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आप को समर्थन मतलब कांग्रेस का विरोध नहीं, सपा अध्यक्ष ने क्यों दिया यह बयान

नई दिल्ली: पिछले कुछ समय से जिस तरह से ईडी गठबन्धन के घटक दलों में खींचतान चल रही थी उसमें ज्यादातर दलों के निशाने पर कांग्रेस रही है। इससे कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती जा रही थी। लेकिन अब सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जो बयान दिया है वह कांग्रेस के लिए राहत भरा है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को समर्थन देने और उनके साथ मंच साझा करने की घोषणा के बाद INDIA गठबंधन के भविष्य को लेकर जारी अटकलों पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को विराम लगा दिया। उन्होंने स्पष्ट करते हुए साफ कहा कि आप को समर्थन का मतलब कांग्रेस का विरोध नहीं है।

अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि जो जहां भाजपा को हराने की स्थिति में हाेगा, उसे वहां समर्थन दिया जाएगा। यहीं हमारी रणनीति थी कि जो क्षेत्रीय पार्टी जहां मजबूत होगी, वहां उसके साथ खड़ा रहना होगा। मिल्कीपुर विधानसभा उपचुनाव के ठीक पहले एक बार फिर अयोध्या के किसानों से लखनऊ स्थित अपने पार्टी मुख्यालय में मुलाकात कर भूमि अधिग्रहण के दौरान उनका उत्पीड़न करने के मामले को हवा दे दी। 

सात जनवरी को सपा प्रमुख ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में AAP को समर्थन देने और उनके साथ चुनावी मंच साझा करने की घोषणा की थी। अखिलेश के निर्णय को सपा-कांग्रेस के बीच दूरी बढ़ने से जोड़कर देखा जा रहा था। दोनों दलों के 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में साथ लड़ने काे लेकर भी अटकलें तेज हो गईं थी। कांग्रेस ने मिल्कीपुर उपचुनाव में सपा का समर्थन किया है। मिल्कीपुर के उपचुनाव में पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक (पीडीए) कार्ड खेलने के साथ सपा अध्यक्ष ने वहां के किसानों की जमीन जबरन अधिग्रहित करने का मुद्दा उठाकर स्थानीय मुद्दे को धार दी। भाजपा प्रत्याशी का टिकट गुजरात से मिलने की बात कहते हुए अखिलेश ने चुनाव को स्थानीय बनाम बाहरी बताया।

अख‍िलेश यादव ने कहा कि मिल्कीपुर में गुजरातवालों से बचकर रहिए। यह देश का सबसे बड़ा उपचुनाव होने जा रहा है। लोकतंत्र में ऐसा चुनाव नहीं देखा होगा। ये चुनाव पारदर्शी हो इसका उदाहरण सरकार पेश करे। दुनिया के लोग आकर देखें कैसे निष्पक्ष चुनाव होता है? मिल्कीपुर में भी इनके (भाजपा) पैर उखड़ते नजर आ रहे हैं।

हालांकि अखिलेश यादव तो यह बयान देकर यह प्रयास कर चुके हैं कि एनडी गठबंधन पहले की तरह ही मजबूत रहने वाला है और सपा पार्टी न तो आपके विरोध में है और ना ही कांग्रेस के। लेकिन अखिलेश यादव के इस बयान का आने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और आप में से किसको फायदा होता है?और किसको नुकसान यह देखना दिलचस्प होगा। 

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