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जनता बोली तुम दल बदलू हो तो भड़क गए मुरैना महापौर और पूर्व सांसद

मंच से विशेष लोगों के उद्बोधन चल रहे थे उसी समय एक युवक ने महापौर का नाम लिए बिना दल बदलू कह दिया। क्योंकि मंच पर उपस्थित महापौर शारदा सोलंकी ने कांग्रेस में रहते हुए महापौर चुनाव जीता था।

मुरैना मध्य प्रदेश: भारत की राजनीति में दल बदल लगातार बढ़ता जा रहा है और ज्यादातर मामलों में देखा है के दल बदलने के बाद जनता खामोश ही रहती है। लेकिन मुरैना में कुछ ऐसा देखने को मिला जहां भरे मंच पर बैठे अपने पूर्व सांसद और अपनी वर्तमान महापौर को जनता ने दल बदलू कहते हुए तमाम आरोप लगाए। इस घटना के बाद पूरे मंच का। माहौल गर्मा गया और दल बदलू कहने वाले लोगों को पूर्व सांसद और महिला महापौर दोनों ने जमकर सुनाई।

रविवार को मुरैना के मेला मैदान में जातक समाज की महापंचायत चल रही थी। इस कार्यक्रम में मुरैना महापौर शारदा सोलंकी और पांच बार सांसद रहे पूर्व महापौर अशोक अर्गल भी मंच पर उपस्थित थे। जिस समय मंच से विशेष लोगों के उद्बोधन चल रहे थे उसी समय एक युवक ने महापौर का नाम लिए बिना दल बदलू कह दिया। क्योंकि मंच पर उपस्थित महापौर शारदा सोलंकी ने कांग्रेस में रहते हुए महापौर चुनाव जीता था। बाद में वह भाजपा में शामिल हो गई थीं। और उस समय भी जब उन्होंने दल बदला था तो उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। और फर्जी मार्शीट के मामले में उन्हें कोर्ट तक जाना पड़ा था।

मंच पर बोलने के लिए तैयार महापौर शारदा सोलंकी ने जब। युवक की बात सुनी वह युवक को खरी। खोटी सुनाने लगी युवक की बात से नाराज हो कर। उन्होंने कहा कि मैंने समाज के लिए दल बदला है बहन बेटियों। के लिए दलबदल है। बाबा साहब के लिए दला है समाज मेरा दोष बढ़ता है। कि मैंने क्या गलती की समाज के चंद लोग भी समाज की एक बेटी को न्यायालय तक खड़ा कर देते हैं। ऐसा कहते हुए उन्होंने भावनात्मक रूप से अपना बचाव करने का प्रयास किया। 

इसी तरह जब पूर्व सांसद अशोक अर्गल को मंच पर उदबोधन के लिए बुलाया गया तभी भीड़ में से एक बुजुर्ग मंच के सामने खड़े हो गए और कहने लगे की आप यहाँ बोलने लायक नहीं हो समाज।में बैठने लायक नहीं हो। इस तरह की खरी खोटी सुनते ही अशोक अर्गल अपना आपा खो बैठे और आक्रोशित होकर कहने लगे कि यह व्यक्ति कौन होता है यह बताने वाला कि मैं बोलने लायक हूं ही नहीं हूँ। क्या यह मंच की परमिशन से ऐसा कह रहा है लोकसभा? के 5 – 5 चुनाव लड़े हैं। और जीते हैं डॉ अंबेडकर ने सबको बोलने की आज़ादी दी है। 

हालाँकि मंच पर हुई यह गर्मागर्मी उस समय में शांत हो गई लेकिन जो भी कुछ घटना हुई उसकी चर्चा मुरैना शहर के साथ साथ पूरे प्रदेश में चलने लगी। प्रदेश मे पिछले कुछ समय में दल बदलने वाले जन प्रतिनिधियों की बाढ़ से आई हुई थी। लेकिन शायद किसी को मंच से भरी सभा में इस तरह किसी ने दल बदलू नहीं कहा और ना ही इस तरह किसी की किरकिरी हुई। वहीं कुछ लोग इसे विरोधियों की सोची समझी साजिश बताते हुए भी नजर आए। जान बूझकर महापौर शारदा सोलंकी और पूर्व सांसद अशोक अर्गल को बदनाम करने के लिए ऐसी बातें कार्यक्रम के दौरान की गई।

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