ग्वालियर व्यापार मेला जिसका पूरा नाम श्रीमंत कैलाशवासी माधवराव सिंधिया व्यापार मेला है। नाम यह इसलिए है क्योंकि यह मेला सिंधिया परिवार द्वारा ही शुरू किया गया। माधव राव सिंधिया प्रथम जिन्हें माधव महाराज के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने अपने शासन काल में क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए और पशुओं के क्रय विक्रय के लिए एक पशु मेले के रूप में इसकी शुरुआत सौ से भी अधिक वर्ष पूर्व 1905 में की थी। तब से वर्ष दर वर्ष यह मेला अपनी भव्यता की ओर बढ़ने लगा। और इस मेले को राष्ट्रीय पहचान देने का कार्य किया कैलाश वासी श्रीमंत माधव राव सिंधिया ने। जिन्होंने अन्य राज्यों के व्यापारियों को भी यहां आकर व्यापार करने के लिए आमंत्रित किया और साथ ही ग्वालियर व्यापार मेला में ऑटोमोबाइल सेक्टर के क्षेत्र में एक क्रान्तिकारी कदम उठाते हुए यहां से बेचे जाने वाली सभी वाहनों पर रोड टैक्स में पचास प्रतिशत का छूट ग्राहकों को लाभ के रूप में देने की शुरुआत की। इसके साथ ही ग्वालियर व्यापार मेला ने एक इतिहास रच दिया और वह देश का एकमात्र ऐसा मेला बन गया जहां इस तरह का लाभ वाहन खरीदने पर ग्राहकों को मिलता रहा।
लेकिन दिग्विजय सिंह के शासन के अंत के साथ ही वर्ष दो हजार तीन से ग्वालियर मेले का संक्रमण काल भी शुरू हो गया। धीरे धीरे मेला सिकुड़ने लगा और मध्य प्रदेश में काबिज हुई भाजपा सरकार ने ग्वालियर मेला में वाहनों के क्रय विक्रय पर दी जाने वाली रोड टैक्स छूट को खत्म कर दिया।हर साल तमाम प्रयास किए गए लेकिन मध्यप्रदेश शासन ने इस मेले को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया मानो कि उनकी मंशा यही हो कि किसी भी तरीके से इस मेले को खत्म कर देना है इसका वैभव खत्म कर देना है। और यही कारण रहा कि जब तक भाजपा का शासन रहा तब तक ग्वालियर व्यापार मेला में यह छूट नहीं मिली और बीच में जैसे ही पन्द्रह महीने के लिए कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी इस मेले को वैभव दिलाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ग्वालियर मेला के उद्घाटन करते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने यहां पचास पर्सेंट रोड टैक्स छूट वाहनों पर फिर से देने की घोषणा कर दी। और ग्वालियर व्यापार मेला ने फिर से नए कीर्तिमान स्थापित करना शुरू कर दिया।
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इसके बाद मध्यप्रदेश में तख्ता पलट हुआ और भाजपा फिर से शासन में आ गई लेकिन इस बार ज्योतिरादित्य सिंधिया भी भाजपा में शामिल थे और जब आगे मेले का आयोजन हुआ तो ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रयास से ग्वालियर मेला को हर साल रोड टैक्स में यह छूट फिर से मिलने लगी। पिछले विधानसभा चुनाव फिर से भाजपा के जीतने पर डॉ॰ मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाया गया। डॉ मोहन यादव जब ग्वालियर मेला पहुंचे और उनको यह जानकारी मिली कि ग्वालियर मेला भव्य है उसकी एक ऐतिहासिक पहचान है और पूरे देश में उसे इस बात के लिए जाना जाता है कि वह एकमात्र ऐसा मेला है जहां वाहनों पर पचास पर्सेंट की रोड टैक्स छूट दी जाती है। तो उन्होंने ग्वालियर मेला को यह छूट दिए जाने के साथ साथ उज्जैन मेला को भी यह छूट देने की घोषणा कर दी। इस तरह उन्होंने जो पहचान ग्वालियर मेला की थी वही पहचान उज्जैन मेला को भी दिला दी।
