भोपाल मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश इसलिए भी गजब है क्योंकि यहाँ पर भ्रष्टाचार के मामले इतने अजब हैं कि मामूली बात को लेकर भी हजारों लाखों में रिश्वत वसूली जा रही है और हजारों में से ही एक ना एक मामला शिकायतकर्ता की संवेदनशीलता से लोकायुक्त या ईओडब्ल्यू तक पहुँच भी जाता है जिस पर कार्रवाई होती नर्मदापुरम से। जहां एक ऐसा रिश्वतखोर लोकायुक्त के हत्थे चढ़ा है जो सोशल मीडिया पर वायरल एक बीज की दुकान के वीडियो की जांच दबाने के नाम पर रिश्वत की मोटी रकम मांग रहा था। लेकिन इसकी किस्मत ऐसी खोटी रही कि न मोटी रकम मिली न इसकी इज्जत बची और यह लोकायुक्त के हाथों रिश्वत लेते पकड़ लिया गया।
रिश्वतखोरी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। आए दिन कोई न कोई अफसर या अधिकारी रिश्वत लेते लोकायुक्त के हत्थे चढ़ता है। ऐसे ही नर्मदापुरम में कृषि विभाग के उप संचालक को लोकायुक्त ने रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा है। आवेदक राजनारायण गुप्ता निवासी बाबई रोड कैंपियन स्कूल नर्मदापुरम ने बताया कि वह अपने भाई की खाद बीज की दुकान का काम देखते हैं। उनकी दुकान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। जिसकी जांच के नाम पर जयराम हेड़ाऊ उप संचालक कृषि नर्मदापुरम ने उनकी दुकान का लाइसेंस निलंबित कर दिया था। आवेदक लाइसेंस की बहाली हेतु जयराम हेड़ाऊ से मिला तो उन्होंने आवेदक से 1 लाख रुपयों की रिश्वत मांगी थी।

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इस मामले की शिकायत आवेदक ने पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त भोपाल को की। शिकायत के सत्यापन के बाद सही पाए जाने पर आरोपी उप संचालक जयराम हेडाऊ को 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन)2018 की धारा-7 के अंतर्गत कार्रवाई की जा रही है। जिस तरह से लगातार रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े जाने के भ्रष्टाचारियों के मामले मध्यप्रदेश में इस समय जोरों पर हैं वह साफ बता रहे हैं कि प्रदेश में पूरे सिस्टम को भ्रष्टाचारी दीमक की तरह उतर रहे हैं।अंदर ही अंदर यदि कितनी गहरी है इस बात का अंदाजा लगा पाना भी मुश्किल है।
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