ग्वालियर मध्य प्रदेश: मध्यप्रदेश के लिए साल दो हजार छब्बीस की शुरुआत हुई इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र के दूषित पानी कांड से। इस दूषित पानी कांड ने देश के सबसे स्वच्छ शहर माने जाने वाले इंदौर की जमकर किरकिरी की। पूरे देश में यह सवाल उठने लगे की ऊपर से खूबसूरत दिखने वाले शहर की हकीकत कितनी भयावह है इस हादसे में तेईस लोगों के मौत की खबरें भी चली। और जब जांच हुई और जिस तरह की लापरवाही नजर आई, उसने सब कुछ चौंका दिया कि किस तरह पेयजल सप्लाई वाले पाइप लाइन में सीवर का पानी मिल रहा था और यह सीवर का पानी मिलने से ही लोगों के घर में वह प्रदूषित पानी पहुंचा जिसको पीने से लोग बीमार होने लगे, सैकड़ों के संख्या में लोग अस्पताल में भर्ती हुए एक तरह से ऐसे हालात नजर आने लगे जैसे कोई महामारी फैल गई हो। इस घटना के बाद यह सवाल उठने लगे कि आपका शहर पेयजल सप्लाई में कितना सुरक्षित है? क्या आपके शहर के जिम्मेदार अधिकारी आपको शुद्ध पानी पहुंचा पा रहे हैं?चलिए ग्वालियर का हाल जान लेते हैं।
ग्वालियर में रविवार को जो कुछ हुआ वो चौंकाने वाला है। ग्वालियर का यह मिर्ज़ापुर नाम अब आपको स्मरण रहेगा। घास मंडी क्षेत्र के मिर्जापुर क्षेत्र में है वॉटर सप्लाई पंप जहां पर पानी की टंकी में पड़े मरे हुए सांप का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होता है। इस वीडियो में यह दावा किया जाता है कि वाटर पंप रूम के टंकी में मरा हुआ सांप पड़ा था और यहीं से सैकड़ों परिवारों को पानी सप्लाई होता है और यह दूषित पानी यदि लोग पीले तो लोगों को नुकसान भी हो सकता है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और वहीं से कुछ मुख्य धारा के प्रतिष्ठित चैनल ने भी इस खबर को प्रमुखता से उठा लिया। खबर की हकीकत तक जाने का प्रयास ही नहीं किया। द इंगलेज पोस्ट ने मौके पर जाकर पंप संचालक बदन सिंह यादव से बातचीत की तो उन्होंने कुछ और ही खुलासा किया। उन्होंने कहा कि यहां के शरारती लड़कों ने पास पड़े कचरे के ढेर में से मरे हुए सांप को उठाया और उसे पानी की टंकी में डालकर वीडियो बनाकर वायरल कर दिया।

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जब तमाम इलेक्ट्रॉनिक चैनल्स पर यह खबर चलने लगी कि ग्वालियर में पानी की टंकी में सांप निकला है और इससे पहले मानपुर मल्टी की टंकी में भी मरी हुई मछली निकली थी, तो यह खबर पूरे प्रदेश में तेजी से फैल गई और इस खबर के बाद नगर निगम की लापरवाही पर और स्वच्छ पेयजल व्यवस्था पर सवाल उठने लगे नगर निगम के अधिकारियों ने भी मौके पर जाकर हकीकत को जाना और उन लड़कों को पकड़कर उनका वीडियो बनाकर जारी करवा दिया, जिसमें वह लड़के यह कहते नजर आ रहे हैं कि वीडियो वायरल करने के उद्देश्य से उन्होंने यह वीडियो बना दिया।सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।टंकी में सांप नहीं था, सांप भूरे से उठाया था। अब यह वीडियो वायरल करके नगर निगम के जिम्मेदारों ने अपनी लापरवाही से पल्ला झाड़ लिया। और यह साबित करने का निरर्थक प्रयास किया ही पानीपूरी तरह साफ है। नगर निगम पूरी तरह पाक साफ है।