तभी से ऐसे कयास लगाए जाने लगे थे कि ग्वालियर व्यापार मेला जिसका पूरा नाम श्रीमंत कैलाशवासी माधव राव सिंधिया व्यापार मेला है को डॉक्टर मोहन यादव का ग्रहण लगने लगा और यह बात हर साल उस समय अब देखने को मिलती है जब ग्वालियर का मेला सज जाता है और ग्वालियर के ऑटोमोबाइल सेक्टर के व्यापारी वाहनों पर मिलने वाली रोड टैक्स छूट का इंतजार करते रहते हैं। आपको बता दें कि ग्वालियर का मेला बीस दिसंबर से शुरू होता है जबकि उसका उद्घाटन करते करते जनवरी आ जाती है। हालांकि इस वर्ष केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के आगमन पर पच्चीस दिसंबर को ही मेले का उद्घाटन कर दिया गया था जबकि मेला की तैयारी अधूरी थी और वाहनों पर मिलने वाले टैक्स छूट की घोषणा भी नहीं हुई थी।
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अभी हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट बैठक में ग्वालियर और उज्जैन मेला के लिए वाहनों पर रोड टैक्स के छूट की घोषणा एक साथ की गई है। लेकिन इस घोषणा में यह साफ नजर आ रहा है कि उज्जैन मेला आयोजित होने से पहले ही छूट की घोषणा से वहां सभी कार्य व्यवस्थित होंगे जबकि ग्वालियर व्यापार मेला में लगभग एक महीने तक व्यापारी संशय की स्थिति में रहे। यदि मेला उद्घाटन तिथि से भी लें जो 25 दिसंबर रही तो अब तक लगभग 19 दिन हो चुके हैं और इस घोषणा के बाद यह लागू भी दो दिन बाद होगी। इसका मतलब कि ग्वालियर मेला उद्घाटन के इक्कीस दिन बाद ग्वालियर में ऑटोमोबाइल विक्रेताओं को और इस क्षेत्र के ग्राहकों को वाहनों पर पचास पर्सेंट रोड टैक्स छूट का लाभ मिलेगा जबकि उज्जैन मेला में यह लाभ पहले दिन से ही मिलेगा।
डॉ मोहन यादव ने पहले तो उज्जैन मेला को भी यह छूट देकर ग्वालियर मेला की जो एकमात्र पहचान थी उसे छील दिया और अब हर वर्ष उनकी कैबिनेट द्वारा यहां दी जाने वाली छूट में लेट लतीफी जिस तरह से की जाती है उससे ऐसा प्रतीत होता है कि वह ग्वालियर मेला का महत्व कम करके उज्जैन मेला।का महत्व बढ़ाना चाहते हैं। ग्वालियर के व्यापारियों और यहां के नागरिकों को इस बात से कोई गुरेज नहीं होगा कि उज्जैन मेला भी आगे बढ़े लेकिन जिस तरह से ग्वालियर मेला पर सरकार की वक्र दृष्टि है और यहां का मेला घोषणाओं की लेट लतीफी से अपना वैभव खो रहा है।वह कहीं न कहीं एक चिंता का विषय है। ज्योतिरादित्य सिंधिया केन्द्र में मंत्री हैं और उनका अपना एक प्रभाव और दबाव है जिसके चलते देर से ही सही लेकिन ग्वालियर मेला के लिए रोड टैक्स छूट की घोषणा हो जाती है। अन्यथा तो ऐसा प्रतीत होता है कि प्रदेश में भाजपा सरकार ने पहले जिस तरह से मेले को लगभग खत्म सा कर दिया था अभी भी शायद उनका यही प्रयास रहता है और डॉक्टर मोहन यादव जिस तरह से हर साल इस छूट में लेट लतीफी करते हैं। वह साफ बताता है कि मुख्यमंत्री का ध्यान ग्वालियर मेले को दरकिनार करते हुए उज्जैन मेले पर अधिक है।
संपादक गजेंद्र इंगले द्वारा विशेष आलेख
