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कलेक्टर का खेला, सरकारी जमीन को अपनी मनमर्जी से पेला, कैग रिपोर्ट में खुलासा

रिपोर्ट के अनुसार एक मामले में एम्पिस्टेट एग्रो। को सरकारी जमीन। आवंटित की गई थी और कलेक्टर ने। पूरे नियम दरकिनार करते हुए यह जमीन आवंटित की थी। यहां राजस्व निरीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में साफ जानकारी दी थी कि राज्य सरकार के उपक्रम को सरकारी जमीन देने का कोई प्रावधान नहीं है।

ग्वालियर/ भोपाल मध्य प्रदेश: जब से विधानसभा में कैग रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है नये-नये खुलासे हो रहे हैं। कई तरह के कामों में गड़बड़ी की बात सामने आ रही है और इसको लेकर विधानसभा में जबरदस्त हंगामा भी चल रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार ग्वालियर में भी जमीन आवंटन में बड़ी गड़बड़ी की गई है। रिपोर्ट के अनुसार एक मामले में एम्पिस्टेट एग्रो। को सरकारी जमीन। आवंटित की गई थी और कलेक्टर ने। पूरे नियम दरकिनार करते हुए यह जमीन आवंटित की थी। यहां राजस्व निरीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में साफ जानकारी दी थी कि राज्य सरकार के उपक्रम को सरकारी जमीन देने का कोई प्रावधान नहीं है। राजस्व अधिकारी की रिपोर्ट के बावजूद कलेक्टर द्वारा इस तरह मनमर्जी से सरकारी जमीन की बंदर पाठ करना साफ बताता है कि किस तरह राजस्व अधिकारी सरकारी जमीन का खेल खेलते हैं। 

मामला तीन साल पहले का है जब एमपी स्टेट एग्रो को उर्वरक बेचने के लिए एक सरकारी जमीन कलेक्टर ने आवंटित की थी, जबकि कलेक्टर को ऐसा कोई अधिकार नहीं था। प्रधान महालेखाकार लेखा परीक्षा प्रथम की ऑडिट में यह गड़बड़ पकड़ आई है। इसका खुलासा 17 मार्च को विधानसभा में तब हुआ जब यह रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट में बताया गया है महालेखाकार टीम ने ग्वालियर कलेक्टर कार्यालय की नजूल शाखा का ऑडिट किया था? ? तब उन्हें एक आवेदन प्रबंध निदेशक एमपी स्टेट एग्रो इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन लिमिटेड का। प्राप्त हुआ था इसमें ग्वालियर में 2020 में उर्वरक विक्रय। केंद्र के लिए एक हज़ार अड़तालीस वर्ग मीटर का भुखंड आवंटन की मांग की गई थी। कलेक्टर ने आवेदन के आधार पर ही सरकारी जमीन आवंटित भी कर दी थी। 

कलेक्टर के आवंटन आदेश में दो बातों का का उल्लेख मिला है जो एक-दूसरे के विपरीत है पहले पैरा। में लिखा है भूमि उर्वरक विक्रय। केंद्र खोलने के लिए आवंटित की जा रही हैं। जबकि दूसरे पैरा में लिखा हुआ है कि जमीन सरकारी अभिलेख में सड़क के रूप में दर्ज है। इसे आवागमन की सुविधा बढ़ाने के लिए आवंटित किया जा रहा है। नियम यह है कि नोतन परिवर्तन उत्तराखं उस गांव की कुल भूमिका दो प्रतिशत चरनोई के लिए सुरक्षित रखने पर। किया जा सकता है। पेश रिपोर्ट में बताया गया है कि मध्यप्रदेश नजूल भूमि निवर्तन।निर्देश में बिना किसी प्रावधान के राज्य सरकार के उपक्रम को भूमि आवंटित करना कलेक्टर के अधिकार क्षेत्र में आता ही नहीं है। प्रीमियम और पट्टा किराए का भुगतान भी प्रावधानों का उल्लंघन है इस मामले में राज्य सरकार ने जून 2000। तेईस में आवंटन प्रकरण की समीक्षा कर फिर से परीक्षण के बाद नियमानुसार कार्रवाई की बात की थी। 

जिस तरह से विधानसभा में प्रस्तुत कैग रिपोर्ट में तमाम गड़बड़झाला के मामले खुल रहे हैं।वह साफ बताता है कि प्रदेश स्तर में सरकारी जमीन की बंदर पाठ किस तरह से चल रही है। अब ग्वालियर में एमपी स्टेट ए ग्रो। को सरकारी जमीन आवंटित करने में जिस तरह की गड़बड़ी का खुलासा हुआ है वह तमाम राजस्व अधिकारियों के साथ ही कलेक्टर की भूमिका पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। 

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