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लैंड पूलिंग मामले में मोहन सरकार के विरोध में उतरे भाजपा विधायक अनिल जैन

वरिष्ठ भाजपा नेतृत्व को लिखे पत्र में अनिल जैन ने लिखा है कि 17 नवंबर को शासन किसान संघ और जनप्रतिनिधियों की बैठक में लैंड पूलिंग एक्ट खत्म करने को लेकर निर्णय लिया गया था लेकिन उस पर अभी तक अमल नहीं हुआ है।

भोपाल मध्य प्रदेश: मध्यप्रदेश में भाजपा भले ही लंबे समय से सत्ता में हो लेकिन इसके बावजूद कहीं न कहीं अंदरूनी गुटबाजी किसी न किसी मुद्दे पर सामने आ ही जाती है।भाजपा में ऐसे कई कद्दावर नेता हैं या विधायक हैं जो कई बार प्रदेश सरकार की नीतियों का विरोध कर देते हैं और अब ऐसा ही मामला निकल कर आ रहा है।उज्जैन से जहां सिंहस्थ से पहले लैंड पूलिंग को लेकर चल रहे विवाद में एक नया मोड़ आ गया है। उज्जैन।उत्तर से भाजपा विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा अब खुलकर अपनी ही सरकार के विरोध में उतर आए हैं। और उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में सरकार के विरोध की घोषणा तक कर दी है।

उज्जैन। उत्तर विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा लैंड पूलिंग के समर्थन में नहीं हैं। वह किसानों के हितों को देखते हुए लैंड पूलिंग का विरोध कर रहे हैं। उनका साफ कहना है कि यदि लैंड पूलिंग वापस नहीं हुआ तो वह किसानों के साथ आंदोलन के लिए सड़कों पर भी उतरेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि इस मामले में उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और संगठन मंत्री हितानन्द शर्मा को पत्र लिखकर वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया है। प्रदेश में भाजपा सरकार है और भाजपा के ही विधायक अनिल जैन द्वारा अपने सरकार की नीति का ही इस तरह खुलकर विरोध करने से मध्यप्रदेश में राजनीति गर्म।भाजपा में अंदर ही अंदर खलबली मची हुई है।

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आपको बता दें कि इस मामले में अनिल जैन भी पलटी मारते हुए दिखाई दे रहे हैं क्योंकि इसी वर्ष मार्च के महीने में उन्होंने लैंड पूलिंग का समर्थन किया था। उन्होंने इसे विधानसभा का विकास बताया था और पूरी तरह से लैंड पूलिंग के समर्थन में बयान दिए थे। और अब अचानक उन्हें लैंड पूलिंग में इतनी खामियां नजर आ गई हैं कि अब उनका साफ कहना है कि यदि लैंड पूलिंग एक्ट खत्म नहीं हुआ तो किसानों के आंदोलन में शामिल होने के लिए वह विवश हैं। लेकिन इस बात की जानकारी नहीं मिली है कि नौ महीने में अचानक ऐसा क्या बदल गया कि भाजपा विधायक अनिल जैन के सुर भी बदल गए।

वरिष्ठ भाजपा नेतृत्व को लिखे पत्र में अनिल जैन ने लिखा है कि 17 नवंबर को शासन किसान संघ और जनप्रतिनिधियों की बैठक में लैंड पूलिंग एक्ट खत्म करने को लेकर निर्णय लिया गया था लेकिन उस पर अभी तक अमल नहीं हुआ है। उन्होंने साफ किया कि यदि फैसला लागू किया गया तो छब्बीस दिसंबर को भारतीय किसान संघ के घेरा डालो डेरा डालो आंदोलन में वे भी शामिल होंगे। आलैंड पूलिंग एक्ट के मामले में अनिल जैन के विरोध के चलते पूरे प्रदेश की भाजपा में इस बात को लेकर खलबिली मची हुई है और इस खलबली की बड़ी वजह यह भी है कि अनिल जैन प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के करीबी भी माने जाते हैं।अब मुख्यमंत्री के करीब होने के बावजूद भी ऐसी क्या उनकी मजबूरी रही होगी कि उन्हें अपनी सरकार का विरोध करना पड़ रहा है?

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Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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