ग्वालियर मध्य प्रदेश: अति कुपोषण में एनआरसी भितरवार में भर्ती की गई प्रियंका आदिवासी को महिला बाल विकास द्वारा ग्वालियर रेफर कर कमला राजा अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती किया गया था। लेकिन लापरवाही पर लापरवाही करने वाले हमारे प्रशासन ने एक और लापरवाही की और इस अति कुपोषित बच्ची की मॉनिटरिंग में इतनी बड़ी चूक कर की कि अतिकुपोषित बच्ची की माँ अपनी बच्ची को लेकर मंगलवार सुबह आठ बजे से ही अस्पताल से गायब हो गई। और इस समय वह कहां है इस बात की जानकारी न तो कमला राजा अस्पताल के जिम्मेदारों को है और ना ही महिला बाल विकास के जिम्मेदारों को। और ना ही जिले की मुखिया कलेक्टर रुचिका चौहान को।
आपको बता दें कि भितरवार ब्लॉक के ग्राम हरसी में आशा कार्यकर्ता और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा 22 जुलाई को ट्रेस किया गया और 23 जुलाई को इस अति कुपोषित बच्ची प्रियंका आदिवासी को भितरवार एनआरसी में भर्ती कराया गया। लेकिन इस अति कुपोषित बच्ची की स्थिति बहुत ज्यादा खराब होने के चलते एसडीएम संजीव जैन के निर्देश पर इस बच्ची को ग्वालियर रेफर किया गया था जहां इसे 25 जुलाई को इलाज के लिए कमला राजा अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती किया गया। लेकिन भर्ती होने के बाद आज चौथे दिन ही सुबह आठ बजे अति कुपोषित बच्ची की माँ सोमवती और पिता रंजीत इस बच्ची को लेकर अस्पताल से गायब हो गए।
इस अति कुपोषित बच्ची के मामले में शुरू से ही जिम्मेदारों का रवैया लापरवाही पूर्ण रहा। पहले तो इस बच्ची को इस स्थिति में आने तक ना तो स्वास्थ्य विभाग और ना ही महिला बाल विकास विभाग ट्रेस कर पाया। यह साफ दर्शाता है कि सरकार के कुपोषण मुक्त मध्यप्रदेश के दावे किस तरह खोखले हैं। आपको बता दें कि इस बच्ची को ट्रेस होने के बाद भी महिला बाल विकास विभाग द्वारा आयुक्त महिला बाल विकास भोपाल को जो पत्र लिखा गया उसमें यही बताया गया कि महिला हरसी से विजयपुर पार्वती बड़ौदा गांव पलायन करती है इस कारण ट्रेस नहीं हो सकी। जबकि प्रियंका आदिवासी का जन्म हरसी में हुआ और उसकी मां सोमवती और पिता रंजीत हरसी के ही स्थाई निवासी है।
अति कुपोषित बच्ची प्रियंका आदिवासी के गायब होने के बारे में जब हमने जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास उपासना राय से बात की तो उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की निगरानी में बच्ची कमलाराजा अस्पताल में भरती थी लेकिन सुबह अपने माता पिता के साथ ही कहीं चली गई और शाम तक उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। उसके मायके पार्वती बड़ौदा गांव विजयपुर ब्लॉक श्योपुर और उसके ससुराल हरसी गांव भितरवार ब्लॉक ने भी अपने कर्मचारियों से जानकारी ली लेकिन वह वहां भी नहीं पहुंची है। विभाग द्वारा बरती गई लापरवाही पर पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह कैदी तो है नहीं और ऐसा नहीं हो सकता कि कोई चौबीस घंटे उस पर निगाह रखें। जिला कार्यक्रम अधिकारी ने विभाग की तरफ से किसी भी लापरवाही की बात से इनकार किया है।
ज़िला स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ सचिन श्रीवास्तव दो जिले में संचालित एनआरसी।केंद्रों के मुखिया भी हैं, उनका कहना है कि उन्हें शाम को पति। कुपोषित बच्ची प्रियंका के गायब होने की जानकारी मिली थी। लेकिन वह बच्ची जहां बढ़ती है वह अस्पताल मेडिकल कॉलेज का है उनके अधीन नहीं है। अति कुपोषित बच्ची की मॉनिटरिंग के बारे में भी वह साफ जवाब नहीं दे सके उन्होंने कहा कि मॉनिटरिंग महिला बाल विकास विभाग ने की होगी। वर्तमान में अति कुपोषित बची कहाँ होगी? उसके जाने का कारण क्या रहा होगा? इसके बारे में पूछे जाने पर उनके पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था।
अति कुपोषित बच्ची प्रियंका आदिवासी के मामले में जिला कलक्टर रुचिका चौहान की भी लापरवाही रही कि इतने गंभीर अति कुपोषण के मामले में उन्होंने कोई विशेष मॉनिटरिंग टीम गठित नहीं की। यदि एक विशेष रूप से तैयार किया गया दल सतत निगरानी के लिए रखा जाता और साथ ही अति कुपोषित बच्ची प्रियंका।की मां और पिता की काउंसलिंग की जाती तो शायद वह प्रशासन की कार्यशैली पर विश्वास कर पाते। लेकिन कलेक्टर रुचिका चौहान ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को मॉनिटरिंग के लिए किसी तरह का कोई निर्देश नहीं दिया। मंगलवार दोपहर जनसुनवाई के बाद दो बजे तक कलेक्टर के पास भी बच्ची से संबंधित कोई अपडेट नहीं था।
इस तरह की लापरवाही साफ बताती है कि सिस्टम भी चाहता है कि कुपोषण प्रदेश से लापता हो या न।हो लेकिन यदि अति कुपोषित बच्ची लापता होती है तो किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। और यही कारण रहा के बच्ची की निगरानी में लापरवाही बरती गई लापरवाही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ सचिन श्रीवास्तव की तरफ से भी रही जिन्होंने बच्ची की प्रॉपर। मॉनिटरिंग के लिए किसी स्टाफ को वहां पर अपॉइंट नहीं किया। लापरवाही महिला बाल विकास विभाग की तरफ से भी रही। जिसने बच्ची के ट्रेस न होने का कारण माँ का पलायन बताकर पहले अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा और उसके बाद कमला राजा अस्पताल में बच्ची को भर्ती कराकर इतिश्री कर ली। पहले एक अति कुपोषित बच्ची को ट्रेस न कर पाना और ट्रेस कर लेने के बाद उसकी प्रॉपर मॉनिटरिंग न कर पाना हमारे सिस्टम की बड़ी लापरवाही उजागर करता है।
