jyotiraditya scindhia news: केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अभी हाल ही में ग्वालियर दौरे पर थे, जहां भाजपा के नवीन कार्यालय के भूमि पूजन के बाद सिंधिया अपने समर्थकों के साथ निर्माणाधीन एलिवेटेड कॉरिडोर पर पहुंचे। वहां पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने कट्टर समर्थक प्रद्युमन सिंह तोमर, मोहन सिंह राठौर और तुलसी सिलावट के साथ सड़क पर बैठकर एक फोटो खिंचवाई, जो इस समय जमकर वायरल हो रही है और लोग इस फोटो पर तरह तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इस फोटो में कुछ न कुछ गहरा संदेश नजर आ रहा है। यह संदेश बहुत गहरा है, इसलिए यह एक कोई सामान्य फोटो नहीं, यह वह फोटो है जो इतिहास रच सकता है और भविष्य बदल सकता है।
आपको बता दें कि जब मध्यप्रदेश में लंबे अंतराल के बाद कांग्रेस की सरकार आई थी और कमलनाथ मुख्यमंत्री बने थे, तो कमलनाथ से मतभेद के चलते ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सड़क पर उतरने तक की बात कह दी थी और उस समय ज्योतिरादित्य सिंधिया की सड़क पर उतरने की बात को कमलनाथ सरकार ने हल्के में लिया था और उसका नतीजा यह हुआ कि ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी पूरी फौज के साथ कांग्रेस छोड़ भाजपा में आ गए। और मध्यप्रदेश में भाजपा जहां मजबूत हुई तो कांग्रेस पूरी तरह कमजोर हो गई। ज्योतिरादित्य सिंधिया इस सेना में एक बात बहुत खास है के तमाम सैनिक और स्पेशलार मजबूती से सिंधिया के साथ खड़े रहते हैं और जहां पाला बदलने की उम्मीद है ना के बराबर होती हैं। जो समर्थक सिंधिया के साथ भाजपा में आए थे वह आज भी खुद को भाजपाई की बजाय सिंधिया समर्थक कहते हैं।
ज्योतिरादित्य सिंधिया का अपने समर्थकों के साथ सड़क पर बैठा यह फोटो बहुत कुछ बयां कर रहा है। अभी हाल ही में भाजपा में नियुक्तियों को लेकर और निगम मंडलों के अध्यक्ष की नियुक्तियों को लेकर भाजपा की अंदरूनी कलह किसी से छुपी नहीं है। कई राजनीतिक विश्लेषकों ने खुलकर कहा कि सिंधिया की वजह से ही मंडल में नियुक्ति की सूची अटकी हुई है। ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने छह समर्थकों को कहीं न कहीं सेट कराने की बात पर अड़े हुए हैं, जिनमें मुन्नालाल गोयल, इमरती देवी जैसे प्रमुख नाम हैं। यह बात भाजपा भली भांति जानती है कि सिंधिया झुकते नहीं हैं, चाहे उन्हें सड़क पर उतरना पड़े। जिस तरह से सिंधिया ने अपने समर्थकों के साथ सड़क पर बैठकर फोटो खिंचवाई है और यह फोटो वायरल हो रही है।इस फोटो को देखकर यह कयास भी लगाए जा रहे हैं कि यह कहीं ना कहीं भाजपा को एक अप्रत्यक्ष चेतावनी है।

भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा में प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर धार जिले के बदनावर विधानसभा क्षेत्र से जय सूर्या की नियुक्ति को लेकर पार्टी के अंदर सियासी तकरार बढ़ गई है। पूर्व मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव ने इस नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए इसे “शुभ संकेत नहीं” बताया है। राजवर्धन सिंह दत्तीगांव ने शुभकामनाएं देते हुए कटाक्ष किया कि “यह शुभ संदेश नहीं है”। उन्होंने भाजपा के सिद्धांतों, दीनदयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विचारधारा का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी को स्वच्छ छवि और अनुशासन बनाए रखना चाहिए। अब सवाल यह है कि भाजपा का उच्च नेतृत्व इस विवादित नियुक्ति पर दोबारा विचार करेगा या अंदरूनी विरोध के बावजूद फैसले पर कायम रहेगा। आपको बता दें कि डट्टी गांव सिंधिया के कट्टर समर्थक हैं और दो हजार बीस में कमलनाथ की सरकार छोड़कर वे भी सिंधिया के साथ भाजपा में शामिल हुए थे।
राजवर्धन सिंह दत्ती गांव का यह उदाहरण इसलिए दे रहा हूं कि सिंधिया के जो भी समर्थक मध्यप्रदेश में जहां भी सक्रिय हैं, वह भाजपा को दूसरे दर्जे पर रखते हैं और सिंधिया को न केवल प्रथम पायदान पर रखते हैं, बल्कि सिंधिया को ही अपना इष्ट और पूज्य मानते हैं। और यही समर्थक सिंधिया की सबसे बड़ी ताकत है और जब समर्थक इतने कट्टर हों और सिंधिया के लिए किसी भी बात बढ़ने को तैयार हो, तो फिर यदि सिंधिया भी तमाम नियुक्तियों में अपने समर्थकों को लाभ दिलाना चाहते हैं, तो निश्चित ही वह ऐसे समर्थकों के लिए किसी भी हद तक अड़ सकते हैं। अपने समर्थकों के साथ सड़क पर बैठकर फोटो खिंचाकर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने साफ संदेश दे दिया है और शायद इस फोटो में यही संदेश छुपा है कि उसूलों पर आंच आए तो टकराना जरूरी है। अब देखना होगा कि यह फोटो अपेक्षित परिणाम सिंधिया खेमे को दे पाने में कितना सफल होता है?
