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औरंगजेब मराठों से हारा और महाराष्ट्र की धरती में ही दफन हुआ, जानिए गृह मंत्री अमित शाह ने ऐसा क्यों कहा

अमित शाह ने कहा कि भारत 2047 में अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी की ओर बढ़ रहा है और महाशक्ति बनना चाहता है। ऐसे में शिवाजी महाराज एक प्रेरणा के रूप में खड़े हैं। उनकी राजमुद्रा (शाही चिन्ह) का प्रयोग भारतीय नौसेना के ध्वज के रूप में किया जाता है।

डिजिटल डेस्क रायगढ़ महाराष्ट्र: आज  छत्रपति शिवाजी महाराज की 345वीं पुण्यतिथि है। इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह महाराष्ट्र के रायगढ़ किले में पहुंचे। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की। केंद्रीय गृह मंत्री ने शिवाजी महाराज की वीरता को नमन किया। उन्होंने कहा कि खुद को आलमगीर कहने वाला औरंगजेब जीवन भर महाराष्ट्र में मराठों के खिलाफ लड़ाई लड़ता रहा। वह मराठों से हारा और इसी धरती में दफन किया।

गृह मंत्री ने रायगढ़ किले को एक पर्यटन स्थल के बजाय भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया। उन्होंने स्वधर्म की रक्षा और स्वराज्य की स्थापना के बीज बोने का श्रेय शिवाजी महाराज की मां जीजाबाई को दिया। अमित शाह ने कहा कि भारत 2047 में अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी की ओर बढ़ रहा है और महाशक्ति बनना चाहता है। ऐसे में शिवाजी महाराज एक प्रेरणा के रूप में खड़े हैं। उनकी राजमुद्रा (शाही चिन्ह) का प्रयोग भारतीय नौसेना के ध्वज के रूप में किया जाता है। जो राष्ट्र पर उनके स्थायी प्रभाव का प्रतीक है। शाह ने स्वधर्म के लिए लड़ाई जारी रखने तथा सुशासन और न्याय पर शिवाजी महाराज की शिक्षाओं को कायम रखने के महत्व पर बल दिया।

शिवाजी महाराज के जीवन पर प्रकाश डालते हुए अमित शाह ने कहा कि शिवाजी महाराज महाराष्ट्र तक सीमित नहीं हैं। उनकी एकता की विरासत देश के लिए प्रेरणा है। शिवाजी महाराज के स्वधर्म और स्वराज्य के आदर्श स्वतंत्रता के 100वें वर्ष तक महाशक्ति बनने की भारत की महत्वाकांक्षा को प्रेरित करते रहेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मैं महाराष्ट्र के लोगों से अपील करता हूं कि वे छत्रपति शिवाजी महाराज को राज्य तक सीमित न रखें। उनकी जबरदस्त इच्छाशक्ति, दृढ़ संकल्प और साहस देश को प्रेरित करते हैं क्योंकि उन्होंने रणनीतिक रूप से समाज के सभी वर्गों को एकजुट किया। शिवाजी महाराज ने मुगलशाही को हराया था।

अमित शाह ने आगे कहा कि न तो भाग्य छत्रपति शिवाजी महाराज के साथ था, न ही अतीत उनके साथ था, न ही उनके पास पैसा था और न ही सेना थी। एक बच्चे ने अपने अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प से पूरे देश को स्वराज का मंत्र दिया। कुछ ही समय में उन्होंने 200 साल पुरानी मुगल हुकूमत को चकनाचूर कर दिया और देश को आजाद कराया।
उन्होंने कहा कि आज आजादी के 75 साल बाद हम दुनिया के सामने सिर ऊंचा करके खड़े हैं। हम संकल्प लेते हैं कि जब आजादी के 100 साल पूरे होंगे तो हमारा भारत दुनिया में नंबर वन होगा। यह शिवाजी महाराज का भी सपना था। महान मराठा योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज के आदर्श भारत को अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी मनाने और महाशक्ति बनने की यात्रा के लिए प्रेरित करते हैं। नरेंद्र मोदी सरकार शिवाजी महाराज के आदर्शों पर काम करती है।

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