व की लड़ाई के दौरान दूसरे बाघ से संघर्ष में उसकी जान गई।

भोपाल मध्य प्रदेश: नौरादेही टाइगर रिजर्व में कान्हा से लाए गए बाघ की मौत के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। मामले में लापरवाही के आरोपों के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख ने टाइगर रिजर्व के डीएफओ रजनीश कुमार सिंह को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है। वहीं वन विभाग ने बाघ की मौत की प्रारंभिक वजह टेरिटोरियल फाइट (क्षेत्रीय संघर्ष) बताई है। जानकारी के अनुसार 15 फरवरी की शाम को नौरादेही टाइगर रिजर्व में एक बाघ मृत अवस्था में मिला था। यह बाघ करीब एक माह पहले कान्हा टाइगर रिजर्व से यहां लाया गया था। 18-19 जनवरी की दरमियानी रात बाघ को रेडियो कॉलर लगाकर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया था। तब से उसकी नियमित मॉनीटरिंग की जा रही थी।

बताया गया कि बाघ की लोकेशन लगातार दो दिनों तक एक ही स्थान पर स्थिर बनी रही। रेडियो कॉलर से मिलने वाले स्टैटिक अलर्ट के आधार पर वन अमले ने मौके पर पहुंचकर जांच की, जहां बाघ मृत पाया गया। इसके बाद पोस्टमार्टम कराया गया। प्रारंभिक रिपोर्ट में बाघ की मौत का कारण टेरिटोरियल फाइट बताया गया है, यानी क्षेत्र में वर्चस्व की लड़ाई के दौरान दूसरे बाघ से संघर्ष में उसकी जान गई।

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हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने शिकायत में कहा कि रेडियो कॉलर लगे बाघ का मृत पाया जाना और विभागीय प्रेस नोट कई संदेह पैदा करता है। दुबे के अनुसार रेडियो कॉलर हर आठ घंटे में स्टैटिक अलर्ट भेजता है, जो यह संकेत देता है कि बाघ की गतिविधि रुक गई है। ऐसे में दो दिनों तक एक ही जगह लोकेशन मिलने के बावजूद तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि क्षेत्रीय संघर्ष हुआ था तो उसकी आवाज या हलचल निगरानी टीम को क्यों सुनाई नहीं दी? क्या मॉनीटरिंग व्यवस्था में चूक हुई? संघर्ष में शामिल दूसरा बाघ वर्तमान में कहां है और क्या वह अन्य बाघों के लिए खतरा बन सकता है? दुबे ने यह आशंका भी जताई कि यदि निगरानी में लापरवाही हुई है तो क्षेत्र में मौजूद अन्य 3-4 रेडियो कॉलर लगे बाघों की सुरक्षा भी जोखिम में हो सकती है।

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मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तर पर संज्ञान लिया गया है और डीएफओ से तीन दिन में विस्तृत जवाब मांगा गया है। अब सबकी नजर विभागीय जांच पर टिकी है कि क्या यह वास्तव में प्राकृतिक टेरिटोरियल फाइट का मामला है या मॉनीटरिंग में हुई किसी चूक का परिणाम। वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि रेडियो कॉलर से लैस बाघों की निगरानी में किसी भी प्रकार की ढिलाई भविष्य में बड़े खतरे का कारण बन सकती है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो पाएगी।

Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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