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हवन के धुंए से भिन भिनाई मधुमक्खियां, हमले में एक की मौत 8 घायल

छतरपुर मध्य प्रदेश: अब तक के तमाम ऐसे मामले आ चुके हैं जब धुएं या किसी की छेड़छाड़ के चलते मधुमक्खियां तमा उठती हैं और उनके हमले से कई लोगों को परेशानी होती है और कुछ घायल भी हो जाते हैं लेकिन छतरपुर के लव, कुश नगर थाना क्षेत्र के गाँव श्याम का खेड़ा से। एक ऐसा मामला निकलकर आ रहा है जहां मधुमक्खियों के हमले से। कई लोग घायल हो गए और एक की मौत भी हो गई, ऐसा बताया जा रहा है कि एक धार्मिक अनुष्ठान के दौरान यज्ञ हवन से धुआँ उठा और यह धुआँ जब मधुमक्खियों के छत्ते तक पहुँचा तो मधुमक्खियां भिनभिनाने लगीं वहाँ पर उपस्थित तमाम।लोगों पर हमला कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार श्यामा ककेड़ा में बुधवार को मौन साधना केंद्र के प्रमुख सुनीत वियोगी। के निर्देश पर देवी स्थान पर एक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा था। , इसमें अनुष्ठान और हवनयज्ञ से धुआँ उठ रहा था, इस धुएँ से पास के पेड़ पर। जो मधुमक्खियों का छत्ता लगा हुआ था वहां की। मधुमक्खियां असहज हो उठीं। और इन मधुमक्खियों ने धुएं से परेशान हो कर। वहां उपस्थित ग्रामीणों पर हमला बोल दिया। यहां सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि सुनीत वियोगी इस घटना को देखते हुए भी वहां से नहीं भागे, बल्कि अन्य ग्रामीणों के बचाव कार्य में लगे रहे। और इसके चलते ही हजारों मक्खियों ने उनपर हमला कर दिया और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। मधुमक्खियों के हमले से मौके पे मौत का संभवतः यह पहला मामला क्षेत्र में नजर आया है। 

मधुमक्खियों का हमला इतना भयावह था कि पूरे क्षेत्र में काफी लंबे समय तक अफरा तफरी मची रही और मधुमक्खियों के। हमले के जद। में कई अन्य ग्रामीण भी आ गए। इनमें से 8 ग्रामीण गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। हालांकि जब मधुमक्खियों का हमला कमजोर हुआ तो अन्य ग्रामीण सुनीत। योगी और? अन्य घायलों को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर ले गए जहां पर सुनीत वियोगी को मृत घोषित कर दिया गया और अन्य घायलों को उपचार प्रदान किया गया। 

आपको बता दें कि जब भी धार्मिक कार्यक्रम होते हैं तो यज्ञ हवन होता ही है और उसका धुआं निकलता ही है। इसलिए जब भी हम इस तरह के कार्यक्रम करें और आस-पास यदि। कोई मधुमक्खी का छत्ता हो तो हमें सुरक्षा के पुख्ता इंतजामात कर लेनी चाहिए या फिर ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए। जिससे कि मधुमक्खियां असहज हों। क्योंकि मधुमक्खियां किसी भी तरह से। अपने आपको खतरे में देखने पर ही हमला करती हैं और यहां पर भी जब धुआं उनके छत्ते तक पहुंचा तो उन्होंने खुद की सुरक्षा में खतरा महसूस किया और ग्रामीणों पर हमला कर दिया 

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