डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में हाल में ही एक संसद मार्ग की मस्जिद पर सपा की बैठक हुई थी। बैठक में अखिलेश यादव, सांसद डिंपल यादव और इकरा हसन समेत और भी नेता मौजूद थे। इसी बैठक को लेकर एक टीवी शो की डिबेट में मौलाना साजिद रशीदी ने विवादित बयान दे दिया। मौलाना साजिद रशीदी ने सांसद डिंपल यादव के पहनावे को लेकर अभद्र टिप्पणी की। मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि मस्जिद में बैठक में दो महिलाएं बैठी हुई हैं एक हैं इकरा हसन जो सर ढककर बैठी हैं। इसी के बाद मौलाना ने सांसद डिंपल यादव पर अभद्र टिप्पणी की। टिप्पणी की आती यह में यहां नहीं बोलूंगा।आपको गूगल सर्च करके देख लीजिए। लेकिन जिस महिला के बारे में थी मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि निसंदेह बहुत ज्यादा आपत्तिजनक और अपमानजनक है।
भारतीय राजनीति में वैसे ही महिला कप लेकिन जितनी भी महिलाएं हैं उनमें से यदि सबसे ज्यादा शिक्षित अनुशासित सभ्य और सुशील महिलाओं की बात करें।तो मुझे लगता है कि गिने चुने नाम डिंपल यादव की ऊंचाई छू पाएंगे। लोगों को गलत फैली है तो वह केवल एक प्रभावशील राजनीतिक परिवार की बहू और अखिलेश यादव पत्नी है। और पारिवारिक पृष्ठभूमि की वजह से ही राजनीति में इतने ऊंचे कद पर हैं। चलिए थोड़ा डिंपल यादव के बारे में जान लीजिए…

डिंपल यादव का गहरा रिश्ता उत्तराखंड की मिट्टी से भी है। बहुत कम लोग जानते हैं कि डिंपल एक फौजी परिवार से ताल्लुक रखती हैं और मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के एक गांव से आती हैं। उनका जन्म 1978 में पुणे (महाराष्ट्र) में हुआ था. उनके पिता सेवानिवृत्त कर्नल आर.एस. रावत भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके हैं, जबकि उनकी मां का नाम चंपा रावत है। डिंपल यादव की शुरुआती पढ़ाई लखनऊ में हुई. उन्होंने आर्मी स्कूल, लखनऊ से 1993 में हाई स्कूल और 1995 में इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने लखनऊ यूनिवर्सिटी से 1998 में बी.कॉम की डिग्री प्राप्त की। उनका शैक्षणिक सफर भले ही सादा रहा हो, लेकिन डिंपल ने हमेशा पढ़ाई को प्राथमिकता दी और अपने लक्ष्य के प्रति सजग रहीं।
डिंपल यादव राजनीति में एंट्री 2009 के फिरोजाबाद उपचुनाव से हुई। उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन कांग्रेस के राज बब्बर से हार गईं। हार के बावजूद उन्होंने राजनीति से दूरी नहीं बनाई। 2012 में अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने कन्नौज लोकसभा सीट से इस्तीफा दिया, जिसके उपचुनाव में डिंपल यादव को टिकट मिला और उन्होंने निर्विरोध जीत हासिल की। यह जीत डिंपल के राजनीतिक करियर का अहम मोड़ साबित हुई।
