लखनऊ उत्तर प्रदेश डिजिटल डेस्क: अवैध धर्मांतरण गिरोह का एक गिरोह ने ऐसे खुलासे किए हैं जिन्हें सुनकर पुलिस भी हैरान है। यह गिरोह न केवल धर्मांतरण कराता था बल्कि अंगों।की तस्करी में भी लिप्त था। मास्टरमाइंड सहित अन्य आरोपियों के तार मानव तस्करी और अंग बेचने वाले रैकेट से जुड़े होने की पुख्ता जानकारी पुलिस को मिली है। इस पर टीम ने गहनता से पड़ताल शुरू कर दी है। आशंका है कि खरीद-फरोख्त का यह खेल विदेशों तक फैला था। कमजोर और मजदूर वर्ग के लोगों को जाल में फंसाया जाता था। खासताैर पर लड़कियों को धर्म परिवर्तन के बाद विदेश जाने के लिए तैयार करते थे। हां बोलने पर तस्करी का खेल होता था। जानकारी यह भी है कि मानव अंगों को भी बेचा जाता था। हालांकि पुलिस के पास कोई पीड़ित नहीं आया है। इसके बारे में पुलिस जानकारी जुटा रही है। गिरोह के सदस्यों से मिली जानकारी के आधार पर इस रैकेट में शामिल लोगों की भी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
मार्च में सदर क्षेत्र से लापता हुईं कारोबारी की दो बेटियां 18 जुलाई को कोलकाता के तपसिया इलाके में पुलिस को मिली थीं। 19 जुलाई को 6 राज्यों से 10 आरोपी भी पकड़े गए थे। बाद में दिल्ली का मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान पकड़ा गया। उसके दो बेटे और एक अन्य बाद में पकड़े गए। अब्दुल रहमान सहित 11 आरोपियों से रिमांड पर पूछताछ हुई।

पुलिस ने मीडिया को बताया कि पहले यह गिरोह धर्मांतरण कराने तक ही सीमित होने का लग रहा था। मगर, जैसे-जैसे पूछताछ आगे बढ़ती गई, वैसे-वैसे नई जानकारी सामने आने लगी। मास्टरमाइंड सहित अन्य से पूछताछ में गिरोह के तार मानव तस्करी करने वाले और मानव अंगों को बेचने वाले रैकेट से भी होने की बात सामने आई है। पूरे सिंडीकेट के पीछे मध्य प्रदेश का सैयद दाऊद भी है। वह कनाडा से गिरोह की कमान संभाल रहा था। उसके गैर जमानती वारंट जारी कराए गए थे। अब उसकी गिरफ्तारी के लिए सीबीआई की मदद ली जाएगी। इसके लिए पत्र लिखा जा रहा है। सीबीआई की मदद से ही देश से बाहर माैजूद अपराधियों की गिरफ्तारी की जाती है।
अब्दुल रहमान सहित गिरोह ने 100-200 युवक-युवतियां नहीं, बल्कि 1000 से अधिक का धर्म परिवर्तन कराया है। जिन लोगों ने अपनी स्वेच्छा से धर्म बदला वो सामने नहीं आ रहे हैं। जिन लोगों के माता-पिता और खुद पीड़ित हैं, वो सामने आ रहे हैं। उनको पुलिस गवाह बनाएगी जिससे आरोपियों को सजा दिलाई जा सके। अब्दुल रहमान की काॅल डिटेल में 6 पाकिस्तानी नंबर मिले थे। यह किसके हैं, इसके लिए खुफिया एजेंसियों की मदद ली जा रही थी। जिन लोगों से बात होती थी, वह गिरोह को किस तरह से मदद पहुंचा रहा था, यह सब पता किया जा रहा है।
