ग्वालियर, मध्यप्रदेश: पाँच जुलाई 2025 मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ग्वालियर पहुंचकर जहाँ तमाम विकास कार्यों का लोकार्पण करने वाले हैं इन तमाम कार्यों में से एक है इंटर। स्टेट बस टर्मिनल जो स्मार्ट सिटी द्वारा पैंसठ करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। इस बस टर्मिनल का लोकार्पण तो होगा लेकिन इस बस टर्मिनल पर न। तो बसें होंगी और ना ही यहां से शहर के लिए या अन्य शहरों के लिए बसें चलेंगी। जिससे शहर के और आसपास के शहरों के नागरिकों को परिवहन की सुविधा प्राप्त हो सके। मतलब साफ है कि यह बस टर्मिनल आने वाले लंबे समय तक केवल उन हाथी दांतों। के समान होगा। जो दिखने में तो खूबसूरत दिखेंगे और निसंदेह बेशकीमती भी है लेकिन जनता के हित में इस जगह का कोई उपयोग नहीं हो पाएगा।
आपको बता दें कि बस स्टॉप बनाने के मामले में ग्वालियर नगर निगम पूरे देश में कुख्यात रहा है क्योंकि यहां पर शहर में भी बसें नहीं चलती हैं। लेकिन आपको हर चौराहे पर एक नहीं बल्कि। 2, 4 बस स्टॉप जरूर नजर आ। जाएंगे जिस तरह से लाखों खर्च करके शहर में शहरी बस सेवा के लिए यह बस स्टॉप बनाए गए थे और उनका कोई भी उपयोग नहीं हुआ वह केवल। विज्ञापन के माध्यम से ठेके पर दिए गई एजेंसी के कमाई का अड्डा बन कर रह गए शायद उसी तरह का हश्र आईएसबीटी। का भी होगा क्योंकि आईएसबीटी का लोकार्पण तो हो रहा है लेकिन यह जनता के लिए नहीं खुलेगा और जनता यहां आकर करेगी भी क्या? क्योंकि बस कब से चलनी है इसकी कोई भी तैयारी न शासन के पास है न प्रशासन के पास!
आई एस बी टी जब से बन राह है। तब से किसी न किसी खामी के चलते चर्चाओं में रहा है। सबसे बडी खामी तो यही निकलकर आई है कि इसके निर्माण की विधिवत परमिशन भी उन। शासकीय विभागों से नहीं ली गई जिन। शासकीय विभागों से निजी निर्माण कर्ताओं को तमाम तरह की परमिशन। लेनी होती हैं मतलब एक तरह से। आईएसबीटी बिना किसी परमिशन के अवैध रूप से बना हुआ है। दूसरा आईएसबीटी के मुख्य भवन के निर्माण में तमाम तरह की टूट फूड। बीच में ही कई बार हो चुकी है जिसे रिपेयर किया गया है। पिछली बारिश के समय तो मुख्य भवन में बीच छत से ही पानी के झरने वह रहे थे। जिसको बाद में सुधारा गया है। आईएसबीटी बस स्टॉप को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए एप्रोच।रोड तक नहीं बनाई गई है। अभी तक बसों के संचालन की भी कोई रूपरेखा नहीं बनाई गई है।

आइएसबीटी के लोकार्पण के बाद भी क्या शहर की जनता को शहरी परिवहन के लिए बस यह मिल पाएंगे। यह एक यक्ष प्रश्न है। आपको बता दें कि शहरी बस सेवा के मामले में मध्यप्रदेश के सभी बडे शहरों इंदौर भोपाल और जबलपुर से ग्वालियर पिछड़ा हुआ है क्योंकि ग्वालियर ही एकमात्र ऐसा शहर है जिसमें शहरी बस सेवा जनता को नहीं मिलती है। और आइएसबीटी के निर्माण के बाद भी यह सुविधा अभिजनता। को न तो मिली है और ना?ही आगे भी मिलने की कोई संभावना है, क्योंकि कुछ समय पूर्व शहर के जिम्मेदार अधिकारी कलेक्टर एसपी ने अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर बस में बैठकर शहरी क्षेत्रों का भ्रमण किया था उस समय शहर में सकरी सड़कों के चलते कई जगह बस नहीं निकल पाई थी, इस समस्या का निदान करने में प्रशासन पूरी तरह फैल रहा है।
यह सभी अधूरी तैयारियां साह बताती हैं। के शासन और प्रशासन के पास बसें नहीं हैं। निजी बस संचालकों से भी यहां से बस के संचालन के लिए कोई रूपरेखा तैयार नहीं की गई है। मतलब कि 65 करोड के हाथीदाँत खूबसूरत रूप से बस टर्मिनल के रूप में तैयार हैं लेकिन लेकि? जनता को यहां से बस सेवाएँ देने में प्रशासन अभी भी फेल है। आने वाले कुछ महीनों में भी फैल ही रहने वाला है।
