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विदेश घूमने का मजा लौटने पर बन गई सजा, 4 नप गए बाकी में हड़कंप।

दमोह मध्य प्रदेश; रोजगार सहायकों को बिना अनुमति के बिना शासन को बताएं बैंकोंक घूमना महंगा पड़ गया। उन्हें, क्या पता था कि बैंकों घूमने में वह जो एंजॉय कर रहे हैं वापस आते ही उनकी ये सारी खुशियों पर पानी फिर जायेगा। उन को वह देखना पड़ेगा जो उन्होंने सोचा भी न होगा। जनपद सीईओ ने सख्त कार्यवाही करते हुए इन रोजगार सहायकों की छुट्टी कर दी। अब सवाल यह उठता है कि पूरे प्रदेश में कब कब और कितने रोजगार सहायक बिना अनुमति के ऐसी ही विदेश यात्रा पर गए हैं और उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

मामला मध्य प्रदेश के दमोह जिले का है। दमोह जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली चार ग्राम पंचायतों में पदस्थ रोजगार सहायकों के द्वारा बिना सूचना दिए बैंकॉक घूमने जाने पर जिला पंचायत सीईओ अर्पित वर्मा ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दी हैं। यह रोजगार सहायक बिना किसी सूचना, अनुमति और अवकाश के बैंकाक की यात्रा पर चले गए थे। मामले की शिकायत 12 जुलाई को जनपद सीईओ पूनम दूबे से की गई थी। जिसकी जानकारी जिला पंचायत सीईओ को मिली थी। जिला पंचायत सीईओ ने सही जवाब प्रस्तुत न करने और बिना अनुमति के विदेश यात्रा पर जाने पर चारों रोजगार सहायकों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। इनके प्रभार आसपास के दूसरे रोजगार सहायकों को सौंप दिए गए हैं।

जब ज़नपद सीईओ को एक शिकायत के माध्यम से यह जानकारी मिली तो सीईओ ने नोटिस जारी करके चारों रोजगार सहायकों को तलब किया। उनके ओर से जो जवाब प्रस्तुत किया गया। उसमें पाया गया कि 8 से 12 जुलाई तक चारों देश से बाहर थे। इतना ही नहीं, जनपद सीईओ ने जो नोटिस जारी किया। उसका जवाब भी चारों रोजगार सहायकों ने नहीं दिया। इससे साफ हो गया कि चारों बिना सूचना के विदेश गए थे। जनपद सीईओ पूनम दुबे ने पत्र जारी करके चारों से विदेश जाने से पहले अनुमति लेने के संबंध में जानकारी मांगी थी। जब उन्होंने जानकारी नहीं दी तो स्पष्ट हो गया कि चारों बैंकॉक गए थे। जिला पंचायत सीईओ ने सही जवाब प्रस्तुत न करने, बिना अनुमति के विदेश यात्रा पर जाने पर सेवाएं समाप्त कर दी हैं।

अब सवाल यह उठता है कि क्या यह ऐसा पहला मामला है जब जिला रोजगार सहायक बिना अनुमति के बाहर किसी यात्रा पर गए हों?या ऐसा और भी जगह हो चुका है। सीईओ पूनम दुबे तो सजग थी और उन्होंने तत्परता। दिखाते हुए न केवल जवाब मांगा बल्कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इन चारों रोजगार सहायकों को हटा भी दिया। ऐसे ही तमाम और मामले भी सामने आ सकते हैं शासन को इस मामले में जांच कर एक विस्तृत कार्रवाई की योजना बनानी चाहिए।

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