भोपाल मध्य प्रदेश: जैसे जैसे तकनीक बढ़ रही है वैसे ही ठगी के तरीके भी बदल रहे हैं और साइबर फ्रॉड मैं गवाई गई रकम का आंकड़ा पिछले कुछ सालों में अप्रत्याशित रूप से बड़ा है। मध्य प्रदेश में यह आंकड़ा छह सौ अड़तीस करोड़ रुपये को पार कर चुका है और यह सारी रकम 64 हजार लोगों से ठगी गई है। यहाँ सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात यह है कि ठगे गए इन लोगों में से ज्यादातर लोग शिक्षित हैं। लेकिन ठगों के शातिर पैंतरे इतने प्रभावशाली हैं कि वह इन लोगों को भी अपने झांसे में ले लेते हैं। मध्य प्रदेश में भी साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। एमपी सहित सत्रह राज्यों में बैठे साइबर ठग के निशाने पर मध्य प्रदेश के लोग हैं।वह किसी न किसी हथकंडे को अपनाकर रोज़ लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं।
साइबर ठगी के लिए जो हथकंडे अपनाते हैं उनमें डिजिटल अरेस्ट एपीके फ़ाइल सिम स्वेप जैसे हथकंडे आजकल ज़्यादा प्रचलन में हैं। यह साइबर ठग इतने शातिर हैं कि ठगी की रकम लेते ही वे तुरंत इसे मनी लॉन्ड्रिंग की तर्ज पर लेयरिंग करते हुए एक से दूसरे तीसरे चौथे खातों में ट्रांसफर करते चले जाते हैं जिससे कि यदि कोई शिकायत करें भी तो वह ठगी के मुख्य सरगना तक नहीं पहुंच पाए। ज्यादातर मामलों में खोता भी यही है कि पुलिस लापरवाही से ठगी के मामलों में तुरंत शिकायत दर्ज नहीं करती और इस लेटलतीफी का लाभ ठगों को मिलता है। पुलिस ज्यादातर मामलों में मुख्य सरगना तक पहुंच ही नहीं पाती और किराये पे लिए गए मासूम मजबूर को ही आरोपी बनाकर पकड़ लेती है जिनके खातों में पहली लेयर में रकम गई होती है।
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मध्य प्रदेश की बात करें तो सभी बड़े शहर साइबर ठगों के निशाने पर हैं। राजधानी भोपाल में 64 करोड़ रुपये की ठगी 4490 लोगों से की गई है। जबकि इंदौर में तैंतालीस करोड़ की ठगी 147 लोगों से की गई है। ठगों ने छोटे कस्बों में अपने एजेंट बना रखे हैं। यह एजेंट जरूरतमंद लोगों को लालच देकर बहुत कम रकम में बैंक में उनका खाता खुलवा लेते हैं और खाते के सभी डॉक्यूमेंट अपने पास रख लेते हैं और यही डॉक्यूमेंट वह अपने सरगना को भेज देते हैं। साइबर ठगी की रकम जब इन लोगों के अकाउंट में पहुंचती है तो पुलिस इनके अकाउंट डिटेल्स के आधार पर इनके घर पर पहुंचकर इन गरीब लोगों को पकड़ लेती है।
प्रदेश में बढ़ रही ठगी के मामलों में ज्यादातर मामलों में रकम वापस मिलना मुश्किल हो जाता है वो इसका प्रमुख कारण पुलिस की शिथिलता है। ठगी के मामलों में रकम छोटी होने पर न तो शिकायत करता बहुत प्रयास करता है न ही छोटी मोटी ठगी की शिकायतों में पुलिस दिलचस्पी लेती है। जब ठगी की रकम बड़ी हो या ठगी किसी प्रभावशील व्यक्ति के साथ हुई हो तब ही त्वरित कार्यवाही देखने को मिलती है। आंकड़ों की मानें तो मध्यप्रदेश के आम लोगों को प्रतिदिन पांच हजार से ऊपर कॉल अलग ठगों के गैंग द्वारा किए जाते हैं।इनमें से लगभग 175 लोग प्रतिदिन ठगों का शिकार बन रहे हैं। यह आंकड़े बताते हैं के हर पच्चीस वां व्यक्ति ठगी का शिकार बन जाता है। मध्यप्रदेश के लोगों द्वारा ठगी जाने वाली रकम भी 1.75करोड़ रुपए प्रतिदिन है।
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साइबर ठगी में ज्यादातर मामलों में डूबा हुआ पैसा वापस आना मुश्किल होता है। इसलिए साइबर ठगी से बचने का एकमात्र उपाय आपकी स्वयं की सावधानी है।सबसे पहली बात तो है कि आप किसी अनजान व्यक्ति पर भरोसा ही न करें। एपी के फाइल चाहे किसी भी नजदीकी परिचित व्यक्ति द्वारा भेजी गई हो लेकिन उसको कभी नहीं खोले। पब्लिक इंटरनेट सेवा में अपने मोबाइल में बैंकिंग का प्रयोग कभी न करें। किसी भी तरह की लिंक को न दबाएं इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया पर इनवेस्टमेंट की लुभावनी स्कीमों के लालच में न पड़े। ठगी से बचने में सबसे कारगर केवल दो अस्त्र आपके पास हैं।वह अपने डर पर काबू रखना और अपने लालच पर काबू रखना क्योंकि ठगी के ज्यादातर मामलों में आपका डर या आपका लालच ही ठगी की वजह बनता है।
