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आ गया एक साल का BEd, जानिए क्या है पूरी प्रक्रिया

1 साल का B.Ed कोर्स विशेष रूप से उन छात्रों के लिए डिजाइन किया गया है, जिन्होंने चार वर्षीय इंटीग्रेटेड ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा कर लिया है। इस कोर्स में थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर अधिक फोकस रहेगा।

डिजिटल डेस्क 1 year BEd; राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 से 1 साल का बी.एड (Bachelor of Education) कोर्स शुरू किया जा रहा है। यह 12 महीने का सघन कार्यक्रम (Intensive Programme) है, जो मुख्य रूप से स्नाकोत्तर (Postgraduate) डिग्री धारकों के लिए है। इसका उद्देश्य कम समय में योग्य उम्मीदवारों को शिक्षक बनने के लिए प्रशिक्षित करना है। देश में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। करीब दस साल बाद फिर से 1 वर्षीय B.Ed कोर्स को लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नई शिक्षा नीति 2020 के तहत राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी है। पिछले वर्षों में दो साल का B.Ed अनिवार्य होने से कई छात्रों को समय और खर्च दोनों की चुनौती झेलनी पड़ी थी। अब यह नया बदलाव उन अभ्यर्थियों के लिए खास अवसर बनकर उभरा है, जो कम समय में प्रोफेशनल टीचर ट्रेनिंग लेकर शिक्षा क्षेत्र में प्रवेश करना चाहते हैं।

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1 साल का B.Ed कोर्स विशेष रूप से उन छात्रों के लिए डिजाइन किया गया है, जिन्होंने चार वर्षीय इंटीग्रेटेड ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा कर लिया है। इस कोर्स में थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर अधिक फोकस रहेगा। स्कूल इंटर्नशिप, डिजिटल टीचिंग टूल्स, स्मार्ट क्लास टेक्नोलॉजी और बाल मनोविज्ञान जैसे विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। NCTE के अनुसार, जिन छात्रों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि पहले से मजबूत है, उनके लिए एक साल की गहन ट्रेनिंग पर्याप्त मानी गई है। इससे प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता भी तेजी से बढ़ेगी।

इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब शिक्षक बनने का रास्ता छोटा और किफायती हो जाएगा। दो साल की जगह एक साल में कोर्स पूरा होने से युवाओं का समय बचेगा और वे जल्दी शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में शामिल हो सकेंगे। कम फीस होने से मध्यमवर्गीय और ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों को भी अवसर मिलेगा। शिक्षा क्षेत्र में प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी दूर करने में यह कदम मददगार साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर ट्रेनिंग के साथ स्कूलों में पढ़ाई का स्तर भी सुधरेगा।

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आवेदक ने चार वर्षीय इंटीग्रेटेड स्नातक डिग्री या पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा किया हो।
सामान्य वर्ग के लिए न्यूनतम 50% अंक अनिवार्य हैं।
आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को 45% अंकों की छूट मिलेगी।
अधिकतम आयु सीमा निर्धारित नहीं की गई है।
स्नातक या परास्नातक की मार्कशीट और डिग्री प्रमाणपत्र।
आधार कार्ड या अन्य वैध पहचान पत्र।
पासपोर्ट साइज फोटो और हस्ताक्षर की स्कैन कॉपी।
जाति प्रमाणपत्र (यदि लागू हो)।
यह कोर्स अवधि में छोटा जरूर है, लेकिन इसे आधुनिक जरूरतों के अनुसार तैयार किया गया है। इसमें डिजिटल शिक्षा, नई शिक्षण पद्धतियों और व्यवहारिक प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी गई है। सरकारी कॉलेजों में संभावित फीस 20,000 से 25,000 रुपये के बीच हो सकती है, जबकि निजी संस्थानों में यह लगभग 30,000 रुपये तक रह सकती है। कुछ राज्यों में स्कॉलरशिप और इंटर्नशिप स्टाइपेंड की सुविधा भी मिल सकती है। कम समय और कम खर्च के कारण यह कोर्स युवाओं के लिए आकर्षक विकल्प बन सकता है।

Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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