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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कोटा में विद्यार्थियों से बात करते हुए ऐसा क्यों कहा की असफलताओं पर हारे नेताओं की तरह करते रहे संघर्ष।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने बुधवार को राजस्थान के कोचिंग हब कोटा में मध्य प्रदेश के छात्रों से संवाद करके समझाया कि अगर प्रयासों में सफलता नहीं भी मिले तो भी कभी निराश मत होना, प्रयास जारी रखना। उन्होंने कहा कि असफलता के बावजूद बार-बार प्रयास और सब्र करने के मामले में आपको राजनेताओं से सीखना चाहिए, क्योंकि वे चुनाव में भले ही बार-बार हार का सामना करते हैं लेकिन चुनाव लड़ना नहीं छोड़ते।

छात्र-छात्राओं से बातचीत –

दरअसल, कोटा में देश भर से छात्र-छात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए कोचिंग करते हैं। ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें बहुत सारे छात्रों ने असफलता या निराशा की स्थिति में विपरीत कदम उठाए हैं। इसके मद्देनजर ही मुख्यमंत्री ने कोटा में कोचिंग पढ़ने वाले विद्यार्थियों से संवाद करके उन्हें निराशा की स्थिति में भी उम्मीदों और सकारात्मकता तथा प्रयासों का दामन कभी न छोड़ने की सीख दी।

असफलताओं पर हारे नेताओं की तरह करते रहे प्रयास-

डा. यादव ने छात्रों से कहा कि आप में से कोई चिकित्सा के क्षेत्र में जाना चाहता होगा, कोई इंजीनियर बनना चाहता होगा लेकिन कई बार ऐस होता है कि आप जो करना चाहते हैं, वो नहीं कर पाते या फिर आपको असफलता मिलती है तो मन निराशा से भर जाता होगा। ऐसे में, आप एक काम किया करो कि आप नेताओं की तरफ देख लिया करो।

बार-बार असफल होने पर दूसरा क्षेत्र चुने-

उन्होंने छात्रों से कहा कि जीवन में जिस भी मार्ग पर चलो सफलता आपका इंतजार कर रही है। निराश होने की जरूरत नहीं है। प्रयास करते रहने की जरूरत है। अगर आप बार-बार प्रयास करते रहेंगे तो एक दिन सफलता अवश्य मिलेगी। आप किसी एक क्षेत्र में बार-बार असफल होते हैं तो दूसरे क्षेत्र में सफलता के प्रयास करिए, लेकिन प्रयास करते रहिए

वाजपेयी, मोदी और स्वयं का उदाहरण दिया

मुख्यमंत्री डा. यादव ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जिक्र किया। कहा कि वाजपेयी ऐसे व्यक्ति थे, जिनके पीछे पूरा देश दीवाना था। पीएम नरेन्द्र मोदी ने 50 साल तक कोई चुनाव नहीं लड़ा और सीधे गुजरात के मुख्यमंत्री बने। 50 साल तक प्रचारक रहे। मोदी अब देश को आगे बढ़ा रहे हैं।

मुख्यमंत्री डा. यादव ने अपना उदाहरण दिया। कहा कि मैने कालेज में छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव लड़ने के लिए डाक्टरी छोड़ दी थी। 15 साल की उम्र में प्रथम वर्ष में साइंस कालेज में संयुक्त सचिव का चुनाव लड़ा, लेकिन बाद में कालेज छात्रसंघ अध्यक्ष और विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष भी बना। संवाद के दौरान छात्रों ने कुछ सवाल भी किए।

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