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निगम आयुक्त सहित कई इंजीनियर व अधिकारियों पर जुलाई में होगी एफआईआर क्योंकि???

एसीएस को जीवाजीगंज स्थित नाले में गंदगी और मिट्टी नजर आई। उन्होंने इंजीनियरों से सफाई के बारे में पूछा तो पीएची के इंजीनियरों ने दस जून तक सफाई का आश्वासन दिया और इस आश्वासन के बाद एसीएस सख्त लहजे में बोले कि यदि बारिश में ग्वालियर शहर डूबा तो इंजीनियर से लेकर अधिकारियों तक एफ आई आर कराऊंगा।

ग्वालियर मध्य प्रदेश: जल्द ही मानसून सक्रिय होगा और झमाझम बारिश होगी। पिछले दो साल से बारिश के मौसम में शहर के कई क्षेत्र जलमग्न हो जाते हैं।कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात हो जाते हैं और इन सब का दोषी है नगर निगम जो जल निकासी को सुव्यवस्थित करने में पूरी तरह असफल रहा है। न तो समय पर सीवर साफ होते हैं और ना ही उन नालों की सफाई होती है जिनके माध्यम से वर्षा जल शहर से बाहर निकलता है।कई क्षेत्र तो ऐसे हैं जहां नालों पर स्थायी या अस्थायी अतिक्रमण है, लेकिन निगम उन पर कार्रवाई नहीं करता। पिछले दो साल से शहर के कई क्षेत्रों ने जलभराव और बाढ़ के जो हालात देखे हैं, क्या वे इस साल भी होंगे और होंगे तो जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी इस पर मध्यप्रदेश नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के एसीएस बड़ी बात कह गए हैं।

शुक्रवार को ग्वालियर में मीटिंग का दौर था। सुबह से शाम तक मीटिंग चलती रही। मीटिंग ले रहे थे प्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे और आयुक्त संकेत भोंडवे। शहर की बदतर हालत पर कई बार एसीएस, और आयुक्त ने नाराजगी व्यक्त की और अधिकारियों को सख्त हिदायत दी। जमीनी हकीकत जानने के लिए भी ये दोनों अधिकारी नगर निगम के अधिकारियों के साथ शहर के विभिन्न क्षेत्रों में निरीक्षण के लिए निकले कई जगह पर गड़बड़ झालन नजर आया।खासकर सीवरेज और पेयजल के काम में तमाम खामियां नजर आईं। एसीएस को जीवाजीगंज स्थित नाले में गंदगी और मिट्टी नजर आई। उन्होंने इंजीनियरों से सफाई के बारे में पूछा तो पीएची के इंजीनियरों ने दस जून तक सफाई का आश्वासन दिया और इस आश्वासन के बाद एसीएस सख्त लहजे में बोले कि यदि बारिश में ग्वालियर शहर डूबा तो इंजीनियर से लेकर अधिकारियों तक एफ आई आर कराऊंगा। हालांकि निरीक्षण जीवाजीगंज, नाले का था, लेकिन उन्होंने ग्वालियर शहर के डूबने की बात कही। मतलब साफ है कि ग्वालियर में कहीं भी जलभराव और बाढ़ जैसे हालात होते हैं तो उनके अनुसार जिम्मेदार अधिकारी नपेंगे। 

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क्या एसीएस वास्तव में जितनी सख्ती से यह निर्देश देकर गए हैं, उतने सख्त हो पाएंगे क्योंकि दोषियों पर कार्रवाई करने के मामले में मध्य प्रदेश का इतिहास काला रहा है। या तो दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती और होती भी है तो कुछ समय बाद वह पाक साफ साबित होकर पुनः किसी न किसी पद पर काबिज होकर अपने कारनामे करने लगते हैं। ग्वालियर में चेतकपुरी रोड धसकने के मामले में भी क्या हुआ? यह सब लोग जानते हैं बड़ी लंबी जद्दोजहद के बाद दो गैर जिम्मेदारों को दोषी माना गया। निलंबितन की कार्रवाई भी हुई और उसके बाद बहाली भी हो गई और दोनों वहीं काम करने लगे। अब दोनों के कारनामे इतने खास तो नहीं हैं कि हम उनके नाम यहां महिमामंडित करें। भोपाल के नब्बे डिग्री ब्रिज के दोषी इंजीनियर को भी बहाल कर दिया गया है। अब ऐसे ही अन्य तमाम मामलों की फेहरिस्त पर नजर डालें तो फिर एसीएस, कि यह सख्ती केवल हवा हवाई नजर आती है। 

