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कलेक्टर बनी मसीहा,  पीड़ित मजदूरों को जालिम ठेकेदार से दिलाए मेहनत के 4.65 लाख 

ऐसे कई मामले रोज घटित होते हैं जहां मजदूरों को उनकी हक की मजदूरी दिए बिना ही बेइज्जत करके भगा दिया जाता है है कि ऐसा छोटा मोटा मामला न होते हुए यदि रेलवे के बडे काम को लेने वाले किसी ठेकेदार ने महीनों काम कराकर और मजदूरों को बिना मजदूरी किए भगा दिया हो तो आप सोचिए। ऐसे मजदूरों का मददगार कौन बनेगा करो? क्या उम्मीद इन मजदूरों की रह जाएगी क्योंकि इन मजदूरों को यह भी पता करता है कि रेलवे का इतना बड़ा ठेके लेने वाला ठेकेदार। कहीं न कहीं बड़ी रसूख भी रखता है इन सबके बावजूद ऐसे करो 24 मजदूरों को न्याय दिलाने का काम किया है। ग्वालियर की कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने 

एक आय कृपया जा सकता ह दरअसल प्रदेश के सीधी शहडोल कटनी व उमरिया जिले के श्रमिक एक ठेकेदार के अंतर्गत रेलवे का काम करने के लिए क्षेत्र में ग्वालियर आए हुए थे। 45 दिन की मजदूरी उनको ठेकेदार द्वारा नहीं दी गई थी। इन मजदूरों ने 20 जून को ग्वालियर कलेक्ट्रेट पहुंचकर। डॉक्टर रुचिका चौहान करो को अपनी व्यथा सुनाई थी करो और संवेदनशील कलेक्टर साहिबा ने तुरंत निराकरण करने के लिए मामले को गंभीरता से लेते हुए श्रम आयुक्त को टीम सहित कार्रवाई करने के लिए आदेशित किया। ठेकेदार ने भी रेलवे का काम कर रही नैना इन्फ्रा कंपनी करो। के मालिक सिंह यादव को समझाइश दी है जो है उत्तर प्रदेश के ललितपुर का रहने वाला है। श्रम आयुक्त है द्वारा शक्ति दिखाए जाने पर वो कलेक्टर साहिबा के अथक प्रयास से इन बेबस मजदूरों को न्याय मिला करो करो और उन्हें 45 दिन की मजदूरी है जिसकी कुल रकम। चार लाख पैंसठ हजार रुपए थी।वह तुरंत प्रदान की गई मजदूरी पाने वाले इन चौबीस मजदूरों में तेरा पुरुष और ग्यारह महिलाएं थीं 

आपको बता दें ही की मजदूर बिना मजदूरी के बहुत परेशान थे। इनके खाने पीने पर भी संकट खड़ा हो गया था। यह देखते हुए कलेक्टर साहिबा ने इनके रहने की व्यवस्था बस स्टैंड स्थित रैन बसेरा में करा दी थी और साथ में इनके लिए भोजन पानी की व्यवस्था भी कराई गई थी 

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