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मलाईखोरों के लिए A++ ग्रेड यूनिवर्सिटी, छात्रों के लिए ग्रेड हीन! यूनिवर्सिटी की यह भयानक लापरवाही छात्रों पर भारी

ग्वालियर मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्थित जीवाजी विश्वविद्यालय पूरे प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे देश में अपने कारनामों के लिये कुख्यात है। जी हाँ कुख्यात है क्योंकि पूर्व में भी ऐसी कई महा त्रुटि हो चुकी है जिसके चलते विश्वविद्यालय की किरकिरी हुई है। और इन सबके पीछे विश्वविद्यालय का वह प्रशासन जिम्मेदार है जो केवल अपनी मलाई और क्रीम निकालने में लगा रहता है और छात्रों के भविष्य की उसे कोई चिंता नहीं। जैसे तैसे जुगत लगा कर जीवाजी विश्वविद्यालय ने 11 अप्रैल, 2000। तेईस को NAAC A++ यह ग्रेड हकीकत में है। जमीनी स्तर पर छात्रों के बेहतर भविष्य के लिए कितनी कारगर है ये वहां के पढ़ने वाले छात्र ही जानते हैं। लेकिन दुर्भाग्य यह है विश्वविद्यालय को तो कागजों पर यह ग्रेड मिल गई। लेकिन छात्रों को तो उनकी जीवन भर चलने वाले कागज यानी उनकी मार्कशीट पर इस ग्रेड।का उल्लेख ही नहीं हो रहा है।

यदि नियम की बात करें तो प्रदेश। के सभी विश्वविद्यालय विद्यार्थियों की मार्कशीट पर नेक द्वारा विश्वविद्यालय को दी गयी। ग्रेड। का उल्लेख करते हैं। लेकिन जीवाजी विश्वविद्यालय मैं छात्रों को जो मार्शिट दी जा रही हैं उन पर किसी प्रकार की नैक ग्रेड का उल्लेख नहीं है। जब कोई छात्र आगे करियर में कहीं इन। मार्कशीट का उपयोग करता है उस पर नैक। ग्रेड अंकित होने का लाभ छात्रों को मिलता है लेकिन यहाँ पर इन छात्रों के। मार्क शीट पर ग्रेड अंकित न होने से अब इन्हें आगे इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। जीबाजी विश्वविद्यालय प्रबन्धन ने NAAC A++ ग्रेड मिलने पर ख़ुद तो इसकी खूब वाहवाही लूटी। इसके चलते जो लाभ मिल सकते थे, उनको भी खूब भुनाया। लेकिन छात्रों का हित जिस तरह यह विश्वविद्यालय हमेशा से दरकिनार करता है वही इतिहास एक बार फिर दोहराया गया और इस A++ ग्रेड के लाभ से छात्रों को वंचित कर दिया गया है। 

अब सवाल यह उठता है की इतना बड़ा ब्लंडर। इतना बड़ा गड़बड़झाला। किया किसने? इसके पीछे दोषी कौन है? तो अब यह मामला सामने आते ही यहां पर आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। यहां पर जब भी किसी कंपनी को। मार्गशीट प्रिंट करने का ठेका दिया जाता है तो वह हमेशा विसंगतियों से भरा रहता है। और यही देखते हुए एक बार फिर विश्वविद्यालय प्रबंधन के कुछ लोगों ने ग्रेड मार्कशीट पर अंकित न होने का दोष कंपनी के सर पर मढ़ दिया है। अब सवाल यह उठता है कि क्या विश्वविद्यालय ने लिखित में जो? जानकारी कम्पनी को दी थी, उसमें इस बात का जिक्र था कि ग्रेड भी अंकित करना है। यदि नहीं था तो जीवाजी विश्वविद्यालय प्रबंधन में इसका दोषी कौन है और उन पर क्या कार्यवाही होगी? और यदि ऐसे किसी लिखित पत्राचार में इस बात का जिक्र था। कि ग्रेड अंकित होना है तो उसके बावजूद भी कंपनी ने ग्रेड अंकित क्यों नहीं की और इसके लिए अब विश्वविद्यालय प्रबंधन इस कंपनी पर क्या कार्यवाही करेगा?

आप को बता दें कि हमारे केंद्र सरकार माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहुत ही महत्वाकांक्षा के साथ नई शिक्षा नीति लागू की थी और नई शिक्षा नीति के अनुसार भी विद्यार्थियों की मार्कशीट पर ग्रेड अंकित होना अनिवार्य है। क्योंकि जब एक छात्र आगे किसी उच्च शैक्षणिक संस्थान में प्रवेश लेता है या कहीं और आवेदन करता है तो मार्कशीट पर। ग्रेड उल्लिख। त होने का भी महत्व होता है और इसका लाभ छात्र को मिलता है। छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने के मामले में हमेशा से अखबारों में सुर्खियों में रहने बाला। जी भाजी विश्वविद्यालय एक बार फिर ग्रेड अंकित न किए जाने को लेकर सुर्ख़ियों में है। और इतने बड़े गड़बड़ झाला पर विश्वविद्यालय प्रबंधन ने लीपापोती शुरू कर दी है। और अंत में विद्यार्थियों को वही करना है जो हमेशा से करते आए हैं, और अपनी बदकिस्मती को दुहाई देना है, जो वह इस विश्वविद्यालय के छात्र हैं।

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