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दतिया के जज को सुप्रीम फटकार, जिसे आदेश की समझ नहीं वह जज पद पर रहने लायक नहीं

डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: दतिया में पदस्थ अतिरिक्त सेशन जज उत्सव चतुर्वेदी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश को हल्के में लेना भारी पड़ गया। इस पूरे मामले में न केवल उनकी किरकिरी हुई बल्कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट के सामने उपस्थित भी होना पड़ा और वह सब कुछ सुनना पड़ा जिसकी उन्होंने अपेक्षा भी न की हो। पूरा मामला मध्य प्रदेश के ग्वालियर ईडब्ल्यू विभाग से जुड़ा हुआ है जहां दर्ज दतिया के एक मामले की सुनवाई के दौरान अभियुक्त को जमानत नहीं मिली तो अभियुक्त ने वकील के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट की शरण ली। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत के लिए जो आदेश दिया उस आदेश का स्पष्टीकरण लाने के लिए दतिया एडिशनल सेशन जज ने अभियुक्त की वकील को कह दिया। 

दतिया के इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने वहाँ पदस्थ जज उत्सव चतुर्वेदी से स्पष्टीकरण मांगते हुए उन्हें सुप्रीम कोर्ट में ही तलब कर लिया। इस केस में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अभियुक्त गोविंद शरण श्रीवास्तव को जमानत दी गई थी। इसके बावजूद निचली अदालत से उन्हें रिहाई नहीं मिली थी जज उत्सव चतुर्वेदी ने है जमानत के लिए शर्त लगा दी और सुप्रीम कोर्ट से स्पष्टीकरण लाने के लिए कहा इसके बाद अभियुक्त गोविंद शरण के वकील जसवीर सिंह मलिक ने सुप्रीम। कोर्ट में नई अर्जी दाखिल करते हुए अपना आदेश स्पष्ट करने का अनुरोध किया सुप्रीम। कोर्ट ने दोबारा से आदेश पारित किया तब जाकर अभियुक्त गोविंद शरण को जमानत मिल पाई। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के पहले आदेश के बावजूद देढ महीने तक अभियुक्त। को जेल में रहना पड़ा। 

इस पूरे मामले को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया और उत्सव चतुर्वेदी को निजी तौर पर सुप्रीम कोर्ट में पेश होकर इस मामले में स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया और साथ ही मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को एडिशनल सेशन जज उत्सव चतुर्वेदी को एक सप्ताह के लिए। ट्रेनिंग पर भेजने के लिए भी कहा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जज उत्सव चतुर्वेदी सोमवार को जस्टिस असाहउद्दीन अमानुल्ला और जस्टिस एस वी एन भट्टी। कि युगल पीठ के समक्ष पेश हुए उन्होंने सुप्रीम। कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी और कहा गलती हो गई उनकी ओर से जूनियर वकील ने सीनियर। के उपलब्ध। न होने की बात कहते हुए कोर्ट की सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध भी किया लेकिन पीठ बहुत नाराज थी पीठ ने उत्सव चतुर्वेदी को सामने बुलाया और उन्हें जमकर फटकार लगाई। सख्त टिप्पणी करते हुए युगल पीठ ने कहा आप अभी तक नौकरी में हैं क्यों न आपको यहीं बर्खास्त कर दिया जाए? आपको नहीं मालूम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान कैसे करते हैं?आपको न्यायिक आदेश समझ नहीं आता? 

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ही युगल पीठ ने जज द्वारा बिना शर्त माफी मांगे जाने और वरिष्ठ वकील के न होने के कारण सुनवाई को स्थगित करने की मांग को स्वीकार कर लिया लेकिन साथ ही कोर्ट ने कहा की माफी के साथ दिल से पश्चाताप करने के लिए उन्हें। एक सप्ताह का और समय दिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद अभियुक्त। को डेढ़ महीने तक जेल में रहना पड़ा और इस पूरे मामले में सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही एक अतिरिक्त सेशन जज ने स्पष्टीकरण मांग लिया। अतिरिक्त सेशन जज उत्सव चतुर्वेदी पर अभी भी कार्रवाई की तलवार लटकी है क्योंकि इस मामले की अगली सुनवाई अट्ठाईस जुलाई को होनी है। 

Gajendra Ingle
Gajendra Inglehttp://theinglespost.com
The author is founder Editor of this news portal. He has long experience of journalism. He has deep expertise on political and social issues.
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