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इंदौर में इमरती इफेक्ट, बाबा साहब की मूर्ति लगाकर सरकारी जमीन कब्जाने की कोशिश!

भोपाल इंदौर ग्वालियर मध्य प्रदेश: पूरे प्रदेश में कहीं न कहीं। तमाम हथकंडे अपनाकर सरकारी जमीन। कब्जा करने के मामले खबरों में आते रहते हैं। ज्यादातर मामलों में प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत और भू माफियाओं के राजनीतिज्ञ रसूख के चलते ही इस तरह से सरकारी जमीन पर कब्जा किया जाता है। लेकिन भू माफिया इनके अलावा भी तमाम नये-नये पैंतरे अपनाते रहते हैं। कई बार तो भू माफिया जमीन हथियाने के लिए धर्म और महापुरुषों का सहारा लेने से भी गुरेज नहीं करते। ऐसा ही एक ताज़ा मामला इंदौर से सामने आया है जहाँ एक महापुरुष की मूर्ति लगाकर उसकी आड़ में बेशकीमती सरकारी जमीन हथियाने की कोशिश की गयी है।

इंदौर के पिपल्या थाना क्षेत्र में है। बेचत सरकारी जमीन पर कब्जा करने के लिए भूमाफिया ने एक नया पैंतरा अपनाया। भू माफिया ने इस जमीन पर बाबा साहब अम्बेडकर।की मूर्ति लगाकर उसे कब्जा करने की कोशिश की। हालाँकि प्रशासन ने भू माफिया के इस मंसूबे पर पानी फेर दिया। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई कर महापुरुषों की प्रतिमाओं को सम्मान के साथ हटाकर अवैध निर्माण को जमीदोज कर दिया। अतिक्रमण हटाकर 40 करोड़ बेशकीमती सरकारी चरनोई की भूमि को मुक्त कराया है। 

जिला प्रशासन और नगर निगम ने ग्राम पिपल्याहाना के सर्वे नंबर 644 की चरनोई जमीन पर हुए अवैध कब्जे को गुरुवार को हटा दिया। यहां पर समाजिक कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मैदान में चबूतरे बनाकर संत रविदास और बाबा साहेब आंबेडकर की मूर्तियां स्थापित कर दी गई थी। यहां पर युवक-युवती परिचय सम्मेलन किया था। आयोजक नानूराम कटारिया का कहना है कार्यक्रम संपन्न होने के बाद समाज के लोगों ने चबूतरे बनाकर मूर्तियां स्थापित की थी। इससे हमारा कोई लेना देना नहीं है। 

आपको बताते हैं कि ग्वालियर के डबरा क्षेत्र सिंधिया समर्थक भाजपा नेत्रि इमरती देवी का भी। एक वीडियो सालों पहले वायरल हुआ था। जिसमें वह यह कहती हुई नज़र आ रही थी। कि कहीं भी। कोई भी सरकारी जमीन हमारी है। बस बाबा साहब की मूर्ति रख दो और। जमीन हो गई हमारी। ऐसा लगता है की इमरती देवी के इस बयान का असर प्रदेश में अन्य क्षेत्रों में भी दिखने लगा है। और लोग सरकारी जमीन हथियाने के लिए बाबा साहब अम्बेडकर की। मूर्ति का प्रयोग करने लगे हैं। जहां एक और बाबा साहब अंबेडकर का यह विचार था ये लोग शिक्षित होकर आत्मनिर्भर होकर, सम्मानित जीवन जिये। वहीं इस तरह से उनके मूर्ति के आधार पर अनैतिक कार्य करना कहीं न कहीं यह दर्शाता है कि आज बाबा साहब के नाम का प्रयोग करने वालों को उनके विचार और सिद्धांत से कोई लेना-देना नहीं है। 

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