भोपाल मध्य प्रदेश: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के नगर निगम ने एक गजब ही कारनाम कर दिखाया है। यहां पर तमाम ऐसे कर्मचारी हैं जो घर बैठे तन खा ले रहे और इन कर्मचारियों की संख्या 1020। या सैकड़ों में नहीं हज़ारों में हैं और इनके द्वारा घर बैठे टकारी जाने वाली मासिक वेतन की राशि? करोड़ों में है। यदि इसका पूरा मूल्यांकन करें तो साफ समझ में आता है कि पिछले कई सालों से यदि ऐसा चल रहा है तो फिर भोपाल नगर निगम में केबल घर बैठे कर्मचारियों के नाम पर ही अरबों। रुपये का खेल किया जा रहा है और यह अरबों रुपए आम जनता के टैक्स के पैसों से चुकाए जा रहे हैं।
भोपाल नगर निगम में 12400 अस्थाई कर्मचारी हैं जिसमें 29, 89 दिवसीय और विनियमित हैं। इनकी सैलरी के नाम पर हर महीने लगभग चौदह करोड़ रुपये खर्च होते हैं। लेकिन इसमें से 25% ऐसे कर्मचारी हैं जो बिना कोई काम किए ही घर बैठे मासिक वेतन ले रहे हैं। ऐसे तमाम कर्मचारी हैं जो न तो निगम के किसी दफ़्तर में जाते हैं न फील्ड में ही काम करते हैं न इनको कोई काम दिया गया है केवल कागजों पर इनका नाम चढ़ा है और वेतन हकीकत में मिल रहा है। ऐसे भी तमाम कर्मचारी हैं जो नेताओं अफसरों। पार्षदों के घर में चाकरी कर रहे हैं लेकिन अपना? मासिक वेतन हर महीने निगम से ही ले रहे हैं। कुछ कर्मचारी तो कमाल के हैं क्योंकि वह न। तो कभी ड्यूटी पर आते और न। ा ही किसी तरह का कोई काम करते हैं लेकिन वह किसी न किसी रसूखदार अधिकारी नेता पार्षद एमआइसी मेंबर के रिश्तेदार हैं और उनको कागजों पर ही केवल इसलिए नौकरी दी गई है कि उनको घर बैठे उनका वेतन पहुंचाया जा सके।
दैनिक अखबार भास्कर में छपी रिपोर्ट के अनुसार भोपाल नगर निगम में पिछले 5 साल में 19 122 कर्मचारी बड़े हैं जिन पर 9.7 करोड़ का खर्च बढा है। 2019 में 9963 कर्मचारियों पर कुल 4 करोड रुपये वेतन में खर्च होते थे जो अब 12400 कर्मचारियों पर बढ़कर तेरह करोड़ पचासी लाख हो चुका है। रिपोर्ट के अनुसार पूर्व एमआईसी सदस्य महेश मकवाना की पत्नी मंजू यादव यादव का नाम दो साल से कर्मचारी के तौर पर ईदगाह हिल्स पर निगम के वार्ड क्रमांक 10। के ऑफिस से दूर रेन बसेरे के दस कर्मचारियों में दर्ज है। लेकिन हकीकत में आज तक किसी ने भी मंजू यादव को यहां पर किसी तरह की ड्यूटी करते नहीं देखा जबकि दो साल से वह यहां काम करने की एवज में मासिक वेतन ले रही है। माता मंदिर स्थित शिक्षा एवं खाद्य शाखा 75 सालों से बंद है। बाकी की शाखाएं तो खुली हैं अन्य शाखा। के कर्मचारी ने ही बताया कि शिक्षा एवं खाद्य शाखा सालों से बंद है। यहां किसी को आते जाते नहीं देखा लेकिन नगर निगम के रिकॉर्ड में यहां काम करने वाले चार कर्मचारियों को मासिक वेतन दिया जा रहा है। निगम उपायुक्त सीबी मिश्रा की पत्नी सरोज लिपिक। के पद पर है उनकी बेटी नीतू तिवारी 29। दिवसीय कर्मचारी के तौर पर कार्यरत है और बाकी दोनों कर्मचारी ममता गुप्ता गुप् और दीपक है चारों को हर महीने 12 -12 हजार रुपए मासिक वेतन नगर निगम दे रहा है।

पूरी रिपोर्ट काफी लम्बी है और घर बैठे ऐसे कर्मचारियों की फेहरिस्त भी लम्बी है लेकिन भास्कर द्वारा किए गए इस खुलासे से साफ नजर आ रहा है। थी जनता से टैक्स वसूलने वाला भोपाल नगर निगम। उस टैक्स के पैसे का उपयोग जनता को इस सुविधा देने की बजाय। अपने चहेतों को घर बैठे मासिक वेतन देने में कर रहा है। कुल बारह हजार से ऊपर कर्मचारियों में से पच्चीस प्रतिशत ऐसे कर्मचारी इस रिपोर्ट में बताए गए हैं मतलब तीन हजार कर्मचारी हैं जो हर महीने साढ़े तीन करोड़ रुपए वेतन के रूप में डकार रहे हैं। इस मामले में पार्षदों ने तब जब अपने क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों की जानकारी निगम से मांगी तो उन्हें नहीं दी गई और इस जानकारी के लिए उन्हें आरटीआई लगानी पड़ी।वार्ड अठहत्तर के पार्षद मोहम्मद रियाज और वार्ड 35 की पार्षद शिरीन खान को आरटीआई के माध्यम से ही पता चला कि उनके क्षेत्र में चालीस कर्मचारी तैनात हैं जबकि फील्ड पर हकीकत में दस ही हैं।
आपको बता दें कि वार्ड 78 की तरह ही अन्य वार्डों की स्थिति भी हो सकती है जहाँ कागजों पर तमाम कर्मचारी रख लिए गए हों। उनके नाम पर वेतन को खुर्द बुर्द। किया जा रहा हो जबकि फील्ड। में कर्मचारियों की वास्तविक संख्या उनसे कहीं कम हो यही कारण रहे कि शायद जनता को नगर निगम द्वारा दी जाने वाली सेवाओं का सही लाभ नहीं मिल पा रहा है कई क्षेत्रों में न तो डे्रनेस सिस्टम सही से साफ हो रहा है सड़कों पर सफाई हो रही है। खैर इन सब कारनामों के बावजूद भी भोपाल स्वच्छता सर्वेक्षण में दूसरे पायदान पर आ चुका है। अब निर्णय भोपाल की जनता ले कि उन्हें इस उपलब्धि पर ताली। पीटनी है या नगर निगम के गड़बड़झाले पर माथा पीटना है?
