जब से मानसून मेहरबान हुआ है और हर दिन बारिश का आनंद ले रहे हैं, उसी के साथ आपकी एक परेशानी बड़ी है वह परेशानी है। शहर के हर गली मोहल्ले से लेकर कई मुख्य मार्ग पर हो जाने वाले गड्ढे और गड्ढे इतने ज्यादा हैं कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढे में सड़क है यह पहचान पाना भी कई क्षेत्रों में मुश्किल है। जी हां बात कर रहे हैं। ग्वालियर की। जिसको अब कुछ लोग गड्ढा लियर कहने लगे हैं क्यों की यहां सड़कों के गड्ढे? पूरे देश में अब इस शहर की पहचान बन चुके हैं अभी हाल ही में चेतक पुरी। रोड पर जो गड्ढे हुए थे उसके फोटो और वीडियो सोशल मीडिया के साथ-साथ पूरे देश के राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाओं का केंद्र रहे। और ग्वालियर कट्टेदार सड़कों के लिए पूरे देश में कुख्यात हो गया।
पिछले कुछ दिनों मैं आप कोई भी अखबार उठाकर देख लीजिए अखबार में आपको शहर के किसी न किसी क्षेत्र के गड्ढे वाली सड़कों की खबरें और जनता की उनसे परेशानी बताती सुर्खियां पढ़ने को मिल ही जाएंगी। सड़कों की हालत यह हैं कि शहर की रफ्तार थम चुकी है किस दूरी को कवर करने में किसी वाहन चालक को 10 मिनट लगते थे अब वह आधा घंटा ले रहा है। शहर के कई व्यस्त क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर से निकलना दुर्भर हो गया है। क्योंकि गड्ढे वाली सड़कों में वाहन रेंग रेंग कर चल रहे हैं। शहर का हृदय स्थल है। फूलबाग फूलवाग से आप चाहें पड़ाव की ओर चले जाएं चाहे नदी गेट। की ओर दोनों तरफ आँख को सड़क पर छोटे बड़े तमाम गड्ढे दिखाई देंगे 10 मीटर की रोड भी आपको गड्ढा मुक्त नहीं दिखाई देगी। ऐसी सड़क पर वाहन रेंगना मजबूरी है ओके थोड़ा सा गति देते ही वाहन चालक दुर्घटना का शिकार हो सकता है।
यहां आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि ऐसी तमाम सड़कों पर गड्ढे नजर आते हैं जिन पर पैच वर्क। का दावा नगर निगम करता है। , अब यदि नगर निगम ने पेचवर्क किया है तो सड़कों पर गड्ढे क्यों हैं या फिर नगर निगम का पैच वर्क घटिया स्तर का रहा हो या केवल फाइलों में हो गया हो इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे तमाम क्षेत्र हैं जहां कई दिनों से गड्ढे के बावजूद नगर निगम वहां गड्ढों को गिट्टी। मिट्टी या मुरम से भरवा नहीं पाया है। फूलबाग हो चाहे गोले का मंदिर चाहे सिटी। सेन्टर हो या मुरार हजीरा हो या पुरानी छावनी यह हो सिकंदर कंपुर ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहां सड़कें जर्जर न हो। सड़क में गड्ढे न हो। इस तरह देखें तो शहर के हर क्षेत्र में गड्ढे सड़क। की पहचान बन चुके हैं और यह वाहनों की नहीं शहर की रफ्तार को धीमा कर रहे हैं।
शहर की धीमी रफ्तार का कारण सड़क के यह गड्ढे हैं क्योंकि गड्ढों के नाम पर नगर निगम में जमकर लीपापोती और भ्रष्टाचार किया गया है। नगर निगम में भ्रष्टाचार कितनी सुपरफास्ट रफ्तार में है कि अब उसे रोक पाना मुश्किल नजर आ रहा है। जिस तरह से नगर निगम में घटिया सड़क निर्माण और उसके बाद पेंच वर्ग के नाम पर कागजी घोड़े दोड़ाए जाते हैं तो उन पर सबकी सहमति भी हो जाती है। वह साफ दर्शाता है के पूरे कुएं में भांग घुली हुई है। नगर निगम में आयुक्त से लेकर चपरासी तक भ्रष्टाचार की इस। तेज रफ्तार में लिप्त हूँ। इस बात की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। और भ्रष्टाचार की यह सुपर फ़ास्ट रफ़्तार माननीयों के संरक्षण के बिना तो संभव ही नहीं है।
शहर की खराब खस्ताहाल सड़कें और उन पर गड्ढे भ्रष्टाचार। की सुपरफास्ट रफ्तार का जीता जागता सबूत है और भ्रष्टाचार की सुपर फ़ास्ट रफ्तार का सबसे बड़ा सबूत है। चेतक पुरी रोड पर हुए गड्ढे उससे भी बड़ा सबूत है। उन गड्ढों पर की गई अब तक की कार्रवाई क्योंकि कितने बड़े कौतूहल की बात है कि इस सड़क की खबरें राष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित होने के बाद तमाम किरकिरी होने के बाद भी जांच के नाम पर लीपापोती की गई न। किसी जिम्मेदार अधिकारी पर एफआईआर की गई न ठेकेदार पर एफआईआर की गई और ना ही संबंधितों को बर्खास्त किया गया। कार्रवाई के नाम पर जांच की चादर के पीछे छुपाकर केवल कुछ इंजीनियर को निलंबित करके खाना पूर्ति कर ली गई और पूरे मामले को रफा दफा कर दिया गया जो साफ बताता है कि भ्रष्टाचार की सुपरफास्ट रफ्तार में संलिप्तता काफी ऊपर तक के जिम्मेदारों की है!
