Friday, April 17, 2026
34.1 C
Delhi
Friday, April 17, 2026
HomeEducationसंगीत एवं कला विश्वविद्यालय का 18 वां स्थापना दिवस समारोह मंगलवार को...

संगीत एवं कला विश्वविद्यालय का 18 वां स्थापना दिवस समारोह मंगलवार को आयोजित हुआ

नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि यह संयोग की बात है कि राजा मानसिंह तोमर का जन्मदिन और संगीत विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस एक ही दिन है। शास्त्रीय संगीत का तीर्थ स्थल है ग्वालियर यह अब विश्व स्तर पर लोग मान चुके हैं

ग्वालियर मध्य प्रदेश: मंगलवार का दिन आईआईटीटीएम का सभागार संगीत की लहरियों से गुंजायमान दिखा, जिसमें युवा कलाकारों द्वारा कथक नृत्य से कृष्ण की छवियों और लीलाओं का वर्णन मंच से दिखाई दिया साथ ही कला की अन्य विधाओं का भी अद्भुत प्रदर्शन मंच से दिखाई दिया। अवसर था राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के 18वें स्थापना दिवस का। गायन, वादन, नृत्य से लेकर चित्रकला का प्रदर्शन विश्वविद्यालय के छात्र छात्राओं द्वारा किया गया। इसमें कष्णायन- नृत्य रूपक की प्रस्तुति सबसे खास रही, जिसे इंदौर से आई वरिष्ठ कथक गुरू डॉ. सुचित्रा हरमलकर के निर्देशन में 15 कलाकारों द्वारा प्रदर्शित किया गया। लगभग 50 मिनट की इस प्रस्तुति में कृष्ण की लीलाओं को कथक के माध्यम से दिखाया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ गणेश वंदना से हुआ। इसमें पश्चात सादरा ताल झपताल में हुई प्रस्तुति में श्री कृष्ण के जीवन के हर पहलू की दिखाया गया। फिर कृष्ण लीला द्वारा कृष्ण की गई लीलाओं और उनके उद्देश्यों को बताने की कोशिश की गई।

चतुरंग के माध्यम से कृष्ण और गोपियों का अद्भुत होली रास दिखाया गया। इन प्रस्तुतियों ने सभागार में बैठे हर कला रसिक का मन मोह लिया।
कार्यक्रम में कुलगुरू प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे ने विश्वविद्यालय का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि म.प्र. विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर, विशिष्ट अतिथि अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्रीधर पराड़कर रहे। यशवंत इंदपुरकर विशेष रूप से मौजूद रहे।

विवि की ओर से कुलसचिव अरूण सिंह चौहान, वित्त नियंत्रक डॉ. आशुतोष खरे, कार्य परिषद सदस्य चंद्रप्रताप सिकरवार सहित डॉ. अंजना झा, डॉ. मनीष करवड़े, डॉ. संजय सिंह, डॉ. श्याम रस्तोगी, पीआरओ कुलदीप पाठक आदि मौजूद रहे। संचालन सांस्कृतिक समिति अध्यक्ष डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने किया।

संगीत का तीर्थ स्थल है ग्वालियर
विधानसभा अध्यक्ष माननीय श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि यह संयोग की बात है कि राजा मानसिंह तोमर का जन्मदिन और संगीत विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस एक ही दिन है। शास्त्रीय संगीत का तीर्थ स्थल है ग्वालियर यह अब विश्व स्तर पर लोग मान चुके हैं। इसे विश्व स्तर की पहचान दिलाने में हमारे पूर्वजों ने कई मानक तय किए हैं। इस शहर कि प्राचीन विरासत का संरक्षण करना हम सबका दायित्व है।

ग्वालियर की पहचान है संगीत
विशिष्ट अतिथि श्रीधर पराडकर ने कहा कि ग्वालियर की पहचान संगीत से है यह अब विश्व स्तर पर प्रमाणित हो चुका है। कई महान संगीत साधकों की तपोभूमि यह शहर रहा है।

कीर्तिमान किए है स्थापित
कुलगुरू प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि अपनी स्थापना से लेकर अभी तक इस विश्वविद्यालय ने कई उतार चढ़ाव देखे हैं और कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। यहां के छात्रों ने इस शहर और देश का नाम दुनियाभर तक संगीत के माध्यम से पहुंचाया है।

तीन ताल में तबला वादन
इस दौरान विवि के छात्र छात्राओं ने भी मन को मोहने वाली प्रस्तुतियां दीं। डॉ. मनीष करवड़े के निर्देशन में तैयार कर सुयश दुबे ने एकल तबला वादन प्रस्तुत करते हुए तीन ताल में कायदा, टुकड़े, चक्रदार फरमाइशी आदि पेश किया। उनके साथ अब्दुल हमीद ने लहरा संगति दी।

Play

कथक में चतुरंग
कथक विभाग की विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत चतुरंग भारतीय शास्त्रीय संगीत के चार प्रमुख अंगों — साहित्य, सरगम, तराना और तिरवत — का सुंदर समन्वय था। इसे राग भीमपलासी और ताल चौताल (१२ मात्राएँ) में संयोजित किया गया। संगीत संयोजन कत्थक आचार्य गुरु पं. राजेन्द्र कुमार गंगानी जी का रहा तथा नृत्य-निर्देशन डॉ. अंजना झा, विभागाध्यक्ष, कत्थक नृत्य विभाग द्वारा किया गया।
स्वर वाद्य में ग्रामोत्सव
इसी कम में स्वर वाद्य के छात्रों द्वारा डॉ. श्याम रस्तोगी के निर्देशन में तैयार ग्रामोत्सव को राग मिश्र खमाज मे केहरवा और तीनताल की लयात्मकता के साथ सितार, मोहन वीणा, गिटार, बांसुरी, हारमोनियम, सिंथेसाइजर जैसे स्वर वाद्य और तबला, ढोलक जैसे अवनद्ध वाद्यों की अद्भुत प्रस्तुति भी देखने को मिली।
मुरुगन को समर्पित भरतनाट्यम
राग सिंधु, ताल आदि पर भरतनाट्यम की प्रस्तुति हुई। डॉ. गौरीप्रिया के निर्देशन में तैयार यह नृत्य भगवान मुरूगन को समर्पित रहा। नाट्य एवं रंगमंच के छात्र ऐश्वर्य दुबे द्वारा मिमिक्री भी की गई।

ये भी रहा खास-

  • अतिथियों द्वारा विवि के चित्रकला विभाग के छात्र छात्राओं द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।
  • कार्यक्रम की शुरुआत कुलगुरु द्वारा संकल्पनाकृत संगीत संकाय के छात्र छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुई। उसके बाद विवि का कुलगीत हुआ।
  • आभार प्रदर्शन कुलसचिव अरुण चौहान द्वारा किया गया।
Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular