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टीबी का इलाज अब 20 नहीं 6 महीने, नई उपचार पद्धति को मिली मंजूरी

तपेदिक टीवी ट्यूबरोक्लोसिस ये गंभीर मरीजों के लिए यह खबर राहत देने वाली है। क्योंकि अभी तक टीवी के इलाज की प्रक्रिया को लंबा माना जाता रहा है और यदि किसी मरीज को मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट ट्यूब्रोक्लोसिस (MDR TB) हो जाये तो फिर तो उसका इलाज सरकार के लिए भी चुनौती रहा। लेकिन अब इस क्षेत्र में केंद्र सरकार एक राहत भरी शुरुआत करने जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने मल्टी- ड्रग रेसिस्टेंट ट्यूबरकुलोसिस (एमडीआर-टीबी) या दवा प्रतिरोधिक तपेदिक के उपचार की नई पद्धति को मंजूरी दे दी है। 

स्वास्थ्य मंत्रालय ने टीबी के मरीजों के लिए अब मोक्सीफ्लोक्सासिन, प्रीटोमैनिड, बेडाक्विलिन और लाइनजोलिड दवाओं के इस्तेमाल की अनुमति दी है। बता दें भारत सरकार का 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य है। सरकार के इस नए फैसले से देश में इस अभियान को बल मिलेगा। इन दवाओं के प्रयोग से कम समय मे टीवी का इलाज संभव हो सकेगा। और लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे मरीजों।को राहत मिलेगी।


देश में  एम डी आर टी बी के लगभग 75000  मरीज हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत बहु-दवा प्रतिरोधी तपेदिक (एमडीआर-टीबी) के खिलाफ इन नई और प्रभावी उपचार पद्धति बीपीएएलएम को मंजूरी दी है। अब तक इंडिया में टीबी के मरीजों का पूरा कोर्स करीब 20 महीने का होता है। जबकि अब नई पद्वति से इस कोर्स की अवधि 6 महीने ही होगी। चार नई एंटी-टीबी दवाओं से टीबी के मरीज का जल्द इलाज करने में मदद मिलेगी। केंद्र सरकार के अनुसार जिन नई दावाओं को इलाज में शामिल किया गया है उन सभी को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) से अनुमति मिली हुई है। 

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