भोपाल मध्यप्रदेश: देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के सपनों को मध्यप्रदेश शिक्षा विभाग पिता लगातार नजर आ रहा है। जब छात्रों को डिजिटल शिक्षा ही नहीं मिलेगी तो वह डिजिटल इंडिया बनाने में अपनी भूमिका कैसे निभाएंगे? मध्य प्रदेश के तमाम स्कूलों के हालात यह हैं कि वहां कंप्यूटर तक नहीं है और जहां कंप्यूटर हैं। वहां कंप्यूटर शिक्षक नहीं हैं वहां कंप्यूटर शिक्षा नहीं दी जाती। इतने बदतर हालात में मध्य प्रदेश छात्रों को कैसे डिजिटल इंडिया का सपना पूर्ण करने में भागीदार बनाएगा। मतलब साफ है कि मध्य प्रदेश का शिक्षा विभाग न केवल छात्रों के भविष्य के साथ बल्कि प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया के सपने के साथ भी खिलवाड़ कर रहा है।
आपको बता दें कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है के पूरे भारत को डिजिटल प्लेटफार्म पर लाया जाए। हर क्षेत्र को डिजिटल इंडिया से जोड़ा जाए।हर नागरिक को डिजिटल शिक्षा मिले। आज के समय पर कई ऐसे काम हो गए हैं जो डिजिटली उपलब्ध हैं। आप केवल डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से सरकार की कई सुविधाओं को कई योजनाओं को न केवल देख सकते हैं बल्कि उनका लाभ भी ले सकते हैं। लेकिन डिजिटल प्लेटफार्म पर उपलब्ध इन सुविधाओं को प्राप्त करने के लिए आपका स्वयं का डिजिटल शिक्षित होना भी जरूरी है।कंप्यूटर शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार ने तमाम प्रयास किए हैं। लेकिन मध्य प्रदेश का स्कूल शिक्षा विभाग केवल कागजों पर कंप्यूटर शिक्षा देता नजर आ रहा है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की यूडाइस रिपोर्ट ने मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग की कंप्यूटर शिक्षा प्रणाली को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन द्वारा जारी 2024-25 की रिपोर्ट में जो कुछ सामने आया है वह मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग की बदहाली बयां कर रहा है। रिपोर्ट बताती है कि मध्यप्रदेश में स्कूलों की संख्या एक लाख बाईस हजार दो सौ है जिसमें से लगभग आधे स्कूल (59797) में कंप्यूटर हैं ही नहीं। 66255 स्कूल ऐसे हैं जिसमें इंटरनेट सुविधा ही नहीं है। और सबसे बड़ा चौंकाने वाला आंकड़ा है डिजिटल लाइब्रेरी का जो बताता है कि लगभग पंचानबे प्रतिशत से अधिक 119412 स्कूलों में तो डिजिटल लाइब्रेरी तक नहीं हैं। अब जहां माल ने कंप्यूटर हैं तो क्या वहां पर कंप्यूटर चलते हैं कंप्यूटर शिक्षक हैं इसको लेकर भी बड़ी चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। मध्य प्रदेश के लगभग पन्द्रह हजार स्कूलों में तो बिजली ही नहीं है। मतलब मध्यप्रदेश सरकार के दावों की पोल केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की यू डाइस रिपोर्ट खोल रही है।
अब आप ऊपर दिए गए आंकड़ों से ही समझिए कि मध्य प्रदेश के लगभग हजारों स्कूल किस तरह से डिजिटल इंडिया और कंप्यूटर शिक्षा के नाम पर कागज घोड़े दौड़ा रहे हैं किस तरह से यह हमारी आने वाली पीढ़ी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं किस तरह मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग यहां के बच्चों को डिजिटल शिक्षा से वंचित रख रहा है? क्योंकि यह आंकड़े किसी निजी संस्थान के या किसी मीडिया हाउस के नहीं हैं बल्कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के हैं और जब केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की यह आंकड़े हैं तो हो सकता है कि जमीनी स्तर पर हालात इससे भी ज्यादा भयावह हों। अब सवाल यह उठता है कि जब कंप्यूटर शिक्षा की हकीकत मध्यप्रदेश में यह है तो करोड़ों रुपये का बजट को कौन डकार जाता है? कौन भ्रष्टाचारी दानव हैं जो देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के महत्वाकांक्षी योजना को पलीता लगा रहे हैं?
