एप्पल का मोबाइल आईफोन अपने बेहतर तकनीक के लिए जाना जाता है और हमेशा अपग्रेड के साथ नए नए फ़ोन बाज़ार में लॉन्च होते हैं। 19 सितंबर को शुरू हुई और उन्नीस सितंबर को भारत के लगभग सभी शहरों के आईफोन आउटलेट्स पर जो दृश्य दिखा वह हैरान करने वाला था। शुक्रवार उन्नीस सितंबर को जैसे ही भोर हुई युवा दौड़ लगाकर एप्पल स्टोर्स के बाहर पहुंच गए और कई जगह पर लंबी लंबी कतारें लग गई। कई जगह पर असहज स्थिति भी बनी। कई जगह पर आपस में मारपीट तक हुई।मुंबई के एक एप्पल स्टोर पर पुलिस को स्थिति सुधारनी पड़ी। हजारों की संख्या में यह युवा जिस तरह आईफोन खरीदने के लिए कतारों में लग गए यह चिंताजनक है।
आपको बता दें कि आईफोन सेवनटीन 9 सितंबर को लॉन्च हुआ था और भारत में इसकी बिक्री 19 सितंबर को शुरू हुई इनकी बिक्री केवल महानगरों के एप्पल स्टोर्स से ही की गई मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु के युवाओं में आईफोन को लेकर एक अजीब तरह की दीवानगी देखने को मिली। कई स्टोर्स पर तो आस-पास के 200 /300 km दूर के शहरों के युवा भी एक दिन पहले ही इन शहरों में पहुंच गए ताकि आईफोन खरीद सके। यह वह युवा थे जो किसी भी हद तक जाकर आईफोन खरीदना चाहते थे। हो सकता है आईफोन सेवनटीन में ऐसी तमाम खूबियां हैं जो इस समय उपलब्ध अन्य फ़ोन में नहीं हैं। लेकिन लॉन्च वाले दिन ही बिक्री के पहले दिन ही इस तरह की भीड़ इस तरह की लंबी लंबी कतारें और युवाओं में इस स्तर का खरीदने का क्रेज कहीं न कहीं बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
सवाल यह है कि जो युवा नौकरी के लिए फॉर्म भरते समय थोड़ी भी कतार का विरोध करते नजर आते हैं। व्यवस्था को कोसते नजर आते हैं। उन्हें हर चीज़ घर बैठे ऑनलाइन उनके बिस्तर पर उनके सोफे पर मिल जाए। ऐसी सोच जिन युवाओं की बन चुकी हो वह युवा एक फोन के लिए घंटों तक लाइन में लगे रहे तो क्या इसे हम एक सामान्य स्थिति कहेंगे? ऐसे तमाम युवा हैं जो आज भोर के समय जल्दी सुबह उठते तक नहीं हैं। उनकी सुबह ही आठ नौ दस बजे तक होती है। रात में देर से सोना जिनके लिए एक न्यू नॉर्मल बन चुका है ऐसे युवा भोर होने से पहले ही एप्पल स्टोर्स के बाहर लंबी कतारों में जाकर लग जाते हैं। ( द इंगलेज पोस्ट) क्या इसे एक सामान्य स्थिति कहेंगे? जो युवा आज कॉरपोरेट कल्चर में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें अपने निजी पारिवारिक संबंध निभाने मित्रता निभाने और कई छोटे कार्यों के लिए कुछ मिनट की फुर्सत नहीं मिलती।यदि वह बीस घंटे लाइन में लगे रहे केवल एक मोबाइल खरीदने के लिए तो क्या इसे हम सामान्य स्थिति कहेंगे?
मुंबई के बांद्रा कोला कॉम्प्लेक्स में स्थित एप्पल का जियो वर्ल्ड ड्राइव मॉल पूरे देश में सुर्खियों में रहा।यहां युवाओं की सबसे ज्यादा भीड़ देखी गई । देश के अन्य एप्पल स्टोर्स पर भी भीड़ थी लेकिन जिस तरह की अफरा तफरी हाथापाई और झगड़े यहां नजर आए वह चौंकाने वाले थे। एप्पल खरीदने की होड़ में मानवता को तार तार करते हुए यह युवा नजर आए। हालात यह हो गए कि हाथापाई और मारपीट की स्थिति इतनी भयावह हो गई कि इसे काबू करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया लेकिन पुलिस भी इन युवाओं की आईफोन खरीदने की दीवानगी के आगे असहाय नजर आई। गनीमत रही कि कोई बड़ी घटना नहीं हुई।

जिस तरह का पागलपन युवाओं ने आईफोन 17 खरीदने के लिए दिखाया है वह कई बड़े सवाल खड़े करता है। इसे केवल दीवानगी कहना एक बड़ी भूल होगी। ( द इंगलेज पोस्ट) ऐसे तमाम युवा जिन्होंने आईफोन का नाम तो सुना है लेकिन यदि उनसे इसके फीचर्स तक पूछ लिए जाएं तो उन्हें नहीं पता।आज के तमाम युवा ऐसे भी हैं जो कोई भी मोबाइल यूज करते हैं उसके आधे फीचर तो उपयोग तक नहीं करते आई जो अन्य मोबाइल कंपनी उपलब्ध करा रही है। लेकिन आईफोन को एक ब्रांड सिम्बल और एक स्टेटस सिंबल बना लेने के चलते इन युवाओं में एक नई एब नॉर्मलिटी (असामान्यता) पैदा हो गई है। और यकीन मानिए यह एब नॉर्मलिटी आईफोन खरीदने तक की ही सीमित नहीं है इसके बाद भी नजर आती है।
आईफोन रखने वाले युवा को एक अजीब तरह का सुपीरियलिटी कॉम्प्लेक्स पैदा हो जाता है। आईफोन खरीदने की यह दीवानगी केवल एक दिन तक सीमित नहीं है। इसका असर आगे पूरे जीवन में युवा भुगतता है और एक अजीब तरह की बीमारी से ग्रस्त होकर जीवन जीता है। जिस तरह का बीमारी का लक्षण इन्होंने मोबाइल खरीदने वाले दिन दिखाया उसके बाद कुछ दिनों तक यह अपने परिजनों को अपने दोस्तों को आईफोन दिखाते हुए उसके फीचर्स की बात करते हुए नजर आएंगे। अपने सोशल मीडिया पर डालते नजर आएंगे। और जब यह अपने आसपास के लोगों से मिलेंगे तो आईफोन दिखाकर खुद का स्टेटस का दंभ भरते हुए उनको नीचा दिखाते हुए भी नजर आएंगे। यकीन मानिए जिस तरह के दृश्य पूरे देश में देखने को मिले हैं वह भारत के युवाओं की एक नई बीमारी को साफ जाहिर कर रहे हैं। भारत के युवा आईफोन एडिक्शन से ग्रस्त हो चुके हैं….
[ गजेंद्र इंगले, संपादक इस आलेख के लेखक है]
