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दलित को कुर्सी देने सवर्ण की कुर्सी छीनी, भवन विकास निगम मे भेदभाव का ग़ज़ब कारनामा

अतिरिक्त महाप्रबंधक ने अपने वरिष्ठों के निर्देश अनुसार 18 अगस्त को एक आदेश जारी कर दिया जिसमें उन्होंने सतीश डोंगरे  को कक्ष क्रमांक दो आवंटित कर दिया। कक्ष क्रमांक दो पहले से ही जब अक्षय गुप्ता सहायक महाप्रबंधक को आवंटित है तो अब यदि सतीश डोंगरे यहां पर बैठने लगेंगे तो फिर अक्षय गुप्ता कहां बैठेंगे।

ग्वालियर मध्य प्रदेश: ग्वालियर में स्थित मध्य प्रदेश शासन के भवन विकास निगम की हालत यह है कि इस विभाग का ग्वालियर कार्यालय मध्यप्रदेश। के विकास की पोल खोलता नजर आ रहा है। भवन विकास निगम का कार्यालय खोला गया कर्मचारियों को नियुक्त किया गया लेकिन विभाग की बदहाली का हालत यह रहा कि यहां पर सहायक महा प्रबंधक सतीश कुमार डोंगरे तक को बैठने व कार्य करने के लिए न तो कक्ष मिला और न ही कुर्सी और टेबल। और ऐसा कुछ दिन नहीं कुछ महीने नहीं सतीश डोंगरे की मानें तो पिछले डेढ़ साल से इसी तरह जमीन पर बैठकर काम कर रहे हैं। लेकिन अब तो विभाग ने जो किया है वह और भी ज्यादा चौंकाने वाला है।

आपको बता दें कि कुछ दिन पहले ही द इंगलेज पोस्ट ने सहायक महाप्रबंधक सतीश डोंगरे के जमीन पर बैठकर काम करने की खबर को प्रमुखता से दिखाया था। उस समय सतीश डोंगरे ने विभाग पर जातिगत भेदभाव के तक आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि वह आदिवासी हैं इस वजह से उनके साथ भेदभाव किया जाता है और विभाग उनको। कुर्सी टेबल और कक्ष उपलब्ध नहीं करा रहा है कक्ष? तो छोड़िए किसी कक्ष में कुर्सी टेबल तक उनको नहीं दिए गए हैं। उनका कहना था कि 1 1/2 साल से वे इसी तरह जमीन पर बैठ कर काम कर रहे हैं। जब कोई बाहर से आता है तो शुरू में उन्हें शर्मिंदगी होती थी लेकिन अब यह उनकी मजबूरी बन चुकी है। 

जब सतीश डोंगरे के जमीन पर बैठने की खबरें प्रसारित हुई तो मध्य प्रदेश भवन विकास निगम की किरकिरी होने लगी और इस किरकिरी से बचने के लिए विभाग ने सतीश डोंगरे। को कुर्सी टेबल तो उपलब्ध नहीं कराया बल्कि एक ऐसा फरमान जारी कर दिया जो चौंकाने वाला है। मध्यप्रदेश भवन विकास निगम के ग्वालियर कार्यालय में सतीश डोंगरे। के ही समकक्ष अक्षय गुप्ता भी सहायक महाप्रबंधक। हैं जिनको कक्ष क्रमांक दो मिला हुआ है जिसमें उनके लिए एक रिवॉल्विंग कुर्सी और टेबल है जिस पर बैठकर वह काम करते हैं। लेकिन अतिरिक्त महाप्रबंधक ने अपने वरिष्ठों के निर्देश अनुसार 18 अगस्त को एक आदेश जारी कर दिया जिसमें उन्होंने सतीश डोंगरे  को कक्ष क्रमांक दो आवंटित कर दिया। 

लेकिन कक्ष क्रमांक दो पहले से ही जब अक्षय गुप्ता सहायक महाप्रबंधक को आवंटित है तो अब यदि सतीश डोंगरे यहां पर बैठने लगेंगे तो फिर अक्षय गुप्ता कहां बैठेंगे। मतलब साफ है की खबरें चलने पर किरकिरी होने पर मध्य प्रदेश भवन विकास निगम ने एक आदिवासी के लिए एक स्वर्ण की कुर्सी टेबल छीन ली। अब इसे जातिगत भेदभाव कहें या कहें कि मध्य प्रदेश भवन विकास निगम का विकास इस तरह पगला गया है उल जलूल आदेश जारी कर रहा है। इस पूरे मामले में हमने सतीश डोंगरे से उनके मोबाइल पर चर्चा की तो उन्होंने साफ कहा कि मैं अपने समकक्ष व्यक्ति का अधिकार कैसे छीन सकता हूं। इसलिए मैंने उस पत्र का जवाब दिया है कि उक्त कक्ष क्रमांक दो मेरे समकक्ष अक्षय गुप्ता को आवंटित है। मीडिया में खबरें प्रकाशित होने के कारण आनन फानन में मेरे साथी का फर्नीचर मुझे दिया जा रहा है जिसके कारण अब तक जो अब सुविधा मुझे हुई है अब मेरे समकक्ष अक्षय गुप्ता को होगी। 

मध्य प्रदेश भवन विकास निगम ग्वालियर कार्यालय से सतीश डोंगरे को कुर्सी टेबल उपलब्ध कराने के लिए पहला पत्र तेईस मार्च दो हजार चौबीस को लिखा गया था। उसके बाद भी तमाम अन्य पत्र लिखे गये हैं। इसके बावजूद भी पूरे प्रदेश के भवनों के विकास का ठेका लेने वाला विभाग इतना भी विकसित नहीं हो पाया कि अपने ही एक अधिकारी को कुर्सी टेबल उपलब्ध करा पाए और यहां अव्यवस्था का आलम यह है की एक और खंडवा जिले के मध्य प्रदेश भवन विकास निगम कार्यालय में इतना फर्नीचर है। जो फालतू कवारा हो रहा है सतीश डोंगरे बताते हैं के उनके सहयोगी ने बताया है कि खंडवा में आवश्यकता से चार गुना अधिक फर्नीचर भेजा गया है। 

मध्यप्रदेश भवन विकास निगम ग्वालियर में सहायक सहायक महाप्रबंधक सतीश डोंगरे डेढ़ वर्ष से जो कष्ट भोग रहे हैं वह नहीं चाहते कि उनके समकक्ष दूसरे साथी अक्षय गुप्ता वह कष्ट भोगें। इसलिए वह यह नहीं चाहते कि किसी और का हक छीनकर उनको। दिया जाए मतलब साफ है कि उनकी नीयत। किसी तरह का जातिगत भेदभाव करने की नहीं है वे नहीं चाहते के उन्हें किसी और की कुर्सी टेबल और कक्ष दिया जाए। लेकिन मध्यप्रदेश भवन विकास निगम अजीबो गरीब फरमान सुनाकर जातिगत भेदभाव फैलाने पर आमादा है। पहले विभाग ने अपने ही एक आदिवासी अधिकारी को कुर्सी टेबल नहीं दी जो डेढ़ साल से प्रताड़ित है और अब विभाग ने एक सवर्ण अधिकारी की कुर्सी टेबल और कक्ष छीनने का फरमान जारी कर दिया। जो विभाग सही निर्णय लेने की क्षमता नहीं रख रहा है वह मध्यप्रदेश। के भवनों का विकास कैसे करेगा अब आप यह समझ सकते हैं। 

Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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