ग्वालियर मध्य प्रदेश: गरीब व वंचित वर्ग के बच्चों के लिए अच्छे निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश दी। जाने वाली सरकार की महत्वाकांक्षी राइट टू एजुकेशन योजना अब स्कूल संचालकों के लिए सरदर्द बनती जा रही है। इस योजना के अंतर्गत निजी स्कूलों में 25% सीट ऐसे गरीब और वंचित वर्ग के छात्रों के लिए आरक्षित की गई है और इनकी फीस की राशि सरकार स्कूलों को देती है। लेकिन पिछले दो साल से ग्वालियर के निजी स्कूल एक अलग ही परेशानी से जूझ रहे हैं। गरीब वंचित वर्ग के छात्रों को उन्होंने प्रवेश तो। दिया है लेकिन उसके बदले में दी जाने वाली प्रतिपूर्ति फीस शासन द्वारा स्कूलों को नहीं दी गई है।
शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार शिक्षा के अधिकार की फीस की प्रतिपूर्ति के लिए 2023 – 24 में 796 प्रपोजल बनाए गए और उनके भुगतान के लिए जिला शिक्षा केंद्र भोपाल भेज दिए गए इन प्रपोजल की राशि ₹11 करोड़ है। लेकिन राज्य शिक्षा केंद्र से यह राशि अभी तक इन निजी स्कूलों के खातों में नहीं पहुंच पाई है। सत्र 2024-25 के लिए शिक्षा के अधिकार की फीस की प्रतिपूर्ति के लिए तो अभी प्रपोजल तक तैयार नहीं किए गए हैं। इस साल के लिए अभी तक 10 करोड़ की राशि स्कूलों को दिए जाने की संभावना है। प्रस्तावों का सत्यापन और पूरी तैयारी के बाद ही वास्तविक रकम पता चलेगी। लेकिन किसी भी हालत में यह दस करोड़ से कम नहीं होगी। सत्र 2025 26 भी शुरू हो चुका है। और इसके भी प्रपोजल तैयार किए जाने हैं।

यदि हम पिछले दो सत्र 2023-24 और 2024 -25 की ही बात करें तो निजी स्कूलों का 20 करोड़ से अधिक रुपया फंसा हुआ है। शिक्षा के अधिकार के तहत निजी स्कूलों में छात्र तो पढ़ रहे हैं लेकिन सरकार द्वारा उनको इसके एवज में दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि इन स्कूलों को नहीं मिल पाई है। दो साल से फीस प्रतिपूर्ति निजी स्कूलों को न मिल पाना मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही को उजागर करता है। मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग तमाम अनियमितताओं के चलते हमेशा सुर्खियों में रहता है। स्कूलों की मान्यता रिन्यूअल के नाम पर कई अनियमितताएं उजागर होती हैं। उस समय तो अंतिम तिथि निकल जाने के बाद भी शिक्षा विभाग लेट फीस। लेकर या जैसे तैसे अपने काम करा। लेता है लेकिन अब जब बात निजी स्कूल संचालकों को शिक्षा के अधिकार की फीस प्रतिपूर्ति देने की है तो विभाग के पास कोई तैयारी ही नहीं है।
