डिजिटल डेस्क: दक्षिण भारतीय अभिनेत्री मॉडल और मिस इंडिया 1994 की प्रतियोगी श्वेता मेनन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। 51 वर्षीय श्वेता पर अश्लील फिल्मों के जरिए पैसा कमाने का आरोप लगाया गया है। कोच्चि सेंट्रल पुलिस ने जन कार्यकर्ता मार्टिन मेनाचेरी की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया है। आईटी अधिनियम की धारा 67(ए) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। ऐसे तमाम विज्ञापन और उससे ज्यादा अपनी खुद की डिलीवरी का वीडियो दिखा कर श्वेता ने खूबसूरतियां बटोरी हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि श्वेता मेनन अभिनीत फिल्मों में अश्लील दृश्य हैं। शिकायतकर्ता ने ‘पलेरी माणिक्यम’, ‘रथिनिरवेदम’ और ‘कालीमन्नु’ का हवाला दिया, जिनमें श्वेता मेनन का प्रसव और गर्भनिरोधक कंडोम का एक विज्ञापन दिखाया गया था। ये वे फिल्में हैं जिन्हें सेंसर बोर्ड द्वारा प्रमाणित किया गया है और ये अभी भी जनता के लिए उपलब्ध हैं। शिकायत में कहा गया है कि ये फिल्में सोशल मीडिया और पोर्न साइट्स पर प्रसारित की जा रही हैं। अब सवाल यह उठता है कि यदि यह फिल्में और विज्ञापन इतने ही उसने थे तो सेंसर कोर्ट ने प्रमाणिक कैसे कर दिया।
शुरुआत में पुलिस ने इस शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया लेकिन शिकायतकर्ता यह शिकायत लेकर कोर्ट पहले पहुंच गया। शिकायतकर्ता ने एर्नाकुलम में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में शिकायत दर्ज कराई। और वहां से अदालत के निर्देशानुसार, मामले को केंद्रीय पुलिस के पास ले गया। एफआईआर में कहा गया है कि नग्न दृश्य सोशल मीडिया और पोर्न साइटों पर प्रसारित किए गए थे। शिकायतकर्ता ने श्वेता मेनन अभिनीत मलयालम फिल्मों और गर्भनिरोधक कंडोम के एक विज्ञापन का हवाला दिया है।
हालांकि केरल उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को श्वेता मेनन के खिलाफ दर्ज एफ आई आर के संबंध में कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें मेनन पर उनकी कुछ पिछली फिल्मों और विज्ञापनों के अश्लील दृश्यों को कथित तौर पर प्रकाशित या प्रसारित करने का आरोप है। न्यायमूर्ति वी जी अरुण ने अभिनेत्री द्वारा अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने के लिए दायर याचिका पर यह आदेश दिया। उच्च न्यायालय ने कहा कि अभिनेत्री के वकील की इस दलील में प्रथम दृष्टया दम है कि शिकायत को जांच के लिए भेजने से पहले पुलिस से रिपोर्ट मांगने और जांच करने की आवश्यकताओं का पालन किया जाना चाहिए था।

