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निगम परिषद में हंगामा स्थगन और करोड़ों की बर्बादी, जनसमस्या जस की तस और जनप्रतिनिधि मस्त

28 अक्टूबर 2022 से लेकर अब तक निगम में पार्षदों की शहर की समस्याओं को लेकर 80 बैठक हुई है। जिसमें 70 फीसदी हंगामे की भेंट चढ़ गयी। आप एक बैठक का खर्च सुनेंगे... चौक जाएंगे

ग्वालियर मध्य प्रदेश:  ग्वालियर नगर निगम के कारनामे ग्वालियर की जनता भली भांति जानती है लेकिन आज हम आपको आपके चुने हुए पार्षदों का ऐसा कारनामा बताने जा रहे हैं.. जिसको सुनकर ये पार्षद भले ही चुल्लू भर पानी में न डूब मरें लेकिन आपको लगेगा कि इनको वोट देने से अच्छा है कि अपना वोट कहीं चुल्लू भर पानी में फेंक देते… जनकार्य की बात हो तो निगम के अधिकारी निगम के वित्तीय संकट की दुहाई देते हैं.. जनता सीवर सड़क और पानी की मूलभूत समस्याओं के लिए जद्दोजहद कर रही है। जर्जर हालत में सड़कें हैं गंदे पानी की समस्या है। कहीं पर भी उफान और सड़ांध मारते देखे जा सकते हैं। निगम के पास जनकार्यों के लिए पैसों का टोटा है लेकिन परिषद की बैठकों में पैसा लुटाने से इन्हें किसी ने नहीं रोका है। 

शहरवासियों ने पूरे शहर में घटिया सड़कों का दर्द झेला है लेकिन उस पर परिषद में कभी गंभीर चर्चा और निर्णय नहीं हुए शहर में सीवर की समस्या तो खत्म होने का नाम ही नहीं लेती। गंदे पानी की बोतलें लेकर कुछ पार्षद पार्षद में तमाशा करते नजर जरूर आते हैं लेकिन समस्या का समाधान जनता को मिला हो ऐसा नहीं हो पाया। स्ट्रीट लाइट का मुद्दा हमेशा गर्माया लेकिन नतीजा हमेशा की तरह शून्य नजर आया। इन सबके बावजूद ग्वालियर नगर निगम परिषद काम के नाम पर बार बार स्थगित हो जाती है वही परिषद जिसे चलाने के लिए आपके चुने हुए यह पार्षद बीते तीन साल में करोड़ों उड़ा चुके है। यह पार्षद निगम में हंगामा करते हैं। निगम के काम में अटकलें लगाते हैं पक्ष विपक्ष पर आरोप प्रत्यारोप करते हैं.. और जनता की गाड़ी कमाई के टैक्स से मिठाई हलवा खाकर हाथ पोंछकर दांत दिखाते हुए घर चल देते हैं। 

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28 अक्टूबर 2022 से लेकर अब तक निगम में पार्षदों की शहर की समस्याओं को लेकर 80 बैठक हुई है। जिसमें 70 फीसदी हंगामे की भेंट चढ़ गयी। आप एक बैठक का खर्च सुनेंगे… चौक जाएंगे, क्योंकि 66 पार्षदों की एक बैठक पर एक दिन में डेढ़ से पौने दो लाख रुपए तक खर्च आता है। साल 2022 में नवंबर से दिसंबर महीने में 4 बैठक हुई। एक साधारण सभा की बैठक, 2 बैठक हंगामे के कारण स्थगित हुई। उसके बाद एक विशेष सम्मेलन बुलाया गया। – साल 2023 में 24 बैठक हुई। 5 विशेष अभियाचित सम्मेलन बुलाए गए। 12 बैठक हंगामे के कारण स्थगित हुई। 4 बैठक हंगामे के कारण स्थगित हुई। बजट सत्र हुआ, जिसमें जमकर हंगामा हुआ। – साल 2024 में 28 बैठक बुलाई गयी। 10 विशेष अभियाचित सम्मेलन बुलाए गए। 9 विशेष सम्मेलन बुलाए गए। बजट सत्र हुआ, जिसमें जमकर हंगामा हुआ। – साल 2025 में 23 बैठक बुलाई गयी। 11 बैठक हंगामे के कारण स्थगित हुई। 6 बैठकों में बजट संशोधन हुए। 

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आंकड़े साफ बता रहे हैं कि पार्षदों ने 70 फीसदी बैठकों में हंगामा किया है। निगम अध्यक्ष कहते है…. बहुत से पार्षद ऐसे है, जो पहली बार चुनकर आये है, उन्हें पता नही होता है…जिसके कारण वो उन मुद्दों को उठाते है, बहस करते है। जिसके कारण बैठक स्थगित करनी पड़ती है। एक बैठक पर डेढ़ से पौने दो लाख रुपए तक खर्च आता है। इसमें पार्षदों के नाश्ते से लेकर, उनका मानदेय 450 रूपए जुड़ा रहता है। लेकिन ये बैठके, सिर्फ ओर सिर्फ हंगामे के कारण स्थगित हो रही है। 

जनता देख लें कि उनके चुने हुए पार्षद किस तरह उनके दिए हुए टैक्स के पैसों से मौज करते हैं और परिषद भी नहीं चलने देते। जनहित के कार्य भी नहीं होने देते। तो अब यह पार्षद आपके क्षेत्र में आए तो आप इनसे यह जरूर पूछें कि आपके वोट से परिषद में पहुंचे हैं। आपके टैक्स से मौज कर रहे हैं। तो फिर परिषद को चलने क्यों नहीं दे रहे.. और यदि आपका पार्षद आपको जवाब नहीं दे तो आने वाले निगम चुनाव में अपने वोट से उसको जवाब देने की तैयारी जरूर कर लें… 

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Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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