अपमान भी लें कि एसीएस एफआईआर कि जो सख्त हिदायत देकर गए हैं उस पर वे अमल भी करेंगे तो फिर तो आने वाले मानसून में नगर निगम के तमाम अधिकारी एफआईआर की धार में बह जाएंगे। पिछले दो साल किस तरह से मानसून के आते ही शहर के कई क्षेत्रों में हाहाकार मचा और किस तरह नगर निगम असहाय नजर आया और किस तरह नगर निगम के गड़बड़ कारनामों के चलते ही जलभराव हुआ। वह क्षेत्र के सभी लोगों ने देखा है और खबरों के माध्यम से पूरा प्रदेश जानते हैं। जानता है कि ग्वालियर में जलभराव और बाढ़ के हालात कितने भयावह थे। अभी मई में एसीएस ने यह सख्त हिदायत दी है कि ग्वालियर शहर डूबा तो दोषियों पर एफआईआर कराएंगे। अगले महीने जून नहीं मानसून आ सकता है और यदि मानसून कुछ धीमी रफ्तार से भी यहां पहुंचा तो जुलाई तक मानसून पूरी तरह सक्रिय होगा। मानसून सक्रिय होगा।अच्छी बारिश होती है, तो यकीन मानिए कि फिर से जलभराव होगा। 

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जिस तरह से एसीएस एफआईआर करने की सख्त हिदायत देकर गए हैं यदि वह धरातल पर चरितार्थ हुई तो फिर तो नगर निगम के तमाम अफसरों सहित आयुक्त भी जाएंगे, क्योंकि अब यह बात आयुक्त महोदय को भी पता है कि पिछले दो साल कई क्षेत्रों में जलभराव के विकराल हालात हुए हैं और नगर निगम जिम्मेदार हाथ पे धरे नजर आए और सबसे बड़ी हैरानी की बात अभी एक महीने बाद ही मानसून शुरू होगा, लेकिन अभी तक शहर के नाला नालियों को सफाई करने का काम भी ठीक से नहीं हुआ है और जहां तक शहर के मुख्य जल निकासी स्रोत की बात करें, जिसे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया नालक कहने पर आपत्ति दर्ज करते हैं, उसके हालात नाले से भी बदतर हैं। क्योंकि एलिवेटेड रोड के निर्माण के चलते बेसमेंट में कई फीट तक मिट्टी गिट्टी भरकर बेस तैयार किया गया है, जिसके चलते अब इसे नदी क्या नाला कहना भी अतिशयोक्ति होगा। 

इसी स्वर्णरेखा नाला( केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के अनुसार नदी) में एलिवेटेड निर्माण कार्य के चलते अभी हाल ही में जिस जगह पर गार्डर टूटने की घटना हुई है, वह स्थान ग्वालियर के प्रसिद्ध खेड़ापति हनुमान मंदिर के बिलकुल नजदीक हैं। पूरे एलिवेटेड रोड के निर्माण कार्य में यहीं पर यह दुर्घटना क्यों हुई। इसका इशारा तो खेड़ापति महादेव पहले ही कर चुके थे, जब मानसून के दौरान नाले से पानी की निकासी नहीं हुई और मंदिर के इतिहास में पहली बार मंदिर पर स्वयं नाले का और सीवर का गंदा पानी भर गया। उस समय खेड़ापति मंदिर परिसर में जलभराव की खबरें सुर्खियों में थी और क्षेत्रीय पार्षद सोनू त्रिपाठी ने मीडिया बाइट में स्पष्ट कहा था कि एलिवेटेड रोड के निर्माण की वजह से ही जल निकासी में बाधा उत्पन्न हुई है, जिसके चलते खेड़ापति मंदिर परिसर में जलभराव हुआ है, हालांकि शाम तक महल के दबाव में उनको अपना बयान बदलते हुए अपने लेटर पैड पर सफाई देनी पड़ी थी। 

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अब यह दो सालों का इतिहास बताता है कि शहर में जल निकासी के हालात भयावह हैं। पहली साल के जलभराव को लेकर दूसरी साल नगर निगम ने सबक नहीं लिया था। हालात बद से बदतर हुए थे और अब यह तीसरी साल केवल एक महीने का समय बचा है। एसीएस की सख्त हिदायत के बाद एक महीना के भीतर ही नगर निगम इतने समस्त नालों नालियों की सफाई कर जल निकासी को सुगम बना पाएगा। यह एक बड़ी चुनौती नजर आ रहा है। यानी कि आने वाले महीनों में यदि शहर में जलभराव होता है तो नगर निगम आयुक्त सहित तमाम दोषियों पर एफआईआर होगी, लेकिन क्या ऐसा होगा? शायद नहीं होगा क्योंकि एसीएस भी अपनी बात कहकर भूल जाएंगे। किस न किसी दबाव में आ जाएंगे और ग्वालियर में होए वही जो…… रच रखा? ( खाली स्थान भरो) खैर, राम भक्त खेड़ापति हनुमान जी स्वयं एलिवेटेड के नजदीक विराजमान हैं। वह यह सब कुछ देख रहे हैं, वहीं रक्षक हैं, उन्होंने पहले भी शहर की रक्षा की है और आने वाले साल के जलभराव से भी वही शहरवासियों की रक्षा करेंगे और शायद हो सकता है कि वह ज्यादा बारिश होने ही न दें और शहर वासियों के साथ साथ नगर निगम के दोषियों की भी खेड़ापति हनुमान जी कर लें!

Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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