नई दिल्ली डिजिटल डेस्क : ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जब कांग्रेस छोड़ी थी तब सही पूरे देश की जनता और तमाम। राजनेता इस बात का कयास लगा रहे थे कि ऐसी क्या वजह रही होगी कि उन्हें कांग्रेस छोड़नी पड़ी।इसको लेकर समय समय पर तमाम बातें निकलकर आई हैं लेकिन दस मार्च दो हजार बीस के बाद अब दो हजार पच्चीस में आकर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने खुद ही खुलासा कर दिया है कि ऐसी क्या मजबूरियां रहीं ऐसी? क्या वजह रही? ऐसे क्या दबाव रहे जिसके चलते उन्हें यह फैसला लेना पड़ा और उस कांग्रेस को छोड़ना पड़ा जिसमें वह सालों से सेवा कर रहे थे। और सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ने की जो।कुछ वजह बताई वह हकीकत में चौंकाने वाली है।
आज से पाँच साल पहले सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने पर 15 महीने में कमलनाथ सरकार गिर गई थी। कांग्रेस के दो दिग्गज नेता कमलनाथ और दिग्विजय सिंह ने ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से सरकार गिराए जाने की अलग-अलग वजह बताकर राजनीतिक हलचल मचा दी है। दिग्विजय सिंह ने एक पॉडकास्ट में 5 साल पहले वाली बंद कमरे की बात को सार्वजनिक कर दिया है। उन्होंने कहा कि, उनकी वजह से नहीं बल्कि कमलनाथ की वजह से सिंधिया कांग्रेस छोड़कर भाजपा में चले गए और सरकार गिर गई। इसके बाद कमलनाथ ने भी दिग्विजय सिंह पर खुलकर वार किया है। दोनों नेताओं के बीच चल रहे वार पलटवार के बीच पहली बार केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
नई दिल्ली में एक प्रेस वार्ता में मीडिया ने जब। सिंधिया से कांग्रेस छोड़ने की वजह पूछी? अब उन्होंने चुप्पी तोड़ते हुए कहा, “मध्यप्रदेश में जब कांग्रेस की सरकार थी। तब मैंने अपने समर्थक मंत्रियों से साफ कहा था कि, सरकार से जुड़ा कोई भी काम को लेकर मेरे पास मत आया करो। सरकार के मुखिया कमलनाथ जी हैं। आप लोग सीधे उन्हीं से बात किया करो। मैं आपके मंत्रालयों से जुड़े मामलों में कोई हस्तक्षेप नहीं करुंगा।” कमलनाथ सरकार गिराने और कांग्रेस छोड़ने की बात पर केंद्रीय मंत्री सिंधिया कहते है कि दोनों नेताओं से मेरे परिवार के वर्षों पुराने संबंध हैं। जब कभी दिग्विजय सिंह जी मेरे पिता जी से मिलने घर आते थे। तब पिताजी किसी अन्य काम में व्यस्त होते थे तो दिग्विजय सिंह जी के साथ बैठने और बातचीत करने की जिम्मेदारी मेरी होती थी। कमलनाथ जी भी मेरे पिताजी के समकक्ष हैं। मैं बचपन से उन्हें कमल अंकल कहकर बुलाता आया हूँ।

ज्योतिरादित्य सिंधिया से जब बगावत की वजह पूछी गई तो उन्होंने कहा, “मै 2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान ग्वालियर चंबल संभाग के अलावा प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में प्रचार के लिए गया था। इस दौरान मैंने कांग्रेस के उम्मीदवारों से वादा किया था। राज्य में कांग्रेस सरकार बनेगी तो आपके क्षेत्रों के विकास के काम प्राथमिकता के साथ कराए जाएंगे। जब कमलनाथ जी मुख्यमंत्री बने तो मैं केवल उनसे इन्हीं बातों को लेकर मिलने जाता था। मैंने उन्हें भी बताया था, जहां मैं प्रचार के लिए गया था। मैंने उन सभी लोगों से विकास के काम करवाने का वादा किया है। अब इन क्षेत्रों के विकास के काम प्राथमिकता के साथ पूरे होने चाहिए।”
सिंधिया ने कहा, “कमलनाथ जी मुझे लेकर सार्वजनिक तौर पर टिप्पणियां करते थे। ये बातें जब पार्टी के भीतर उठी तो उनसे इन पर माफी मांगने को लेकर कहा गया। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। अगर बंद कमरे में कोई बात होती तो मामला खत्म हो जाता। इन्हीं सभी घटनाक्रम के बाद मुझे एक्शन लेना पड़ा। क्योंकि हर चीज की एक लिमिट होती है। कांग्रेस छोड़ने से पहले ये सभी बातें मैंने पार्टी के एक शीर्ष नेता को बता दी थी। इसके बाद ही मैंने पार्टी बदलने का फैसला लिया था। आपको बता दें कि सिंधिया को कांग्रेस छोड़े हुए 5 साल हो गए हैं। पांच साल में उन्होंने कभी भी अपने कांग्रेस छोड़ने के सवाल पर इस तरह खुलकर बात नहीं की। यह पहला मौका है जब उन्होंने मौन व्रत तोड़ा है और अपने कांग्रेस छोड़ने की वजह बताई है।
