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मतदाताओं को जूते-साड़ी का प्रसाद


चुनावों में मतदाता को यदि कुछ मिलता है तो उसे प्रलोभन कहना पाप है ,क्योंकि चुनावी मौसम में मतदाता के हिस्से में या तो प्रसाद आता है या फिर आंधी के आम। दिल्ली में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ चुनाव लड़ रहे भाजपा प्रत्याशी प्रवेश वर्मा के खिलाफ पुलिस ने मतदाताओं को जूते और साड़ियां बांटने का मामला दर्ज किया है ,मेरे हिसाब से ये अनुचित है। प्यार और जंग में ही नहीं बल्कि चुनावों में सब कुछ जायज है। मतदाता सूचियों में कटर-ब्योंत तक।
प्रवेश वर्मा कोई फकीर नहीं बल्कि अमीर नेता हैं । उनके पिता साहब सिंह वर्मा भी नेता थे लेकिन प्रवेश वर्मा अपने पिता से इतर अग्निमुखी हिन्दू नेता की छवि रखते है। वे अरवविंद केजरीवाल के खिलाफ ही नहीं कांग्रेस के सुशील के खिलाफ भी चुनाव लड़ रहे हैं। उनके पास इतना पैसा है कि वे मतदाताओं को जूते और साड़ियां बाँट सकते है। माघ मास में जबकि प्रयागराज में महाकुम्भ चल रहा है तब मतदाताओं के बीच दान-पुण्य करना कोई बुरी बात नहीं है,लेकिन उनके प्रतिद्व्न्दी दिल जले हैं। चुनाव आयोग के पास पहुँच गए शिकायत लेकर और दायर करा दिया मुकदमा।

केजरीवाल के राज में ही प्रवेश वर्मा की आय चार साल में कई गुना बढ़ गई है। 2019 से लेकर 2020 में आयकर रिटर्न के मामले में प्रवेश वर्मा ने 92 लाख 94 हजार 980 रुपये आय बताई थी। जोकि अब 19 करोड़ 68 लाख 34 हजार 100 रुपये दर्ज की गई है। वहीं,प्रवेश वर्मा की पत्नी की भी आय बढ़ी है। पहले 5 लाख 35 हजार 570 रुपये थी, जोकि 2023-2024 में बढ़कर 91 लाख 99 हजार 560 रुपये दर्ज की गई है। इसलिए प्रवेश को ये हक बनता है कि वे अपने मतदाताओं को जो चाहें सो दें ,उनका हाथ पकड़ना पाप है। केजरीवाल और संदीप दीक्षित जी को किसने रोका है दान-पुण्य करने से ? प्रवेश वर्मा ने चुनाव से पहले जूते, साड़ी, कंबल और पैसे बांटने के आरोपों को खारिज कर दिया। वर्मा ने कहा कि ये आरोप अरविंद केजरीवाल ने हार के डर से लगाए हैं।

प्रवेश वर्मा हालांकि दिल्ली को अपनी माँ कहते हैं लेकिन आम आदमी पार्टी उन्हें भाजपा की और से दिल्ली का दूल्हा कहती है। भाजपा पिछले दस साल से दिल्ली के लिए दूल्हे सजाकर लाती है किन्तु दिल्ली की जनता भाजपा की बारात बैरंग लौटा देती है ,लेकिन इस बार भाजपा मप्र,राजस्थान,छग,हरियाणा और महाराष्ट्र जीतने के बाद हर सूरत में दिल्ली को अपना दूल्हा देने पर आमादा है ,और इसीलिए भाजपा जूतों और साड़ियों पर उत्तर आई है। भाजपा अभी और नीचे भी जा सकती है क्योंकि भाजपा को गहरे पानी में उतर कर मोती बीनने की आदत पड़ चुकी है । प्रधानमंत्री मोदी जी के ताज में यही एक मोती लगना बाक़ी है।

कांग्रेस ने इस चुनाव में अपना दूल्हा पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पुत्र संदीप दीक्षित को बनाया है। वे अपनी माँ की पराजय का बदला लेना चाहते हैं। कोई उन्हें रोक नहीं सकता सिवाय दिल्ली की जनता के। मुमकिन है कि दीक्षित जी के पास मतदाताओं को देने के लिए जूतों और साड़ियों का प्रसाद न हो इसलिए वे निराश नजर आ रहे हों ,क्योंकि आम आदमी पार्टी के पास चूंकि सत्ता है इसलिए वो यदि मतदाताओं को केवल वादे ही बाँट दे तो उसका काम चल जाएगा ,लेकिन प्रवेश वर्मा और संदीप दीक्षित को तो जूते,साड़ी,और शराब ही नहीं बल्कि पैसा भी बांटना पड़ेगा। मै तो अक्सर सोचता हूँ कि जन प्रतिनिधित्व क़ानून में संशोधन कर जूते-चप्पल,साडी,शराब और पैसा बाँटने को विधिक मान्यता मिलना चाहिए, क्योंकि इनके बिना चुनाव होता ही नहीं है।

बहरहाल दिल्ली विधानसभा के चुनाव पर पूरे देश-दुनिया की नजर लगी है क्योंकि ये तीसरा और अंतिम अवसर है भाजपा और कांग्रेस के लिये भी । ये चुनाव भी यदि कांग्रेस और भाजपा नहीं जीत पायी तो जहाँ भाजपा का विश्वगुरु बनने का सपना टूट जाएगा वहीं कांग्रेस के लिए भी दिल्ली अभेद्य हो जाएगी। दिल्ली जीते बिना न कांग्रेस का माथा ऊंचा हो सकता है और न भाजपा का। अब देखते हैं कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में मतदान से पहले कौन-कौन जूतों में दाल बांटता है ,और चुनाव आयोग कितनों के खिलाफ मामले दर्ज करने की औपचारिकता पूरी करता है । क्योंकि चुनाव आयोग औरदिल्ली पुलिस में इतना साहस तो है नहीं कि वो मतदान से पहले प्रवेश वर्मा के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल कराकर उन्हें चुनाव लड़ने से रोक सके।

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