भोपाल मध्य प्रदेश: अपने बेतुके और विवादित बयानों से हमेशा सुर्खियां बटोरने वाली भ्रष्ट तहसीलदार अमिता सिंह तोमर की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। हालांकि मुश्किलों में आने के तमाम कारनामे तो वे हमेशा करती रही हैं लेकिन एक ऐसा घोटाला उन्होंने किया जिसके चलते अब उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। यह वही बहुचर्चित तहसीलदार हैं जिन्होंने सबसे पहले कौन बनेगा करोड़पति में इनाम राशि जीतकर सुर्खियां बटोरी थीं, लेकिन उसके बाद उन्हें सुर्खियां बटोरने की ऐसी लत लगी कि वे सोशल मीडिया पर अनावश्यक अनर्गल टिप्पणियाँ करने लगीं।
अमिता सिंह तोमर वर्तमान में श्योपुर में तहसीलदार हैं और श्योपुर में रहते हुए ही उन्होंने ऐसा कारनामा किया जिसके चलते वह मुश्किलों में फंस गई। हालाँकि उन्होंने इन मुश्किलों से बचने के लिए न्यायालय की शरण ली, लेकिन कहीं पर भी उन्हें राहत नहीं मिली और वह बढ़ते बढ़ते माननीय सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें राहत नहीं दी है। और अब ऐसा बताया जा रहा है के उन्हें कभी भी गिरफ्तार किया जा सकता है। अनाप शनाप टिप्पणी करने वाली बेतुके बयान देने वाली और गड़बड़ झारा करने वाली इस तहसीलदार ने ऐसा क्या किया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इनको राहत नहीं दी।आइए समझते हैं।
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मामला श्योपुर का ही है। 2021 का है। आपको जानकारी होगी के पूरे ग्वालियर। चंबल अंचल में भीषण बाढ़ उस वर्ष आई थी और बाढ़ के बाद मध्यप्रदेश शासन ने तमाम हितग्राहियों को राहत राशि की घोषणा की थी। उस समय भ्रष्ट तहसीलदार कंट्रोवर्सी क्वीन अमिताभ सिंह तोमर श्योपुर जिले के तहसील बड़ौदा में तहसीलदार थीं। इस तहसील में भी 794 हितग्राहियों को राहत राशि दी जानी थी, लेकिन अमिता सिंह तोमर ने बड़ा खेल कर दिया और 2.57 करोड़ की राहत राशि फर्जी खातों में ट्रांसफर कर दी। करोड़ों का यह गबन जब खुला तो वरिष्ठ अधिकारियों के भी होश उड़ गए।
बाढ़ पीड़ितों की राहत राशि में हुए करोड़ों रुपए के गबन के इस मामले में भ्रष्ट तत्कालीन बड़ौदा तहसीलदार अमिताभ सिंह तोमर पर मामला दर्ज हुआ था और वह जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने उनकी अग्रिम याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता। इस आदेश से स्पष्ट होता है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने भी जमानत से इनकार किया है, तो अब भ्रष्टाचार के इस मामले में अमिता सिंह गिरफ्तार हो सकती है। देखना होगा कि मध्यप्रदेश की कथित कर्मठ पुलिस अब अमिता सिंह को कब तक गिरफ्तार कर पाती है।
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2.57 करोड़ की राशि बाढ़ पीड़ितों को न देते हुए तहसीलदार के साथ तमाम अन्य लोगों ने बंदरबांट कर ली थी। कुल 110 लोगों को इस मामले में आरोपी बनाया गया है। इसमें अमिता सिंह तोमर का भी नाम शामिल है। बड़ौदा, वीरपुर विजयपुर में तहसीलदार के रूप में कार्य कर चुकी हैं। अपने पालतू कुत्ते की समाधि बनाकर उन्होंने सुर्खियों में रहने की अपनी ललक का परिचय दिया था। इसी प्रकार कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री प्रियंका गांधी पर भी अशोभनीय टिप्पणी कर कर कंट्रोवर्सी क्वीन अमिता सिंह ने सुर्खियां बटोरी थीं। लेकिन अब ऐसा लगता है कि अमिताभ सिंह का सुर्खियों का घड़ा भर चुका है और भ्रष्टाचार का भी!
