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गंदगी को पुरस्कृत करने वाला अनोखा देश, दांत फाड़ते, ताली पीटते जिम्मेदारों की अनोखी दास्तां

जिस जिस शहर को स्वच्छता सर्वेक्षण में स्थान मिला है आप वहां के नागरिकों से पूछ लीजिए कि क्या उन्हें मूलभूत सुविधाएँ मिल रही हैं। क्या वास्तव में उन्हें शहर में स्वच्छता दिखाई देती है। आप तो केवल इनमें से किसी भी शहर के नागरिकों की सोशल मीडिया पर पोस्ट देख लीजिए...

ढोल पीटो, नगाड़े बजाओ व मिठाइयां बांटो और भी ज्यादा महिमा मंडित करना है तो अखबारों में पेज भर के विज्ञापन और समाचार चैनलों पर स्पेशल डॉक्यूमेंट्री चलवा दो। अब आप सोचेंगे कि ऐसी उपलब्धि क्या है जिसके लिए इतना सब स्वांग रचना है। उपलब्धि नहीं महा उपलब्धि है उपलब्धि तब होती है जब कुछ करने के बाद आप कुछ हासिल करें। लेकिन जब बिना कुछ किए ही बहुत कुछ हासिल हो रहा हो। तो इसे महाउपलब्धि बोलेंगे यह महाउपलब्धि है स्वच्छता सर्वेक्षण 2024 मे हर शहर को कुछ न कुछ मिल जाना। इसे ही कहते हैप्पी मोमेंट। यह ऑल हैप्पी मूवमेंट ही रहा क्योंकि यहां हर व्यक्ति दांत फाड़ता ताली पीटता वाह वाही करता नजर आया। मध्य प्रदेश के पूर्व आईएएस अखलेंद्रू अरजरिया ने आज अपने फेसबुक वॉल पर एक गंभीर चिंतन पोस्ट किया है, पहले आप उसे पढ़ें…

1969  से  1974 तक  भारतीय  सेना  में  शॉर्ट सर्विस  कमिशन  अफसर  के रूप  में  अपनी  सेवाएं  देने  के  बाद  जब  मध्य प्रदेश  लोक  सेवा  आयोग  की  परीक्षा  के  माध्यम  से  मैं डिप्टी कलेक्टर  बना  तो  1976 में  सतना  में  मेरी पहली  पोस्टिंग  हुई  ! कुछ  दिनों  बाद  वहीं कलेक्ट्रेट  में  भू अभिलेख  शाखा  का  प्रभारी  अधिकारी  बना  ! तब  हर  जिले  में  एक  सर्वश्रेष्ठ  कार्य  करने  वाले   पटवारी  को  पुरस्कृत  किया  जाता  था  ! मैं  चयन  समिति  का  अध्यक्ष  था  ! अनेक  पटवारियों  के  रिकार्ड  का  परीक्षण  करने  के  बाद  मैंने  कहा  कि  एक  भी  पटवारी  पुरस्कृत  करने  योग्य  नहीं  है  ! यदि  किसी  अयोग्य  को  पुरस्कृत  किया  जाएगा  तो  इससे  गलत  मैसेज जाएगा  ! मेरा  मत  है  कि  यदि  कोई  भी  योग्य  नहीं  हो  तो  अयोग्य  को  पुरस्कृत  नहीं  करना  चाहिए  ! आज  दिल्ली  में  महामहिम  राष्ट्रपति  महोदया  द्वारा  स्वच्छता  के  लिए  कई  श्रेणियों  में  कथित  स्वच्छ  शहरों  को  पुरस्कृत  किया  जा  रहा  है! हर  वर्ष  किया  जाता  है  ! क्या  कोई  भी  सम्पूर्ण  शहर  स्वच्छ  है  जो  उसे  पुरस्कृत  किया  जाए   ?  जिस  दिन  स्वच्छता  के  लिए  पुरस्कृत  करने  के  बजाय  गंदगी  के  लिए  दण्डित  किया  जाने  लगेगा  , स्वच्छता  अपने  आप  आयेगी! जयहिंद!

