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प्रदूषण मुक्त ज़िन्दगी हर किसी का मौलिक अधिकार, लेकिन सरकारें इस मामले में पूरी तरह फैल

नई दिल्ली: लगातार बढ़ रहे प्रदूषण से हर आम और खास परेशान हैं और दिल्ली में प्रदूषण के हालात शीत्र। तो आते ही क्या होते हैं, यह सभी जानते हैं। पराली जल ने और दिवाली के पटाखों के बाद प्रदूषण फैलने का दोषी केवल पराली और दिवाली के पटाखों को माना जाता है। बढ़ते प्रदूषण पर अब मानवीय उच्चतम न्यायालय ने बड़ा फैसला दिया है। और साफ कहाँ है कोई धर्म प्रदूषण? को बढ़ावा नहीं देता और जहां तक पटाखों। की बात है उसे भी दिवाली तक सीमित न रख। हर तरह के पटाखों पर प्रतिबंध होना चाहिए प्रदूषण मुक्त जिंदगी हर।किसी का मौलिक अधिकार है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली पर पटाखों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लागू नही करने के दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस पर सख्त टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सब? दिखावा है। पटाखों पर प्रतिबंध को दिवाली से जोड़े जाने पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसे दिवाली से क्यों जोड़ते हैं कोई भी धर्म प्रदूषण? को बढ़ावा नहीं देता यह लोगों के स्वास्थ्य का। मामला है प्रदूषण मुक्त जीवन। नागरिकों का मौलिक अधिकार है सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर। को पटाखों पर प्रभावी ढंग से प्रतिबंध लागू करने का निर्देश देते हुए तत्काल स्पेशल सेल गठित करने के लिए भी निर्देशित किया। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पटाखों पर पूरे साल प्रतिबंध लगाने पर विचार करने के लिए भी कहा है और 25 नवंबर तक फैसला करके कोर्ट को जानकारी देने को कहा है। 

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि पटाखों पर प्रतिबंध सिर्फ दिवाली ही नहीं बल्कि सभी मौकों जैसे चुनाव शादियों में भी लगना चाहिए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने एनसीआर के अन्य राज्यों से भी पटाखों के निर्माण भंडारण बिक्री और पटाखे चलाने पर रोक लगाने के बारे में जवाब देने के लिए कहा है यह आदेश न्यायमूर्ति अभय एस ओ। का और अगस्टिन जॉर्ज की पीठ ने सोमवार को दिल्ली में वायु प्रदूषण के मुद्दे पर। सुनवाई के दौरान दिया है। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले आदेश में दिल्ली में पटाखों पर प्रतिबंध लगाने की बात कही थी जिस पर दिल्ली सरकार ने हलफनामे का जिक्र करते हुए कोर्ट को बताया कि चौदह अक्टूबर को सरकार ने पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध का आदेश जारी किया था। 

बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय दिया है लेकिन अब सवाल यह उठता है कि इस बढ़ते प्रदूषण पर सरकारें?कितनी गंभीर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक बात बिल्कुल सही कही है कि पटाखों पर प्रतिबंध तो पूरे साल होना चाहिए केवल दिवाली के समय ही प्रतिबंध का दिखावा शासन प्रशासन हमेशा से करता आया है। यदि बात पराली जलाने की करें तो इसके विकल्प रूप में भी अभी तक सरकारें कोई प्रबंध नहीं कर पाई हैं। जबकि पराली को काटकर उसका उपयोग अन्य जगह पर करके किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है। इसी तरह देश के कई शहरों में ईंट के भट्ठे भी नियम विरूद्ध संचालित हैं और इनके संचालन को भी प्रशासन की मौन अनुमति मिली हुई है। यदि बात उद्योग और फैक्ट्री की करें तो तमाम क्षेत्रों में नियमों को ताक रख कर उद्योग संचालित है और प्रदूषण विभाग द्वारा इनको कागजों पर ही एनओसी और अन्य अनुमतियां दे दी जाती हैं। इस तरह देखें तो तमाम प्रदूषण कारक माध्यम हैं जो लगातार प्रदूषण को बढ़ा रहे हैं लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश कि प्रदूषण मुक्त जिंदगी हर किसी का मौलिक अधिकार है, एक उम्मीद की किरण है। यदि आदेश को पूरे देश में गंभीरता से अमल में लाया जाता है तो प्रदूषण के स्तर को काबू में किया जा सकता है। 

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