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“स्वतंत्रता को हल्के में न लें” भारत के मुख्य न्यायाधीश को यह क्यों कहना पड़ा? समझते हैं

नई दिल्ली; भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ का एक बड़ा बयान स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सामने आया है। उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली के परिसर में ध्वजारोहण के बाद मुख्य न्यायाधीश ने पत्रकारों से चर्चा की और पत्रकारों से चर्चा करते हुए वह भारत की स्वतंत्रता की बात कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने स्वतंत्रता के महत्व पर जोर देते हुए तमाम बातें साझा की। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस हमें देश के लोगों के एक-दूसरे के प्रति तथा राष्ट्र के प्रति संविधान के सभी मूल्यों को साकार करने के कर्तव्यों की याद दिलाता है। 

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि कई वकीलों ने अपना कानूनी पेशा छोड़ दिया और राष्ट्र के लिए खुद को समर्पित कर दिया। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मैं आप सभी को, हमारे पत्रकार साथियों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। आपके माध्यम से मैं पूरे देश को, विशेषकर कानून से जुड़े लोगों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यह हमें एक-दूसरे के प्रति और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों की याद दिलाने का दिन है।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आज बांग्लादेश में जो कुछ हो रहा है, वह स्पष्ट रूप से याद दिलाता है कि हमारे लिए स्वतंत्रता कितनी मूल्यवान है। स्वतंत्रता को हल्के में लेना बहुत आसान है, लेकिन अतीत की घटनाओं को समझना महत्वपूर्ण है, ताकि हमें याद रहे कि ये चीजें कितनी जरूरी हैं। मुख्य न्यायाधीश का यह बयान आज के परिदृश्य में बहुत मायने रखता है। क्योंकि स्वतंत्रता दिवस के दिन यह देखा जाता है के ज्यादातर लोगों को स्वतंत्रता की कीमत का एहसास भी नहीं है वह इसे बहुत ही हल्के में लेते हैं। जब आप किसी देश के स्वतंत्र नागरिक होते हैं तो आपके ऊपर देश के बेहतरी की हर एक छोटी बड़ी जिम्मेदारी होती है।

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