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वीसी को छात्रों ने दे दिया समान नजर से सभी विद्यार्थियों को देखने वाला चश्मा

जीवाजी विश्वविद्यालय  में अब वाइस चांसलर पर छात्रों के साथ भेदभाव और अलग अलग नजरिए से देखने के आरोप लगे हैं और वाइस चांसलर को नसीहत देते हुए छात्रों ने एक चश्मा भी भेंट कर दिया। छात्रों का कहना था कि यह समान नजर से देखने वाला चश्मा है

ग्वालियर मध्यप्रदेश: अपने भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की खबरों के लिए पूरे देश में सुर्खियों में रहने वाला जीवाजी विश्वविद्यालय सुर्खियों में बने रहने के लिए हमेशा कुछ न कुछ करता रहता है और यहां के छात्र भी विश्वविद्यालय बीस अन्य प्रबंधकों का आईना खोलने के लिए समय समय पर कुछ न कुछ अजीबोगरीब तरीका इजाद कर ही लेते हैं। जीवाजी विश्वविद्यालय  में अब वाइस चांसलर पर छात्रों के साथ भेदभाव और अलग अलग नजरिए से देखने के आरोप लगे हैं और वाइस चांसलर को नसीहत देते हुए छात्रों ने एक चश्मा भी भेंट कर दिया। छात्रों का कहना था कि यह समान नजर से देखने वाला चश्मा है हालांकि चश्मा लेते समय वाइस चांसलर चश्मा लेते वक्त असहज नजर आए।

इस समय जीवाजी विश्वविद्यालय के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एक छात्र नेता की बी.कॉम. एलएलबी की डिग्री को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। छात्र नेता हिमांशु श्रुत पर कोर्स को पूरी सेमेस्टर फीस जमा किए बिना पूरी डिग्री कर लेने का मामला उजागर हुआ है और इसे एनएसयूआई के छात्र छात्राओं के साथ भेदभाव बता रहे हैं क्योंकि विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर और अन्य कुछ पदाधिकारी भी उसी संगठन से जुड़ाव रखते हैं जिससे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद भी संबंधित हैं। एनएसयूआई ने शुक्रवार को वाइस चैंसलर के चेंबर के बाहर धरना दिया। महासचिव कृष्ण राज भारद्वाज ने वाइस चांसलर को सभी छात्रों को एक नजरिए से देखने के लिए चश्मा तक भेंट कर दिया एबीवीपी।छात्र नेता हेमांशु की डिग्री निरस्त करने के लिए ज्ञापन सौंपा। 

हालांकि एबीवीपी छात्र नेता हेमांशु ने सभी आरोपों को खारिज किया है उनका कहना है कि न तो उनके पास डिग्री आई है न ही मारपीट केवल राजनीतिक उद्देश्य से उन पर आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने 10 सेमेस्टर के फीस की रसीद उनके पास होने की बात कही लेकिन हमें उपलब्ध नहीं कराई हैं। साथ ही उन्होंने एनएसयूआई के नेताओं को मानहानि का नोटिस भेजने की बात भी कही है। वाइस चांसलर ने संबंधित विभागों से जानकारी मांगी है। जानकारी यह है कि छात्र नेता हेमांशु ने केवल फर्स्ट सेमेस्टर में फीस दी थी उसके बाद के नौ सेमेस्टर में उन्होंने कभी फीस नहीं दी।इसके बावजूद विश्वविद्यालय ने लापरवाही करते हुए उन्हें हर परीक्षा में बैठने दिया। हर परीक्षा पास कराई। अब विभाग के संजय कुलश्रेष्ठ का कहना है कि छात्र को पत्र लिखकर बकाया शुल्क जमा करने को कहा है लेकिन सवाल यह उठता है कि बिना फीस भरे क्या छात्रों को परीक्षा देने की अनुमति है? यह हिमांशु के मामले में ही यह छूट विशेष रूप से प्रदान की गई है? 

Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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