अखिलेन्दू अरजरिया साहब का यह लेख पर्याप्त है हर विवेकशील व्यक्ति को यह समझने के लिए कि स्वच्छता सर्वेक्षण की सूची जारी करने के नाम पर पूरे देश में क्या खेल चल रहा है। यदि हम मध्यप्रदेश की बात करें तो एक या दो नहीं पूरे के पूरे 8 शहरों को कोई न कोई स्वच्छता सामान देकर ऑल हैप्पी मोमेंट रचा गया। जिन शहरों में सड़कें टूटी पड़ी हैं, नाले उफान रहे हैं, हर गली मोहल्ले में गंदगी के ढेर लगे हैं, सीवर मिला हुआ गंदा पानी लोग पी रहे हैं, ड्रेनेज सिस्टम चौपट है, वहाँ स्वच्छता सर्वेक्षण के नाम पर गजब की अंधेर नगरी चल रही है इसके बावजूद ऐसे शेहरों को किसी न किसी श्रेणी में किसी-न-कसी पायदेन पर बिठाकर योगिता को भी पुरस्कृत करने का गजब खेल चल रहा है। मामला बहुत गंभीर है और जिस तरह से अखिलेन्दू अर्जरिया ने कहा है कि उनके कार्यकाल में उन्होंने किसी भी पटवारी को पुरस्कृत करने से इसलिए मना कर दिया था। क्योंकि कोई भी पुरस्कार के योग्य नहीं था तो क्या यही परिपाटी यहां नहीं अपनाई जानी चाहिए। जो शहर वास्तव में बेहतर कर रहे हो उनको पुरस्कृत करते।अब बाकी को छोड़ देते। 

जिस जिस शहर को स्वच्छता सर्वेक्षण में स्थान मिला है आप वहां के नागरिकों से पूछ लीजिए कि क्या उन्हें मूलभूत सुविधाएँ मिल रही हैं। क्या वास्तव में उन्हें शहर में स्वच्छता दिखाई देती है। आप तो केवल इनमें से किसी भी शहर के नागरिकों की सोशल मीडिया पर पोस्ट देख लीजिए उनके द्वारा पोस्ट किए गए फोटो। देख लीजिए वह इन पुरस्कारों से इतर इन शहरों की कुछ और ही कहानी कह रहे हैं। गंदगी से भरे अपनी जनता को मूलभूत नागरिक सुविधाओं न दे पाने वाले इन शहरों को पुरस्कृत करके भारत ने एक अनोखा कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। एक ऐसा देश बन गया है जो गंदगी को भी पुरस्कृत कर रहा है। गंदगी को पुरस्कृत करने का पैमाना यह है कि बाकी के शेर और ज्यादा गंदे हैं और तुम उन गंदगी से कम गंदे हो इसलिए तुम पुरस्कार के काबिल हो। 

प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ॰ मोहन यादव ने 8 शहरों को सम्मान मिलने के बाद यह संदेश दिया है की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा इंदौर को सुपर स्वच्छ लीग सिटी श्रेणी में देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में सम्मानित किया जाना प्रदेशवासियों के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। इंदौर के साथ 7 अन्य शहरों को भी विभिन्न श्रेणियों में स्वच्छता पुरस्कार प्राप्त होना इस बात का प्रमाण है कि पूरा मध्यप्रदेश अब स्वच्छता में देश का अग्रदूत बन चुका है। सुना अपने मध्य प्रदेश स्वच्छता में देश का अग्रदूत बन गया है। अब यदि अग्रदूत ऐसा है तो बाकी के पूत ( राज्य) कैसे होंगे? तमाम लोग यह भी कह सकते हैं के हर शहर स्वच्छता के लिए प्रयास कर रहा है काम कर रहा है सकारात्मक सोच रखो। पुरस्कृत मिलने से लोगों में उत्साह जागता है। हर शहर के व्यवस्था सुधारने वालों को बल। मिलता है, आगे वो और बेहतर काम करते हैं। हाँ भाई हाँ , आप बिलकुल ठीक हैं लेकिन केवल लेवल स्कूल जाने पर या परीक्षा में केवल बैठने पर खाली को पी छोड़ देने पर भी क्या किसी छात्र को पास किया जाता है। उसका कार्य देखा जाता है और यही हालात हैं इन शहरों के जहां स्वच्छता के नाम पर पैसा बर्बाद किया जा रहा है। जिम्मेदार अधिकारी निठल्ले हो चुके हैं। इस तरह उनकी अयोग्यता पर दिए गए पुरस्कार उनको और अधिक निठल्ला बना देगी। और यह जिम्मेदार आपको हमेशा की तरह दांत फाडते और ताली पीटते नजर आएंगे और अंत में आप केवल अपना माथा पीटते रह जाएंगे।

यह लेख से वेबसाइट इस संपादक गजेन्द्र इंगले द्वारा लिखा गया है।  

Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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