डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गलगोटिया यूनिवर्सिटी का मामला भी गरमाया। सपा विधायक सचिन यादव ने अभी हाल ही में हुए एआई सबमिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी प्रकरण पर चर्चा करते हुए यूनिवर्सिटी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है की यूनिवर्सिटी ने देश की छवि धूमिल की है। चीन के प्रोडक्ट को अपना बताकर देश के आत्मनिर्भर भारत के सपने को चकनाचूर किया है। विधानसभा में सत्र के दौरान उन्होंने गलगुटिया यूनिवर्सिटी पर तमाम गंभीर आरोप लगाए हैं और साथ ही सख्त कार्रवाई की मांग की है।
विधायक सचिन यादव का कहना था कि भारत के संविधान के अनुच्छेद इक्यावन ए में कहा गया है कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सत्यनिष्ठा राष्ट्रीय कर्तव्य है। लेकिन हमारी विधानसभा में लगातार प्राइवेट यूनिवर्सिटीज के बिल आते हैं और उन्हें मान्यता देकर उन्हें बढ़ाने का काम किया जाता है। यह कोई पॉलिटिकल मुद्दा नहीं है यह यह सदन के सम्मान का प्रदेश की निष्ठा का सवाल है। इस तरह की यूनिवर्सिटी बन जाती हैं तो विश्व के मंच पर देश के मंच पर हमारे प्रदेश का नाम बदनाम करती हैं ऐसी यूनिवर्सिटी की जांच होनी चाहिए। और उन पर कार्यवाही भी होनी चाहिए।हमने इसी देश में इसी प्रदेश में आत्मनिर्भर होने का सपना देखा है। उस पर इस सदन में चर्चा हुई।मेक इन इंडिया का सपना देखा।उस पर इस सदन में चर्चा हुई।स्टार्टअप का सपना देखा उस पर इस सदन में चर्चा हुई। गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक चीन के प्रोडक्ट को अपना बताकर इन सब सपनों का चकनाचोर किया है और नौजवानों के टैलेंट से खिलवाड़ किया है।
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विधायक सचिन यादव यहीं नहीं रुके।उन्होंने उपमुख्यमंत्री को नसीहत देते हुए कहा कि जब मैंने कहा था कि यूनिवर्सिटी में रिसर्च होनी चाहिए तो उन्होंने कहा था कि रिसर्च की जरूरत नहीं है और अब जब किस तरह की यूनिवर्सिटी बनेंगी जहां रिसर्च नहीं होगी। और यूनिवर्सिटी बाहर के प्रोडक्ट को अपना बताएंगे तो हमारा प्रदेश कैसे आगे बढ़ेगा। बिना वेरिफिकेशन के एक चीन का प्रोडक्ट एआई सबमिट में कैसे पहुंचा यह सरकार की भी जिम्मेदारी है। तंज करते हुए उन्होंने कहा कि फोटो शूट कराने की बजाय उन्हें वेरिफिकेशन करना चाहिए था की एआई सबमिट में जो प्रोडक्ट पहुंच रहे हैं यह जो यूनिवर्सिटी पहुंच रही हैं।क्या वास्तव में वह रिसर्च करके अपने प्रोडक्ट बना रही हैं? और इसकी जिम्मेदारी तय करनी चाहिए। मै सरकार से अनुरोध करता हूं कि इस विषय की जांच हो और यूनिवर्सिटी पर सख्त कार्रवाई हो ताकि आगे कोई यूनिवर्सिटी ऐसा नहीं कर पाए।
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विधायक पंकज ने कहा कि यह यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश में स्थित है।इसलिए इस पर निगरानी की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश सरकार की है। यह विषय केवल विश्वविद्यालय से नहीं बल्कि देश की गरिमा वैज्ञानिक क्षमताओं से जुड़ा हुआ है। एक यूनिवर्सिटी जो पैसे कमाने का अड्डा है वह हमारे बच्चों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न नहीं लगा सकती। संविधान का अनुच्छेद इक्कीस ए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने का दायित्व राज्य पर डालता है। सरकार यह चाहती है कि हमारे बच्चे तकनीकी शिक्षा अर्जित करके विश्व में हमारे देश का नाम रोशन करें। देश की प्रतिष्ठा को धूमिल करने इस मामले में विधायकों ने यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द करने तक की मांग रख दी।
आपको बता दें कि हाल ही में दिल्ली में आयोजित यही सबमिट में तमाम यूनिवर्सिटी ने अपने रिसर्च एंड डेवलपमेंट में बने प्रोडक्ट्स का प्रदर्शन किया था और गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक रोबोट डॉग का प्रदर्शन किया था जिसे वहां की प्रोफेसर नेहा सिंह ने गलगोटिया का प्रोडक्ट बता दिया था लेकिन इसके बाद चीन की मीडिया ने इस बात की आलोचना की थी कि चीन में बने रॉबर्ट डॉग को भारत की यूनिवर्सिटी ने अपना बताया है और मामला जब तूल पकड़ा तो यूनिवर्सिटी ने अपनी गलती बताने की बजाय तरह तरह के कुत्तर खुद को सही साबित करने की कोशिश की लेकिन मामला इतना बढ़ गया कि यूनिवर्सिटी के साथ साथ केंद्र सरकार और एआई सबमिट की छवि पर सवाल उठने लगे। तब आयोजकों ने केंद्र सरकार के निर्देश पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी को एआई समिट से बाहर का रास्ता दिखा दिया। वेलकोटिया यूनिवर्सिटीज की जब से सोशल मीडिया पर जमकर किरकिरी हो रही है। लेकिन अभी तक गलगोटिया यूनिवर्सिटी के तरफ से खुद की गलती मानने वाला कोई बयान नहीं आया है।
अब विधानसभा में गलगुटिया यूनिवर्सिटी पर सख्त कार्रवाई की मांग उठी है लेकिन सरकार इस मामले को कितनी गंभीरता से लेती है? अगलगोटिया यूनिवर्सिटी पर क्या कार्रवाई करती है इस बात को लेकर अभी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
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