द इंगलेज पोस्ट को पंप संचालक बदन सिंह ने और भी बहुत कुछ जानकारी दी थी।उनका कहना था कि इस पंप रूम में सांप कीड़े मकोड़े आ जाते हैं क्योंकि यह रूम जर्जर हालत में है।इस रूम में ऊपर टूटी हुई तीन डली है और रूम की दीवार भी कई जगह से क्षतिग्रस्त हैं, जिसमें बड़े बड़े छेद हैं। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि इस पंप रूम के बगल में ही यह कचरे का ढेर है जिसमें गंदगी जमा होती है, दूसरी ओर सरकारी जमीन पर झाड़ियां हैं जिनकी सफाई नहीं होती और पंप रूम के नीचे से ही गंदा नाला है जिसकी भी सफाई नहीं होती।उन्होंने कहा कि यह सब गंदगी के कारण ही कीड़े मकोड़े सांप आ जाते हैं। मतलब उन्होंने स्वीकारा कि पंप रूम में सांप आते हैं। हालांकि वीडियो में दिखाया गया सांप लड़कों द्वारा ही डाला गया अब यदि यह हकीकत मान भी लें तो फिर रूम की जो वास्तविक हालत थी वह वास्तव में चौंकाने वाली थी।
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अब सांप कांड झूठा बताने वाला वीडियो जारी करने से नगर निगम की जो पोल खुल गई उसको भी सुन लीजिए। कुछ शरारती लड़के पंप रूम के अंदर जाकर वॉटर टैंक में मरा हुआ सांप डालने में सफल हो जाते हैं और उसका वीडियो वायरल कर देते हैं। इसका मतलब है कि ग्वालियर शहर में संचालित तमाम पंप रूम असुरक्षित हैं।उनमें कोई भी अंदर जा सकता है और किसी भी तरह की शरारत कर सकता है। कोई मरा हुआ सांप डाल सकता है, तो कोई जहरीला सांप डाल सकता है, तो कोई जहर भी डाल सकता है। तो पंप रूम में यदि इस तरह असुरक्षित हैं जिसमें कोई भी शरारती लड़के घुसकर कुछ भी हरकत कर सकते हैं, तो क्या हम यह उम्मीद कर सकते हैं कि हमें शुद्ध पेयजल मिलता रहेगा? क्योंकि जिस तरह से ये लड़के पंपरूम में घुसकर वीडियो बनाकर वायरल कर चुके हैं, वह साफ बता रहा है कि शहर में संचालित पंप रूम असुरक्षित हैं और असामाजिक तत्व और देश के दुश्मन इन पंपरूम का इन टंकियों का सहारा लेकर शहर में दहशत फैला सकते हैं, भयावह हालात पैदा कर सकते हैं।
भागीरथपुरा, कांड जैसा कांड किसी शहर में न हो, हम ईश्वर से यह प्रार्थना करते हैं। लेकिन हमारे शहर में भी कई जगह पर पानी की लाइन और सीवर लाइन आसपास या एक दूसरे के ऊपर नीचे हैं जिनको हटाने के कई प्रयास भागीरथपुरा, कांड के बाद किए गए, लेकिन अभी भी पानी की मेन सप्लाई लाइन कई जगह नाले के ऊपर से निकल रही है। जब बारिश के समय नाले उफान पर होते हैं तब यह पाइप लाइन जलमग्न हो जाती है।इस पाइप लाइन में कई जगह पर लीकेज भी हैं जिनमें से पानी रिश्ता रहता है पानी रिसकर अंदर आ सकता है। इसका मतलब नाले में उफान होने पर पानी रिस कर पाइप के अंदर भी जा सकता है। ऐसे तमाम स्पॉट को चिह्नित कर जिम्मेदार अधिकारियों को समुचित प्रबंध करने चाहिए ताकि आने वाले बारिश के मौसम में इस तरह से दूषित पानी कहीं भी पेयजल सप्लाई में न मिले और लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा का ख्याल रखा जा सके।
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जो घटना मिर्जापुर पंप रूम पर हुई है, वह नगर निगम के लिए एक सबक है।केवल वीडियो प्रसारित करके अपने पक्ष में वाहवाही लूटने की बजाय नगर निगम को प्रयास करने चाहिए कि ऐसे तमाम पंप रूम जो क्षतिग्रस्त हैं उनको मजबूती से बनाया जाए, वहां सुरक्षा के इंतजाम किए जाएं। वहां साफ सफाई का प्रबंध किया जाए और ऐसी कोई भी स्थिति पैदा न हो कि वहां कोई जहरीला कीड़ा सांप बिच्छू घुस सके और यह तो कतई ना हो कि कोई शरारती तत्व पंप रूम के अंदर तक घुस सके। इस घटना से सबक लेकर नगर निगम को शहर के समस्त पंप रूम की जांच करनी चाहिए और उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने चाहिए। क्योंकि यदि ऐसा नहीं हुआ तो यकीन मानिए भागीरथपुरा से ज्यादा भयावह हालात हमारे शहर में हो सकते हैं।
