सीहोर भोपाल मध्य प्रदेश: धार्मिक आयोजन कराने वाले लोग किस तरह तानाशाह और लापरवाह हैं इसकी बानगी अभी हाल ही में सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में हुई मौतों के बाद देखने को मिलती है। जहाँ को व्यवस्था और लापरवाही के चलते लगातार तीन दिन तक मौत तांडव करती रही और इस तांडव पर गोवेरेश्वर धाम के मुखिया प्रदीप मिश्रा। नाचते रहे मुस्कुराते रहे और बेतुके जवाब देते रहे। जिस तरह का रवैया उन्होने अपनाया, वह साफ बताता है कि उन्हें शासन प्रशासन और देश के कानून का कोई खौफ नहीं है। एक बार फिर अब प्रशासन का वहीं जांच का खेल शुरू हो गया है जिसमें से आज तक कोई काम का तेल नहीं निकला है।
मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के कुबेरेश्वर धाम में आयोजित कांवड़ यात्रा में लाखों लोगों का हुजूम उमड़ा। कुव्यवस्था का आलम यह था मंगलवार बुधवार और गुरुवार हो लोग काल के गाल में समाते रहे। तीन दिनों में कुल सात लोगों की मौत हो गई। कांवड़ यात्रा में आए 40 से ज्यादा लोग लापता है। बीमार लोग सरकारी अस्पतालों के बिस्तरों पर तड़प रहे है और पंडित मिश्रा ने सात मृतकों को बीमार बता कर पल्ला झाड़ लिया। प्रशासन ने ‘जांच-जांच’ खेलते हुए आयोजकों पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज करने के बजाए ज्यादा शोर मचाने के आरोप में आठ डीजे वाहन जब्त कर अपनी जिम्मेदारी निभाई है।
किसी गरीब की झोपड़ी तोड़ने वाला गुमटी और रेडी उठा ले जाने वाला प्रशासन इतनी बड़ी लापरवाही पर मुंह में दही जमाए बैठा रहा। यह कहना भी गलत नहीं होगा कि आयोजक प्रदीप मिश्रा। का राजनीतिक रसूख कितना है जिसको देखकर प्रशासन को लकवा मार चुका है। अफसर पिछली घटना से सबक लेने के बजाए बगैर सवाल उठाए चुपचाप अनुमतियों पर हस्ताक्षर करते रहे और अब ‘अनुमान से अधिक भीड़’ का हवाला देकर हाथ ऊंचे कर दिए। कांवड़ यात्रा में आए कई लोग बीमार है और सिहोर के जिला अस्पताल में भर्ती है। कई परिवारों के सदस्य बिछड़ गए है। वे उन्हें खोजने के लिए यहां-वहां चक्कर लगा रहे है। उन्हें भी प्रशासन ने राम भरोसे छोड़ रखा है।

कुबेरेश्वर धाम में अनुमानित भीड़ के हिसाब से न रहने व ठहरने के इंतजाम थे और न शौचालयों की व्यवस्था थी। लोगों को पीने का पानी तक नहीं मिला। भीड़ जुटाने के लिए इस बार भी रुद्राक्ष वितरण का सहारा लिया गया। प्रचार किया गया कि रुद्राक्ष अभिमंत्रित है।उसके चक्कर में ही भीड़ जुटी। प्रशासन ने उस पर रोक लगाना उचित नहीं समझा। पंडित मिश्रा भीड़ नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग दिन,अलग-अलग राज्यों के लोगों को बुला सकते थे, लेकिन उन्होंने हर कथा में प्रचार किया कि एक जोड़ी कपड़े में आना, धाम पर सब इंतजाम मिलेंगे, लेकिन लोगों को पीने का पानी तक नहीं मिला। इन सब कुव्यवस्थाओं और लापरवाही के बावजूद भी खबरदार जो आयोजक प्रदीप मिश्रा को कोई दोष दिया। अन्यथा धर्म खतरे में पड़ जाएगा। इसलिए धर्म की अफीम चाटीये जो हुआ वह भगवान ने किया कहकर भूल जाइए।
